
अक्सर विद्यार्थी पूछते हैं कि किसी बिंदु की सही जगह कैसे बताएं। क्या सिर्फ नाम या निर्देशांक बता देना काफी है? असल में, जब हम द्विविमीय या त्रिविमीय ज्यामिति में किसी बिंदु की स्थिति समझना चाहते हैं, तो केवल नाम या निर्देशांक से पूरी जानकारी नहीं मिलती। यहाँ स्थिति सदिश (Position Vector) की आवश्यकता होती है। यह केवल गणित में ही नहीं, बल्कि भौतिकी में भी बहुत उपयोगी है।
उदाहरण के लिए, जब हमें किसी वस्तु का विस्थापन, वेग या बल समझना हो, तब भी स्थिति सदिश का महत्व सामने आता है। जैसे आप अपने दोस्त को बताते हैं कि मेरा घर मंदिर से 500 मीटर उत्तर की ओर है, वैसे ही गणित में भी किसी बिंदु की स्थिति को पूरी तरह से समझाने के लिए स्थिति सदिश का उपयोग किया जाता है।
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बिंदु की पहचान: नाम से लेकर सही स्थान तक
सोचिए, आपके पास एक कागज है और आपने उस पर एक बिंदु $P$ बना दिया है। अगर आप केवल उसका नाम बता दें, तो सामने वाला नहीं समझ पाएगा कि वह बिंदु कहाँ है। लेकिन जैसे ही आप कहते हैं कि $P(x, y)$ है, तो अब साफ हो जाता है कि $P$ बिंदु $x$-अक्ष से $x$ दूरी और $y$-अक्ष से $y$ दूरी पर है। यह ठीक वैसे ही है जैसे आप अपने दोस्त को बताते हैं कि मेरी दुकान चौक से 2 किलोमीटर उत्तर और 3 किलोमीटर पूर्व है। अब आपके दोस्त को रास्ता भी समझ में आ जाता है।
यहाँ एक बात और समझना जरूरी है। निर्देशांक $P(x, y)$ से हमें बिंदु की स्थिति तो मिल जाती है, लेकिन अगर हमें किसी गतिशील वस्तु या कण की स्थिति को एक तीर या निर्देशित रेखा के रूप में दिखाना हो, तो हमें एक निश्चित आरंभिक बिंदु चाहिए। आमतौर पर हम इसे मूलबिंदु $O(0, 0)$ मानते हैं।
मूलबिंदुअब मूलबिंदु $O(0, 0)$ से बिंदु $P(x, y)$ तक जो तीर या रेखा जाती है और $P$ की ओर इशारा करती है, उसे हम $\vec{OP}$ कहते हैं। यही $P$ का स्थिति सदिश (Position Vector) कहलाता है। इसका मतलब यह हुआ कि स्थिति सदिश हमें केवल दूरी ही नहीं, बल्कि दिशा भी बताता है। अवधारणात्मक शृंखला के अनुसार, पहले समतल में एक स्थिर संदर्भ बिंदु (Origin) का चयन किया जाता है, फिर उस बिंदु से इच्छित बिंदु तक एक निर्देशित तीर (Directed Segment) की कल्पना की जाती है, और अंततः उस तीर को एक बीजीय व्यंजक के रूप में निरूपित किया जाता है।
बिंदु और स्थिति सदिश में क्या अंतर है?
यहाँ एक आम गलतफहमी होती है। कई बार विद्यार्थी सोचते हैं कि बिंदु और उसकी स्थिति सदिश एक ही चीज़ हैं। बिंदु केवल स्थान बताता है, जबकि स्थिति सदिश दिशा और दूरी दोनों को स्पष्ट करता है।
| गुणधर्म | बिंदु (Point) P(x,y) | स्थिति सदिश (Position Vector) OP |
| मूल प्रश्न | यह निरूपित करता है: “स्थान कहाँ है?” | यह निम्नलिखित करता है: “मूलबिंदु से वहाँ तक कैसे पहुँचे?” |
| गणितीय रूप | संख्याओं का एक क्रमबद्ध युग्म (Ordered Pair): $(x, y)$ | घटकों का बीजीय योग: $x\hat{i} + y\hat{j}$ या $\begin{pmatrix} x \\ y \end{pmatrix}$ |
| संदर्भ बिंदु | अप्रत्यक्ष रूप से अक्षों पर निर्भर है। | मूलबिंदु $O(0,0)$ से प्रत्यक्ष रूप से बंधा हुआ है। |
| बीजीय संक्रियाएं | बिंदुओं को सीधे जोड़ा या घटाया नहीं जा सकता। | सदिश योग, अंतर और गुणफल के नियमों का पूर्ण पालन करता है। |
मान लीजिए हमारे पास समतल पर एक बिंदु $P(3, 4)$ है। इसका मतलब है कि $P$ मूलबिंदु से 3 इकाई दाईं ओर और 4 इकाई ऊपर स्थित है। अब यदि हम इसी स्थिति को सदिश के रूप में लिखना चाहें, तो इसे $\vec{OP} = 3\hat{i} + 4\hat{j}$ कहेंगे। यहाँ $\hat{i}$ और $\hat{j}$ क्रमशः क्षैतिज (x-अक्ष) और ऊर्ध्वाधर (y-अक्ष) दिशा के लिए मानक इकाई सदिश हैं। इस तरह, $\vec{OP}$ हमें बताता है कि मूलबिंदु से $P$ तक पहुँचने के लिए 3 इकाई दाईं ओर और 4 इकाई ऊपर जाना होगा।
अब सवाल उठता है कि निर्देशांक (Coordinates) को सदिश (Vector) के घटकों में कैसे बदला जाए।
इसके लिए हम मानक इकाई सदिशों $\hat{i}$ और $\hat{j}$ का उपयोग करते हैं, जो क्रमशः x और y दिशा को दर्शाते हैं।
द्विविमीय समतल में यह प्रक्रिया और भी आसान हो जाती है।
