कक्षा 9 गणित संख्याओं की दुनिया नोट्स हिंदी में | सम्पूर्ण Master Guide, आसान Tricks व NCERT Solutions

कक्षा 9 गणित संख्याओं की दुनिया नोट्स हिंदी में | सम्पूर्ण Master Guide, आसान Tricks व NCERT Solutions

Table of Contents

अध्याय परिचय

संख्याओं का इतिहास मानव सभ्यता के विकास का प्रतिबिंब है. जब मनुष्यों ने पहली बार पशुओं के झुंडों की गणना करने, समय का आकलन करने और फसलों की बुआई का हिसाब रखने की आवश्यकता महसूस की, तब से लेकर आधुनिक सुपर कंप्यूटरों की गणितीय गणनाओं तक, संख्याओं का यह सफ़र अत्यंत रोचक रहा है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) के नए पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार की गई पुस्तक ‘गणित मंजरी’ का यह तीसरा अध्याय “संख्याओं की दुनिया” न केवल बुनियादी अंकगणित सिखाता है, बल्कि ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से गणितीय दृष्टिकोण का विकास करता है.

सीखने के मुख्य उद्देश्य (Learning Outcomes)

इस अध्याय का गहन अध्ययन करने के पश्चात शिक्षार्थी निम्नलिखित योग्यताओं को अर्जित कर सकेंगे :

  1. प्रत्येक संख्या वर्ग (प्राकृतिक, पूर्णांक, परिमेय, अपरिमेय) की पहचान और उनका सही वर्गीकरण कर सकेंगे.
  2. $0$ के महत्व, उसके ऐतिहासिक उद्भव और ब्रह्मगुप्त द्वारा प्रतिपादित अंकगणितीय नियमों को समझ सकेंगे.
  3. परिमेय संख्याओं के बीच सघनता (Density) के गुणधर्म को सिद्ध कर सकेंगे तथा दो दी गई संख्याओं के बीच अनगिनत परिमेय संख्याएँ ज्ञात कर सकेंगे.
  4. परिमेय संख्याओं के दशमलव विस्तार (शांत और अशांत आवर्ती) का विश्लेषण कर सकेंगे और उन्हें $\frac{p}{q}$ रूप में परिवर्तित कर सकेंगे.
  5. चक्रवर्ती संख्याओं (Cyclic Numbers) जैसे $142857$ के अद्भुत तार्किक और गणितीय व्यवहार को पहचान सकेंगे.
  6. विरोधाभास द्वारा उपपत्ति (Proof by Contradiction) की विधि का उपयोग करके $\sqrt{2}$, $\sqrt{3}$, और $\sqrt{5}$ की अपरिमेयता को सिद्ध कर सकेंगे.
  7. वर्गमूल सर्पिल (Square Root Spiral) का निर्माण कर सकेंगे और अपरिमेय संख्याओं को संख्या रेखा पर निरूपित कर सकेंगे.

इससे पहले एक बार रैखिक बहुपद को समझे।

1. संख्याओं का उदय और मानव सभ्यता का इतिहास

1. संख्याओं का उदय और मानव सभ्यता का इतिहास

गणित की उत्पत्ति किसी बंद कमरे या श्यामपट्ट पर समीकरण लिखने से नहीं हुई थी, बल्कि इसकी शुरुआत मिट्टी में बनी लकीरों, पेड़ों की छालों पर कटे निशानों और हड्डियों पर खुदे निशानों से हुई थी.

एक-से-एक संगति (One-to-One Correspondence)

कल्पना कीजिए कि आज से हजारों वर्ष पूर्व सरस्वती नदी के किनारे बसे एक कृषि प्रधान समाज में एक चरवाहा अपनी गायों को चराने के लिए जंगल ले जाता है. उसके पास गणना करने के लिए न तो शब्द थे और न ही संख्यात्मक प्रतीक. इस समस्या का समाधान उसने ‘एक-से-एक संगति’ (One-to-one correspondence) के सिद्धांत से निकाला :

  • सुबह जब भी एक गाय बाड़े से बाहर निकलती, चरवाहा मिट्टी के बर्तन में एक छोटा पत्थर (Pebble) डाल देता.
  • शाम को जब गायें वापस आतीं, तो प्रत्येक गाय के प्रवेश पर बर्तन से एक पत्थर निकाल लिया जाता.
  • यदि शाम को बर्तन पूरी तरह खाली हो जाता, तो इसका अर्थ था कि सभी गायें सुरक्षित लौट आई हैं. यदि बर्तन में पत्थर शेष बचते, तो इसका अर्थ था कि कोई गाय लापता है.

इसी सरल मिलान प्रक्रिया ने प्राकृतिक संख्याओं ($\mathbb{N} = \{1, 2, 3, 4, \dots\}$) के विचार को जन्म दिया.