- $x$-अक्ष की धनात्मक दिशा में इकाई सदिश को $\hat{i}$ से निरूपित किया जाता है।
- $y$-अक्ष की धनात्मक दिशा में इकाई सदिश को $\hat{j}$ से निरूपित किया जाता है।
यदि किसी बिंदु $P$ के निर्देशांक $(x, y)$ हैं, तो मूलबिंदु $O(0,0)$ से $P$ तक पहुँचने के लिए हमें x इकाई दाईं ओर और y इकाई ऊपर जाना होगा। इसी रास्ते को हम स्थिति सदिश (Position Vector) कहते हैं, जिसे दो अलग-अलग रूपों में लिखा जा सकता है:
- घटक रूप (Component Form):$$\vec{OP} = x\hat{i} + y\hat{j}$$
- स्तंभ रूप (Column Vector Form):$$\vec{OP} = \begin{pmatrix} x \\ y \end{pmatrix}$$
यहाँ $x$ वाला भाग स्थिति सदिश का क्षैतिज (horizontal) घटक है, यानी दाईं-बाईं दिशा में कितना जाना है। वहीं $y$ वाला भाग ऊर्ध्वाधर (vertical) घटक है, यानी ऊपर-नीचे की दिशा में कितना बढ़ना है।
उदाहरण के लिए, अगर बिंदु $P(4, 3)$ है, तो इसका स्थिति सदिश $\vec{OP} = 4\hat{i} + 3\hat{j}$ होगा। इसका अर्थ है कि मूलबिंदु से 4 इकाई दाईं ओर और 3 इकाई ऊपर जाना है। यहाँ एक बात ध्यान देने योग्य है: यदि किसी घटक का मान ऋणात्मक हो, तो इसका मतलब है कि हमें उस दिशा के विपरीत जाना है, न कि कोई गलती हो गई है। जैसे $-3\hat{i}$ का अर्थ है 3 इकाई बाईं ओर।
कार्तीय समतल के चारों चतुर्थांशों (Quadrants) में स्थिति सदिश के घटकों के चिह्नों का व्यवहार निम्नलिखित तालिका में स्पष्ट किया गया है: निम्नलिखित तालिका में स्पष्ट किया गया है:
| चतुर्थांश (Quadrant) | बिंदु का रूप | स्थिति सदिश OP | x-अक्ष की दिशा | y-अक्ष की दिशा |
| प्रथम चतुर्थांश (I) | $P(+, +)$ | $x\hat{i} + y\hat{j}$ | दाएँ (Right) | ऊपर (Up) |
| द्वितीय चतुर्थांश (II) | $P(-, +)$ | $-x\hat{i} + y\hat{j}$ | बाएँ (Left) | ऊपर (Up) |
| तृतीय चतुर्थांश (III) | $P(-, -)$ | $-x\hat{i} – y\hat{j}$ | बाएँ (Left) | नीचे (Down) |
| चतुर्थ चतुर्थांश (IV) | $P(+, -)$ | $x\hat{i} – y\hat{j}$ | दाएँ (Right) | नीचे (Down) |
यदि $P(-3, 4)$ दिया गया है, तो स्थिति सदिश $\vec{OP} = -3\hat{i} + 4\hat{j}$ बनता है। यहाँ $-3\hat{i}$ का अर्थ है कि मूलबिंदु से 3 इकाई बाएँ चलना है, और $+4\hat{j}$ का अर्थ है कि 4 इकाई ऊपर जाना है।
स्थिति सदिश: दिशा और दूरी का सही मतलब

अक्सर हम सोचते हैं कि किसी जगह तक पहुँचने के लिए केवल दूरी जानना काफी है, लेकिन असल में दिशा भी उतनी ही जरूरी है। मान लीजिए आपको कोई कहे, ‘यहाँ से 5 किलोमीटर पूर्व की ओर और फिर 3 किलोमीटर उत्तर की ओर चलो।’ अब यहाँ सिर्फ दूरी नहीं, बल्कि किस दिशा में कितना चलना है, यह भी बताया गया है। यही स्थिति सदिश का असली मतलब है—दूरी (परिमाण) और दिशा, दोनों का मिलाजुला रूप।
गणितीय रूप से, निर्देश $5\hat{i} + 3\hat{j}$ ठीक इसी प्रक्रिया को निरूपित करता है:
- $5\hat{i} \rightarrow$ प्रथम दिशा में 5 इकाई का विस्थापन।
- $3\hat{j} \rightarrow$ द्वितीय लंबवत दिशा में 3 इकाई का विस्थापन।
यह संकल्पना गणितीय व्यंजकों को वास्तविक भौतिक विस्थापन से जोड़ने में सहायता करती है।
स्थिति सदिश का परिमाण: मूलबिंदु से दूरी
किसी स्थिति सदिश $\vec{OP} = x\hat{i} + y\hat{j}$ का परिमाण (Magnitude) मूलबिंदु $O(0,0)$ से बिंदु $P(x,y)$ की सीधी रेखा की दूरी को दर्शाता है। इसे $|\vec{OP}|$ या निरपेक्ष मान के चिह्न के साथ निरूपित किया जाता है।
समकोण त्रिभुज द्वारा परिमाण सूत्र की व्युत्पत्ति
समतल पर मूलबिंदु $O(0,0)$, $x$-अक्ष पर स्थित बिंदु $A(x,0)$ और बिंदु $P(x,y)$ का अवलोकन करें।
- रेखाखंड $OA$ की लंबाई $x$ है।
- रेखाखंड $AP$ की लंबाई $y$ है, जो $OA$ पर लंबवत है।
- $\triangle OAP$ एक समकोण त्रिभुज बनता है जिसमें कोण $\angle OAP = 90^\circ$ है।
पाइथागोरस प्रमेय लागू करने पर:
$$OP^2 = OA^2 + AP^2 $$$$ OP^2 = x^2 + y^2 $$$$ OP = \sqrt{x^2 + y^2}$$
अतः, स्थिति सदिश $\vec{OP} = x\hat{i} + y\hat{j}$ का परिमाण सूत्र है:
$$|\vec{OP}| = \sqrt{x^2 + y^2}$$
यदि $P(3, 4)$ है, तो परिमाण होगा:
$$|\vec{OP}| = \sqrt{3^2 + 4^2} = \sqrt{9 + 16} = \sqrt{25} = 5 $$ इकाई
स्थिति सदिश और दूरी सूत्र का अंतर्संबंध
निर्देशांक ज्यामिति (Coordinate Geometry) में दो बिंदुओं के बीच की दूरी निकालने के लिए दूरी सूत्र का उपयोग किया जाता है। मूलबिंदु $O(0,0)$ और किसी बिंदु $P(x,y)$ के बीच दूरी सूत्र:
$$d = \sqrt{(x – 0)^2 + (y – 0)^2} = \sqrt{x^2 + y^2}$$
स्थिति सदिश का परिमाण $|\vec{OP}| = \sqrt{x^2 + y^2}$ ठीक इसी दूरी सूत्र के समान है। इससे यह स्पष्ट होता है कि निर्देशांक ज्यामिति और सदिश बीजगणित गणित की दो पृथक शाखाएं नहीं हैं, बल्कि एक ही ज्यामितीय सत्य को व्यक्त करने के दो भिन्न तरीके हैं।
सदिश की दिशा: परिमाण और अभिन्यास का पृथक्करण

दो स्थिति सदिशों का परिमाण समान हो सकता है, परंतु उनकी दिशाएं भिन्न हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, निम्नलिखित दो सदिशों पर विचार करें:
$$\vec{a} = 3\hat{i} + 4\hat{j}$$
$$\vec{b} = -3\hat{i} + 4\hat{j}$$
दोनों का परिमाण ज्ञात करने पर:
$$|\vec{a}| = \sqrt{3^2 + 4^2} = 5$$
$$|\vec{b}| = \sqrt{(-3)^2 + 4^2} = 5$$
यद्यपि दोनों बिंदु मूलबिंदु से समान दूरी ($5$ इकाई) पर स्थित हैं, किंतु बिंदु $P_1(3,4)$ प्रथम चतुर्थांश में है और $P_2(-3,4)$ द्वितीय चतुर्थांश में है।
यह तुलना तीन मुख्य घटकों को स्पष्ट करती है:
- परिमाण (Magnitude): सदिश कितना लंबा है ($5$ इकाई)।
- दिशा (Direction): सदिश किस ओर अभिमुख है (प्रथम चतुर्थांश बनाम द्वितीय चतुर्थांश)।
- स्थिति (Position): सदिश किस बिंदु से संबंधित है?
द्वि-दिशात्मक रूपांतरण: सदिश से बिंदु और बिंदु से सदिश
गणितीय दक्षता के लिए बिंदु और स्थिति सदिश के बीच दोनों दिशाओं में रूपांतरण का अभ्यास आवश्यक है।
- बिंदु से सदिश रूपांतरण (Forward Mapping):यदि बिंदु के निर्देशांक $P(5, -2)$ दिए गए हों, तो $x = 5$ और $y = -2$ को घटकों के रूप में लिखकर स्थिति सदिश प्राप्त होता है:$$\vec{OP} = 5\hat{i} – 2\hat{j}$$
- सदिश से बिंदु रूपांतरण (Reverse Mapping):यदि स्थिति सदिश $\vec{OQ} = -7\hat{i} + 6\hat{j}$ दिया गया हो, तो घटकों के गुणांकों को निकालकर बिंदु के निर्देशांक प्राप्त होते हैं:$$Q(-7, 6)$$
मूलबिंदु की केंद्रीय भूमिका
स्थिति सदिश की परिभाषा में मूलबिंदु एक अपरिहार्य संदर्भ बिंदु (Reference Point) है। यदि संदर्भ बिंदु बदल दिया जाए, तो किसी बिंदु का स्थिति सदिश भी बदल जाता है।
$\vec{OP}$ व्यंजक में:
- पहला अक्षर $O$ प्रारंभिक बिंदु (Initial Point) यानी मूलबिंदु को दर्शाता है।
- दूसरा अक्षर $P$ अंतिम बिंदु (Terminal Point) को दर्शाता है।
स्थिति सदिश कोई स्वेच्छ (Arbitrary) सदिश नहीं है जो समतल में कहीं से भी प्रारम्भ हो सके। यह सदैव मूलबिंदु $O(0,0)$ पर आबद्ध (Bound Vector) होता है।
दो बिंदुओं के बीच स्थिति सदिशों का संबंध
समतल में यदि दो स्वतंत्र बिंदु $A(x_1, y_1)$ और $B(x_2, y_2)$ दिए गए हों, तो मूलबिंदु के सापेक्ष उनके स्थिति सदिश क्रमशः होंगे:
$$\vec{OA} = x_1\hat{i} + y_1\hat{j}$$
$$\vec{OB} = x_2\hat{i} + y_2\hat{j}$$
बिंदु $A$ से बिंदु $B$ की ओर निर्देशित सदिश $\vec{AB}$ को $A$ और $B$ के स्थिति सदिशों के पदों में व्यक्त करने के लिए सदिश योग का नियम लागू किया जाता है।
सूत्र $\vec{AB} = \vec{OB} – \vec{OA}$ की ज्यामितीय व्युत्पत्ति

सदिश योग के त्रिभुज नियम (Triangle Law of Vector Addition) का उपयोग करके इस सूत्र की व्युत्पत्ति आसानी से की जा सकती है।
त्रिभुज $OAB$ में:
- मूलबिंदु $O$ से $A$ तक का सदिश $=\vec{OA}$
- बिंदु $A$ से $B$ तक का सदिश $=\vec{AB}$
- परिणामी सदिश, जो $O$ से सीधे $B$ तक जाता है $=\vec{OB}$
सदिश योग के त्रिभुज नियम से:
$$\vec{OA} + \vec{AB} = \vec{OB}$$
पक्षांतरण करने पर:
$$\vec{AB} = \vec{OB} – \vec{OA}$$
सदिश $$ \vec{AB} = $$ अंतिम बिंदु B का स्थिति सदिश – प्रारंभिक बिंदु A का स्थिति सदिश
घटक रूप में प्रदर्शन
$$\vec{AB} = (x_2\hat{i} + y_2\hat{j}) – (x_1\hat{i} + y_1\hat{j})$$
$$\vec{AB} = (x_2 – x_1)\hat{i} + (y_2 – y_1)\hat{j}$$
यदि $A(2, 3)$ और $B(7, 6)$ हों, तो:
$$\vec{AB} = (7 – 2)\hat{i} + (6 – 3)\hat{j} = 5\hat{i} + 3\hat{j}$$
अर्थात बिंदु $A$ से $B$ तक पहुँचने के लिए 5 इकाई दाएँ और 3 इकाई ऊपर चलना होगा।