प्राचीन हड्डियों पर इतिहास: लेबॉम्बो और इशांगो

इतिहास में संख्याओं को दर्ज करने के प्राचीनतम प्रमाण अफ्रीका से प्राप्त होते हैं :

  1. लेबॉम्बो हड्डी (Lebombo Bone): दक्षिण अफ्रीका और स्वाजीलैंड के बीच लेबॉम्बो पहाड़ियों में पाई गई यह हड्डी लगभग 35,000 वर्ष पुरानी है. इस पर 29 समान रूप से कटे हुए निशान हैं, जिसके बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि यह चंद्र चक्र (Lunar Phases) को गिनने या समय के चक्र को मापने के लिए शुरुआती मनुष्यों द्वारा किया गया प्रयास था.
  2. इशांगो हड्डी (Ishango Bone): डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में नील नदी के उद्गम स्थल के पास पाई गई यह हड्डी लगभग 20,000 ईसा पूर्व की है. इस हड्डी पर खुदे हुए निशान अत्यधिक व्यवस्थित समूहों में विभाजित हैं :
    • एक स्तंभ में $11, 13, 17,$ और $19$ के समूह हैं, जो $10$ और $20$ के बीच की सभी अभाज्य संख्याएँ (Prime Numbers) हैं.
    • दूसरे स्तंभ में संख्याओं को दोगुना (Multiplication by 2) करने की तार्किक प्रवृत्ति दिखाई देती है.

यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि गणितीय सोच हजारों वर्ष पुरानी है.

timeline
    title गणितीय इतिहास का कालक्रम और महत्वपूर्ण पड़ाव
    35000 BCE : लेबॉम्बो हड्डी (चंद्र चक्र की प्रारंभिक गणना) : 
    20000 BCE : इशांगो हड्डी (अभाज्य संख्या समूह और दोहरेकरण नियम) : 
    800 BCE   : बौधायन शुल्बसूत्र (प्रारंभिक ज्यामिति और विकर्ण माप) : 
    499 CE    : आर्यभट्ट (स्थानीय मान पद्धति और वर्गमूल निष्कर्षण) : 
    628 CE    : ब्रह्मगुप्त (शून्य की परिभाषा और ऋण-धन अंकगणित नियम) : 
    1400 CE   : माधव (केरल स्कूल - पाई की अनंत श्रेणियां) : 

2. भारतीय उपमहाद्वीप में गणित का विकास

भारतीय उपमहाद्वीप में गणित का इतिहास व्यापार, खगोल विज्ञान और धार्मिक अनुष्ठानों से गहराई से जुड़ा रहा है. सिंधु घाटी सभ्यता (जैसे लोथल और हड़प्पा) के समय से ही मानकीकृत बाट और माप व्यापार का मुख्य आधार थे.

वैदिक काल और 10 के घात

वैदिक काल के ऋषियों ने विशाल संख्याओं की संकल्पना विकसित कर ली थी. वेदों में $10$ के विभिन्न घातों को विशिष्ट नाम दिए गए थे, जैसे $10^{12}$ को ‘परार्ध’ (parārdha) कहा जाता था. बौद्ध ग्रंथ ‘ललितविस्तर’ (Lalitavistara – चौथी शताब्दी ईसा पूर्व) में महात्मा बुद्ध द्वारा $10^{53}$ तक की संख्याओं के नाम बताए गए हैं, जिसे ‘तल्लक्षण’ (tallakshaņa) कहा जाता है. ऋग्वेद में भी $10$ के घातों का स्पष्ट उपयोग मिलता है, जिसने भारत में दशमलव स्थानीय मान पद्धति (Decimal Place-Value System) के विकास की आधारशिला रखी.

3. प्राकृतिक संख्याएँ और संवरण नियम (Natural Numbers)

3. प्राकृतिक संख्याएँ और संवरण नियम (Natural Numbers)

गिनती की प्रक्रिया में उपयोग की जाने वाली सभी संख्याएँ प्राकृतिक संख्याएँ कहलाती हैं. इन्हें अंग्रेजी के बड़े अक्षर $\mathbb{N}$ से दर्शाया जाता है :

$$\mathbb{N} = \{1, 2, 3, 4, 5, \dots\}$$

संवरण नियम (Closure Property) का विश्लेषण

एक संक्रिया (Operation) के तहत कोई समुच्चय ‘संवृत’ (Closed) तब कहलाता है जब उस संक्रिया को समुच्चय के किन्हीं दो अवयवों पर लागू करने पर प्राप्त होने वाला परिणाम भी उसी समुच्चय का अवयव हो.