$\vec{AB}$ और $\vec{BA}$ का तुलनात्मक अध्ययन
किन्हीं दो बिंदुओं $A$ और $B$ के बीच सदिश की दिशा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
$$\vec{AB} = \vec{OB} – \vec{OA}$$
$$\vec{BA} = \vec{OA} – \vec{OB}$$
दोनों व्यंजकों की तुलना करने पर:
$$\vec{BA} = -(\vec{OB} – \vec{OA}) = -\vec{AB}$$
यदि $\vec{AB} = 4\hat{i} + 2\hat{j}$ है, तो $\vec{BA} = -4\hat{i} – 2\hat{j}$ होगा।
इससे यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकलता है कि समान अंतबिंदु (Endpoints) होने के बावजूद, दिशा विपरीत होते ही सदिश ऋणात्मक हो जाता है, भले ही दोनों रेखाखंडों की लंबाई (परिमाण) समान रहे।
स्थिति सदिश के माध्यम से दो बिंदुओं के बीच की दूरी

यदि बिंदु $A(x_1, y_1)$ और $B(x_2, y_2)$ के बीच विस्थापन सदिश $\vec{AB} = (x_2 – x_1)\hat{i} + (y_2 – y_1)\hat{j}$ ज्ञात हो चुका है, तो दोनों बिंदुओं के बीच की दूरी $AB$ इस सदिश के परिमाण के बराबर होगी।
$$AB = |\vec{AB}|$$
$$AB = \sqrt{(x_2 – x_1)^2 + (y_2 – y_1)^2}$$
कार्यप्रणाली निम्नलिखित चरणों में संपन्न होती है:
- सबसे पहले दो बिंदुओं के स्थिति सदिश लिखे जाते हैं।
- अंतर द्वारा विस्थापन सदिश $\vec{AB}$ ज्ञात किया जाता है।
- विस्थापन सदिश का परिमाण निकाला जाता है, जिससे दूरी प्राप्त हो जाती है।
समान स्थिति सदिश
दो स्थिति सदिश $\vec{OP}$ और $\vec{OQ}$ केवल और केवल तभी समान हो सकते हैं जब उनके संगत घटक (corresponding components) आपस में बराबर हों।
यदि $\vec{OP} = x_1\hat{i} + y_1\hat{j}$ तथा $\vec{OQ} = x_2\hat{i} + y_2\hat{j}$ हैं, और $\vec{OP} = \vec{OQ}$ दिया गया है, तो:
$$x_1 = x_2 \quad $$ तथा $$ \quad y_1 = y_2$$
इसका ज्यामितीय अर्थ यह है कि समतल में दो समान स्थिति सदिश एक ही बिंदु को निरूपित करते हैं, अर्थात बिंदु $P$ और बिंदु $Q$ संपाती (Coincident) हैं ($P = Q$)।
शून्य स्थिति सदिश
यदि कोई बिंदु स्वयं मूलबिंदु $O(0, 0)$ पर ही स्थित हो, तो उसका स्थिति सदिश शून्य सदिश (Zero Vector या Null Vector) कहलाता है।
$$\vec{OO} = 0\hat{i} + 0\hat{j} = \vec{0}$$
शून्य स्थिति सदिश की मुख्य विशेषताएं:
- परिमाण: इसका परिमाण शून्य होता है ($\vert{}\vec{0}\vert{} = 0$)।
- दिशा: इसकी कोई निश्चित या अद्वितीय दिशा नहीं होती (Direction is indeterminate/arbitrary)।
सामान्य सदिश और स्थिति सदिश में अंतर
सदिश बीजगणित में सभी सदिश स्थिति सदिश नहीं होते। सामान्य सदिश (मुक्त सदिश/Free Vector) और स्थिति सदिश (बद्ध सदिश/Bound Vector) का अंतर समझना आवश्यक है।
| गुणधर्म | स्थिति सदिश (Position Vector) | सामान्य सदिश (General/Displacement Vector) |
| प्रारंभिक बिंदु | सदैव मूलबिंदु $O(0,0)$ पर निश्चित होता है। | समतल में किसी भी बिंदु से प्रारम्भ हो सकता है। |
| निरूपण | प्रायः $\vec{OP}, \vec{OA}, \vec{r}$ से दर्शाया जाता है। | $\vec{AB}, \vec{v}, \vec{a}, \vec{F}$ आदि से दर्शाया जाता है। |
| भौतिक अर्थ | समतल में किसी विशिष्ट स्थान का पता बताता है। | दो बिंदुओं के बीच विस्थापन या किसी बल/वेग को व्यक्त करता है। |
| स्थानांतरण स्वतंत्रता | इसे समतल में कहीं भी खिसकाया नहीं जा सकता। | परिमाण व दिशा बदले बिना इसे समांतर में स्थानांतरित किया जा सकता है। |
यदि $\vec{OP} = 3\hat{i} + 2\hat{j}$ है, तो यह दर्शाता है कि बिंदु $P$ का स्थान $(3, 2)$ है। परंतु यदि $\vec{AB} = 3\hat{i} + 2\hat{j}$ है, तो यह दर्शाता है कि बिंदु $A$ से बिंदु $B$ जाने के लिए 3 इकाई क्षैतिज और 2 इकाई ऊर्ध्वाधर विस्थापन हुआ है, भले ही $A$ समतल में कहीं भी स्थित हो।
सदिश घटकों से स्थान और चतुर्थांश पढ़ना
यदि केवल एक स्थिति सदिश दिया गया हो, जैसे:

$$\vec{r} = 6\hat{i} – 8\hat{j}$$
तो बिना ग्राफ बनाए भी इससे निम्नलिखित 4 प्रमुख जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं:
- बिंदु के निर्देशांक: $P(6, -8)$
- चतुर्थांश (Quadrant): चूंकि $x > 0$ और $y < 0$ है, अतः यह चतुर्थ चतुर्थांश (IV Quadrant) में स्थित है।
- मूलबिंदु से दूरी (परिमाण):$$|\vec{r}| = \sqrt{6^2 + (-8)^2} = \sqrt{36 + 64} $$$$= \sqrt{100} = 10 $$ इकाई
- घटकों का मान: $x$-दिशा में 6 इकाई (दाएँ) और $y$-दिशा में -8 इकाई (नीचे)।
स्थिति सदिश और इकाई सदिश
किसी स्थिति सदिश $\vec{r} = x\hat{i} + y\hat{j}$ की दिशा में 1 इकाई परिमाण वाले सदिश को उसका इकाई सदिश (Unit Vector) कहा जाता है, जिसे $\hat{r}$ (r-cap) से व्यक्त किया जाता है।
इकाई सदिश ज्ञात करने का मानक सूत्र है:
$$\hat{r} = \frac{\vec{r}}{|\vec{r}|}$$
यदि $\vec{r} = 3\hat{i} + 4\hat{j}$ हो, तो:
- परिमाण $|\vec{r}| = \sqrt{3^2 + 4^2} = 5$
- इकाई सदिश:$$\hat{r} = \frac{3\hat{i} + 4\hat{j}}{5} = \frac{3}{5}\hat{i} + \frac{4}{5}\hat{j}$$
इकाई सदिश का परिमाण सदैव 1 होता है ($\vert{}\hat{r}\vert{} = 1$); इसका मुख्य कार्य सदिश की दिशा को निरूपित करना है।
त्रिकोणमितीय घटकों द्वारा दिशा का निर्धारण
यदि स्थिति सदिश $\vec{r} = x\hat{i} + y\hat{j}$ धनात्मक $x$-अक्ष के साथ $\theta$ कोण बनाता है, तो समकोण त्रिभुज की त्रिकोणमिति के अनुसार:
$$\cos\theta = \frac{x}{|\vec{r}|} $$$$ \implies x = |\vec{r}|\cos\theta$$
$$\sin\theta = \frac{y}{|\vec{r}|} $$$$\implies y = |\vec{r}|\sin\theta$$
अतः स्थिति सदिश को परिमाण और कोण के रूप में भी लिखा जा सकता है:
$$\vec{r} = |\vec{r}|\cos\theta\,\hat{i} + |\vec{r}|\sin\theta\,\hat{j}$$
सदिश की दिशा का कोण $\theta$ ज्ञात करने का सूत्र है:
$$\tan\theta = \frac{y}{x} $$$$\implies \theta = \tan^{-1}\left(\frac{y}{x}\right)$$
ग्राफिकल निरूपण और चतुर्थांश विश्लेषण
चारों चतुर्थांशों में स्थिति सदिशों के व्यवहार को समझने के लिए निम्नलिखित चार बिंदुओं का विश्लेषण अत्यंत उपयोगी है:
- प्रथम चतुर्थांश: बिंदु $A(2, 3) $$\implies \vec{OA} = 2\hat{i} + 3\hat{j}$ (दाएँ और ऊपर)।
- द्वितीय चतुर्थांश: बिंदु $B(-4, 2) $$\implies \vec{OB} = -4\hat{i} + 2\hat{j}$ (बाएँ और ऊपर)।
- तृतीय चतुर्थांश: बिंदु $C(-2, -3) $$\implies \vec{OC} = -2\hat{i} – 3\hat{j}$ (बाएँ और नीचे)।
- चतुर्थ चतुर्थांश: बिंदु $D(3, -4) $$\implies \vec{OD} = 3\hat{i} – 4\hat{j}$ (दाएँ और नीचे)।
इन सभी बिंदुओं के लिए मूलबिंदु से तीर खींचे जाते हैं जो क्रमशः संबंधित चतुर्थांशों की ओर निर्दिष्ट होते हैं।
एक ही अवधारणा के तीन निरूपण
गणित में एक ही ज्यामितीय अवधारणा को तीन अलग-अलग दृष्टिकोणों से व्यक्त किया जा सकता है:
- बिंदु रूप (Point Form): निरूपण $P(3, 4)$, जो निर्देशांकों का जोड़ा है।
- सदिश रूप (Vector Form): निरूपण $\vec{OP} = 3\hat{i} + 4\hat{j}$, जो घटकों का बीजीय रूप है।
- आरेखीय रूप (Diagrammatic Form): मूलबिंदु $O(0,0)$ से बिंदु $P(3,4)$ तक खींचा गया निर्देशित रेखाखंड या तीर।
ये तीनों निरूपण एक ही गणितीय स्थिति के भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण हैं।
स्थिति सदिश और संरेखता
यदि दो बिंदुओं $A$ और $B$ के स्थिति सदिश $\vec{OA}$ और $\vec{OB}$ आपस में एक अदिश (Scalar) द्वारा संबंधित हों:
$$\vec{OB} = \lambda \vec{OA}$$
जहाँ $\lambda$ एक वास्तविक संख्या (Real Number) है, तो इसका अर्थ है कि $\vec{OA}$ और $\vec{OB}$ एक ही रेखा के अनुदिश हैं या समांतर हैं।
चूंकि दोनों सदिशों का प्रारंभिक बिंदु $O$ (मूलबिंदु) उभयनिष्ठ (Common) है, इसलिए बिंदु $O$, $A$, और $B$ अवश्य ही एक ही सीधी रेखा पर स्थित होंगे, अर्थात वे संरेख (Collinear) होंगे।
स्थिति सदिश में सामान्य भ्रांतियां और त्रुटियाँ
स्थिति सदिश के प्रश्नों को हल करते समय होने वाली मुख्य त्रुटियों का विश्लेषण नीचे दी गई तालिका में किया गया है:
| भ्रांति / त्रुटि | गलत सोच | सही विधि / अवधारणा |
| बीजीय योग | $P(3, 4)$ का स्थिति सदिश $3 + 4 = 7$ लिखना। | $\hat{i}$ और $\hat{j}$ लंबवत घटक हैं; इन्हें सीधे जोड़कर नहीं जोड़ा जा सकता। सही रूप: $3\hat{i} + 4\hat{j}$ |
| ऋणात्मक चिह्न की उपेक्षा | $P(-3, 4)$ के लिए $\vert{}\vec{OP}\vert{} = \sqrt{-3^2 + 4^2} = \sqrt{-5}$ | वर्ग करते समय ऋण चिह्न धनात्मक हो जाता है: $\sqrt{(-3)^2 + 4^2} = \sqrt{9+16} = 5$ |
| अंतर सूत्र का क्रम | $\vec{AB} = \vec{OA} – \vec{OB}$ लिखना। | सही सूत्र है: $\vec{AB} = \vec{OB} – \vec{OA}$ (अंतिम – प्रारंभिक) |
| दिशा की उपेक्षा | $\vec{AB} = \vec{BA}$ मान लेना। | दिशा विपरीत होने पर चिह्न बदलता है: $\vec{BA} = -\vec{AB}$ |
| सदिश और परिमाण में भ्रम | $\vec{OP} = \sqrt{x^2+y^2}$ लिखना। | $\sqrt{x^2+y^2}$ परिमाण ($\vert{}\vec{OP}\vert{}$) है, सदिश ($\vec{OP}$) नहीं। |
| शून्य सदिश की दिशा | $\vec{0}$ की एक निश्चित दिशा मानना। | शून्य सदिश की दिशा अनिर्धारित (Indeterminate) होती है। |
| निरूपण का सम्मिश्रण | $P = 3\hat{i} + 4\hat{j}$ लिखना। | बिंदु $P(3,4)$ है और सदिश $\vec{OP} = 3\hat{i} + 4\hat{j}$ है। |
प्रश्न समाधान रणनीति
परीक्षा में स्थिति सदिश के प्रश्नों को देखते ही प्राथमिक निर्णय लेने की प्रक्रिया निम्नलिखित नियमों पर आधारित है:
- यदि प्रश्न में बिंदु $P(x, y)$ दिया हो:
- स्थिति सदिश लिखें $\rightarrow \vec{OP} = x\hat{i} + y\hat{j}$।
- यदि स्थिति सदिश $x\hat{i} + y\hat{j}$ दिया हो:
- बिंदु निरूपित करें $\rightarrow P(x, y)$।
- यदि दो बिंदु $A$ और $B$ दिए हों:
- दोनों स्थितियों में सदिश $\vec{OA}$ और $\vec{OB}$ लिखिए।
- अंतर सदिश निकालें $\vec{AB} = \vec{OB} – \vec{OA}$।
- यदि दो बिंदुओं के बीच दूरी पूछी जाए:
- विस्थापन सदिश $\vec{AB}$ ज्ञात करें।
- परिमाण $\vert{}\vec{AB}\vert{} $$= \sqrt{(x_2-x_1)^2 + (y_2-y_1)^2}$ निकालें।
- यदि दिशा या इकाई सदिश पूछा जाए:
- सदिश का परिमाण निकालें।
- सदिश को उसके परिमाण से भाग दें $\hat{r} = \frac{\vec{r}}{\vert{}\vec{r}\vert{}}$।
विस्तृत हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: बिंदु से स्थिति सदिश और परिमाण ज्ञात करना
प्रश्न: यदि बिंदु $P(5, -3)$ है, तो इसका स्थिति सदिश और मूलबिंदु से इसकी दूरी ज्ञात कीजिए।
- विचार प्रक्रिया: बिंदु $(x, y) = (5, -3)$ दिया है। स्थिति सदिश $\vec{OP} = x\hat{i} + y\hat{j}$ होगा तथा परिमाण $\vert{}\vec{OP}\vert{} = \sqrt{x^2+y^2}$ होगा।
- गणितीय गणना:$$\vec{OP} = 5\hat{i} – 3\hat{j}$$$$|\vec{OP}| = \sqrt{5^2 + (-3)^2} = \sqrt{25 + 9} = \sqrt{34} $$ इकाई
- भौतिक व्याख्या: बिंदु $P$ का स्थिति सदिश $5\hat{i} – 3\hat{j}$ है और यह मूलबिंदु से $\sqrt{34}$ इकाई की दूरी पर स्थित है।
उदाहरण 2: स्थिति सदिश से बिंदु और चतुर्थांश की पहचान
प्रश्न: स्थिति सदिश $\vec{OQ} = -2\hat{i} + 7\hat{j}$ द्वारा निरूपित बिंदु के निर्देशांक और चतुर्थांश बताइए।
- विचार प्रक्रिया: $\hat{i}$ का गुणांक $x$-निर्देशांक है और $\hat{j}$ का गुणांक $y$-निर्देशांक है।
- गणितीय गणना:$$x = -2, \quad y = 7$$अतः बिंदु $Q(-2, 7)$ है।
- भौतिक व्याख्या: चूंकि $x < 0$ और $y > 0$ है, इसलिए बिंदु $Q$ द्वितीय चतुर्थांश (Quadrant II) में स्थित है।
उदाहरण 3: दो बिंदुओं से विस्थापन सदिश ज्ञात करना
प्रश्न: बिंदु $A(1, 2)$ से बिंदु $B(6, 5)$ की ओर जाने वाला सदिश $\vec{AB}$ ज्ञात कीजिए।
- विचार प्रक्रिया: $\vec{AB} = \vec{OB} – \vec{OA}$ का उपयोग किया जाएगा।
- गणितीय गणना:$$\vec{OA} = 1\hat{i} + 2\hat{j}$$$$\vec{OB} = 6\hat{i} + 5\hat{j}$$$$\vec{AB} = (6\hat{i} + 5\hat{j}) – (1\hat{i} + 2\hat{j})$$$$\vec{AB} = (6 – 1)\hat{i} + (5 – 2)\hat{j} = 5\hat{i} + 3\hat{j}$$
- भौतिक व्याख्या: $A$ से $B$ तक जाने वाला विस्थापन सदिश $5\hat{i} + 3\hat{j}$ है।
उदाहरण 4: दो बिंदुओं के बीच की दूरी सदिश द्वारा निकालना
प्रश्न: यदि $\vec{AB} = 6\hat{i} + 8\hat{j}$ है, तो बिंदु $A$ और $B$ के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।
- विचार प्रक्रिया: दूरी $AB$ सदिश $\vec{AB}$ के परिमाण के बराबर होती है ($AB = \vert{}\vec{AB}\vert{}$)।
- गणितीय गणना:$$AB = |\vec{AB}| = \sqrt{6^2 + 8^2} = \sqrt{36 + 64} $$$$= \sqrt{100} = 10 $$ इकाई
- भौतिक व्याख्या: बिंदु $A$ और $B$ के बीच की सीधी दूरी 10 इकाई है।
अवधारणात्मक विचार-मंथन प्रश्न
प्रश्न 1: यदि $|\vec{OP}| = 0$ हो, तो बिंदु $P$ कहाँ स्थित होगा?
- उत्तर एवं तर्क: यदि $\vert{}\vec{OP}\vert{} = \sqrt{x^2+y^2} = 0$, तो $x^2 + y^2 = 0$ होना चाहिए। चूंकि दो वास्तविक संख्याओं के वर्गों का योग शून्य केवल तभी हो सकता है जब $x = 0$ और $y = 0$ हो, अतः बिंदु $P$ अनिवार्य रूप से मूलबिंदु $O(0,0)$ पर ही स्थित होगा।
प्रश्न 2: क्या दो भिन्न बिंदुओं के स्थिति सदिश समान हो सकते हैं?
- उत्तर एवं तर्क: नहीं। यदि $\vec{OP} = \vec{OQ}$ है, तो उनके निर्देशांक $(x_1, y_1)$ और $(x_2, y_2)$ समान होंगे ($x_1=x_2, y_1=y_2$)। इसका अर्थ है कि दोनों बिंदु एक ही स्थान पर हैं। अतः दो अलग-अलग बिंदुओं के स्थिति सदिश कभी समान नहीं हो सकते।
प्रश्न 3: यदि $\vec{AB} = -\vec{BA}$ है, तो उनके परिमाणों में क्या संबंध होगा?
- उत्तर एवं तर्क: परिमाण सदैव धनात्मक होता है।$$|\vec{BA}| = |-\vec{AB}| = |-1| \cdot |\vec{AB}| = |\vec{AB}|$$अतः दोनों सदिशों के परिमाण समान होंगे, केवल उनकी दिशाएँ एक-दूसरे के विपरीत (180° पर) होंगी।
प्रश्न 4: यदि $\vec{OB} = 2\vec{OA}$ हो, तो बिंदु $O, A$ और $B$ के बीच क्या संबंध होगा?
- उत्तर एवं तर्क: $\vec{OB} = 2\vec{OA}$ का अर्थ है कि $\vec{OB}$ और $\vec{OA}$ की दिशाएँ समान हैं और $\vec{OB}$ की लंबाई $\vec{OA}$ की लंबाई से दोगुनी है। चूंकि मूलबिंदु $O$ दोनों में उभयनिष्ठ है, इसलिए $O, A$ और $B$ एक ही सीधी रेखा में स्थित होंगे (संरेख होंगे), जहाँ $A$, रेखाखंड $OB$ का मध्य-बिंदु होगा।
प्रश्न 5: क्या समान परिमाण वाले दो स्थिति सदिश हमेशा समान होते हैं?
- उत्तर एवं तर्क: नहीं। समान परिमाण का अर्थ केवल यह है कि बिंदु मूलबिंदु से समान दूरी पर हैं। उदाहरण के लिए, $\vec{OA} = 3\hat{i} + 4\hat{j}$ और $\vec{OB} = 4\hat{i} + 3\hat{j}$ दोनों का परिमाण 5 है, परंतु वे भिन्न बिंदुओं $A(3,4)$ और $B(4,3)$ को व्यक्त करते हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग: ग्रिड और नेविगेशन
स्थिति सदिश का उपयोग केवल सैद्धांतिक गणित तक सीमित नहीं है, यह डिजिटल मानचित्रों (जैसे GPS) और रोबोटिक्स के नेविगेशन का आधार है।
मान लीजिए कि एक समतल नक़्शे में मूलबिंदु $O(0,0)$ एक नियंत्रण कक्ष (Control Room) को दर्शाता है।
- स्थान $A$ के निर्देशांक $(6, 4)$ हैं $\implies \vec{r}_A = 6\hat{i} + 4\hat{j}$ (6 किमी पूर्व, 4 किमी उत्तर)।
- स्थान $B$ के निर्देशांक $(2, 7)$ हैं $\implies \vec{r}_B = 2\hat{i} + 7\hat{j}$ (2 किमी पूर्व, 7 किमी उत्तर)।
यदि एक ड्रोन को स्थान $A$ से स्थान $B$ तक उड़ान भरनी है, तो ड्रोन के नेविगेशन सिस्टम द्वारा परिकलित विस्थापन सदिश होगा:
$$\vec{AB} = \vec{r}_B – \vec{r}_A = (2 – 6)\hat{i} + (7 – 4)\hat{j} = -4\hat{i} + 3\hat{j}$$
इसका अर्थ है ड्रोन को $A$ से 4 किमी पश्चिम (ऋणात्मक $x$) और 3 किमी उत्तर जाना होगा।
स्थिति सदिश का सूत्र मानचित्र
| अवधारणा / संक्रिया | गणितीय सूत्र | उपयोग का अवसर / कब प्रयोग करें? |
| स्थिति सदिश | $\vec{OP} = x\hat{i} + y\hat{j}$ | जब बिंदु $P(x,y)$ के निर्देशांक दिए हों और सदिश रूप चाहिए हो। |
| परिमाण (Magnitude) | $\vert{}\vec{OP}\vert{} = \sqrt{x^2 + y^2}$ | जब मूलबिंदु से बिंदु की सीधी दूरी ज्ञात करनी हो। |
| दो बिंदुओं के बीच सदिश | $\vec{AB} = \vec{OB} – \vec{OA}$ | जब दो बिंदुओं $A$ और $B$ के बीच विस्थापन सदिश चाहिए हो। |
| दो बिंदुओं के बीच दूरी | $AB = \sqrt{(x_2-x_1)^2 + (y_2-y_1)^2}$ | जब स्थिति सदिशों की सहायता से दो बिंदुओं की दूरी निकालनी हो। |
| विपरीत सदिश | $\vec{BA} = -\vec{AB}$ | जब विस्थापन की दिशा उलटनी हो। |
| इकाई सदिश (Unit Vector) | $\hat{r} = \frac{\vec{r}}{\Vert{}\vec{r}\Vert{}}$ | जब सदिश का परिमाण-रहित केवल दिशा ज्ञात करनी हो। |
| दिशा कोण (Direction Angle) | $\tan\theta = \frac{y}{x}$ | जब सदिश का $x$-अक्ष के साथ झुकाव या कोण निकालना हो। |
अभ्यास हेतु कुछ प्रश्न :
- बिंदु $P(4, 5)$ का स्थिति सदिश $\vec{OP}$ लिखिए।
- यदि स्थिति सदिश $\vec{OQ} = -3\hat{i} + 6\hat{j}$ है, तो बिंदु $Q$ के निर्देशांक बताइए।
- सदिश $\vec{r} = 5\hat{i} – 12\hat{j}$ का परिमाण $|\vec{r}|$ ज्ञात कीजिए।
- बिंदु $K(-2, -8)$ कार्तीय समतल के किस चतुर्थांश में स्थित है?
- यदि $A(1, 4)$ और $B(5, 7)$ दो बिंदु हैं, तो सदिश $\vec{AB}$ ज्ञात कीजिए।
- यदि $\vec{AB} = 3\hat{i} – 4\hat{j}$ है, तो सदिश $\vec{BA}$ का मान क्या होगा?
- बिंदु $A(3, 0)$ और $B(0, 4)$ के बीच स्थिति सदिश विधि से दूरी ज्ञात कीजिए।
- मूलबिंदु की स्थिति सदिश और उसका परिमाण क्या होते हैं?
- सदिश $\vec{a} = 3\hat{i} + 4\hat{j}$ की दिशा में इकाई सदिश $\hat{a}$ ज्ञात कीजिए।
- यदि $|\vec{OA}| = |\vec{OB}|$ है, तो क्या $\vec{OA} = \vec{OB}$ होना अनिवार्य है? कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर कुंजी एवं हल
- $\vec{OP} = 4\hat{i} + 5\hat{j}$
- $Q(-3, 6)$
- $|\vec{r}| = \sqrt{5^2 + (-12)^2} = \sqrt{25 + 144} $$= \sqrt{169} = 13 $ इकाई
- दोनों निर्देशांक ऋणात्मक हैं ($x<0, y<0$), अतः यह तृतीय चतुर्थांश (III Quadrant) में है।
- $\vec{AB} = (5-1)\hat{i} + (7-4)\hat{j} = 4\hat{i} + 3\hat{j}$
- $\vec{BA} = -\vec{AB} = -3\hat{i} + 4\hat{j}$
- $\vec{AB} = (0-3)\hat{i} + (4-0)\hat{j} = -3\hat{i} + 4\hat{j} $$\implies AB = \sqrt{(-3)^2 + 4^2} = 5 $ इकाई
- मूलबिंदु की स्थिति सदिश $\vec{0} = 0\hat{i} + 0\hat{j}$ है और इसका परिमाण $0$ है।
- $|\vec{a}| = \sqrt{3^2+4^2}=5 $$\implies \hat{a} = \frac{3}{5}\hat{i} + \frac{4}{5}\hat{j}$
- अनिवार्य नहीं है। दोनों बिंदु मूलबिंदु से समान दूरी पर होकर अलग-अलग दिशाओं में स्थित हो सकते हैं।
निष्कर्ष: स्थिति सदिश को कैसे याद रखें
स्थिति सदिश को आप एक तरह के गणितीय पते की तरह समझ सकते हैं। जैसे हमारे शहर में किसी दुकान या घर तक पहुँचने के लिए हम बताते हैं कि ‘बस स्टैंड से 2 किलोमीटर उत्तर और 1 किलोमीटर पूर्व’, वैसे ही गणित में भी किसी बिंदु की स्थिति को मूलबिंदु से दिशा और दूरी के आधार पर बताया जाता है। निर्देशांक समतल में, स्थिति सदिश हमें यह बताता है कि मूलबिंदु से किसी बिंदु तक पहुँचने के लिए किस दिशा में और कितनी दूरी तय करनी होगी। इस तरह, स्थिति सदिश से हमें हर बिंदु का सटीक स्थान आसानी से समझ में आ जाता है।
समग्र शिक्षण की वैचारिक शृंखला निम्नलिखित सोपानों पर आधारित है:
स्थान (Location) $$ \longrightarrow $$ स्थिति सदिश (Representation)$$ \longrightarrow $$ घटक (Components) $$\longrightarrow $$ परिमाण व दिशा (Magnitude \& Direction) $$ \longrightarrow $$ विस्थापन सदिश $$ (\vec{AB})$$
इस संरचनात्मक समझ से विद्यार्थी न केवल स्थिति सदिश के प्रश्नों को हल कर सकते हैं, बल्कि आगे चलकर त्रि-विमीय ज्यामिति (3D Geometry), गति की भौतिकी, और सदिश कलन (Vector Calculus) जैसे उन्नत विषयों को भी सरलता से समझ सकते हैं।
गणित के नवीनतम पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक के लिए, आप NCERT की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।”