  • योग के अंतर्गत संवरण (Closed under Addition): यदि $a \in \mathbb{N}$ और $b \in \mathbb{N}$, तो $a + b \in \mathbb{N}$.
    • उदाहरण: $8 + 12 = 20$. यहाँ $8, 12$ और $20$ तीनों प्राकृतिक संख्याएँ हैं.
  • घटाव के अंतर्गत संवरण (Not Closed under Subtraction): यदि $a, b \in \mathbb{N}$, तो यह आवश्यक नहीं है कि $a – b \in \mathbb{N}$.
    • उदाहरण 1: $15 – 5 = 10$ (प्राकृतिक संख्या है).
    • उदाहरण 2: $5 – 15 = -10$ (प्राकृतिक संख्या नहीं है, बल्कि यह एक ऋणात्मक पूर्णांक है).

अतः प्राकृतिक संख्याएँ घटाव के अंतर्गत संवृत नहीं होती हैं.

प्राकृतिक संख्याओं के हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 3.1

क्या किन्हीं दो विषम प्राकृतिक संख्याओं का योग हमेशा एक सम संख्या होता है? तार्किक रूप से सिद्ध कीजिए।

  • हल: मान लीजिए दो विषम प्राकृतिक संख्याएँ $a = 2m + 1$ और $b = 2n + 1$ हैं (जहाँ $m, n$ पूर्ण संख्याएँ हैं)।$$a + b = (2m + 1) + (2n + 1) $$$$= 2m + 2n + 2 $$$$= 2(m + n + 1)$$चूंकि $2(m+n+1)$ का एक गुणनखंड $2$ है, अतः प्राप्त परिणाम हमेशा एक सम संख्या होगा।

उदाहरण 3.2

क्या दो क्रमिक प्राकृतिक संख्याओं का गुणनफल हमेशा सम होता है?

  • हल: दो क्रमिक प्राकृतिक संख्याएँ $n$ और $n+1$ होती हैं। यदि $n$ विषम है, तो $n+1$ सम होगा; और यदि $n$ सम है, तो $n+1$ विषम होगा। दोनों ही स्थितियों में, एक संख्या सम अवश्य होगी। चूंकि सम संख्या का गुणनफल हमेशा सम परिणाम देता है, अतः $n(n+1)$ हमेशा सम होगा।

उदाहरण 3.3

प्रथम $5$ अभाज्य प्राकृतिक संख्याओं का योग ज्ञात कीजिए।

  • हल: प्रथम $5$ अभाज्य प्राकृतिक संख्याएँ क्रमशः $2, 3, 5, 7,$ और $11$ हैं.$$\text{योग} = 2 + 3 + 5 + 7 + 11 = 28$$

उदाहरण 3.4

यदि $a$ और $b$ दो प्राकृतिक संख्याएँ हैं, तो क्या $a^b$ भी हमेशा एक प्राकृतिक संख्या होगी?

  • हल: हाँ, चूंकि प्राकृतिक संख्या की घात के रूप में कोई अन्य प्राकृतिक संख्या लेने पर वह उस संख्या के बार-बार गुणन को दर्शाती है (जैसे $3^2 = 3 \times 3 = 9$), अतः परिणाम हमेशा प्राकृतिक संख्या ही रहेगा।

उदाहरण 3.5

क्या प्राकृतिक संख्याएँ गुणन के अंतर्गत संवृत होती हैं?

  • हल: हाँ, यदि $a \in \mathbb{N}$ और $b \in \mathbb{N}$, तो $a \times b \in \mathbb{N}$ हमेशा सत्य होता है। उदाहरण के लिए, $4 \times 5 = 20$, जो कि एक प्राकृतिक संख्या है।

4. शून्य की क्रांति: जब शून्यता संख्या बनी

हजारों वर्षों तक गणितीय दुनिया $1$ से शुरू होती थी. यदि किसी व्यक्ति के पास $5$ गायें थीं और उसने पाँचों गायें दान कर दीं, तो उसकी स्थिति दर्शाने के लिए कोई संख्यात्मक प्रतीक नहीं था, केवल ‘रिक्तता’ का आभास था. बेबीलोन और माया सभ्यताओं ने रिक्त स्थानों को दर्शाने के लिए केवल स्थानधारकों (Placeholders) का उपयोग किया, लेकिन उन्होंने शून्य को एक स्वतंत्र संख्या के रूप में स्वीकार नहीं किया.

शून्यता से गणित तक का सफ़र

भारतीय दार्शनिक परंपराओं में उपनिषदों और बौद्ध दर्शन के समय से ही ‘शून्यता’ (Emptiness) को मानसिक और आध्यात्मिक शांति की एक गहन अवस्था के रूप में पूजनीय माना गया है. पतंजलि के योगसूत्र में मन की वृत्तियों को शांत करके प्राप्त होने वाली परम स्थिरता का वर्णन मिलता है. इस समृद्ध वैचारिक पृष्ठभूमि के कारण, भारतीय विचारकों को ‘कुछ भी नहीं’ को एक संख्या के रूप में स्वीकार करने में तार्किक कठिनाई नहीं हुई. यह दार्शनिक विचार आगे चलकर आर्यभट्ट और अंततः ब्रह्मगुप्त के गणितीय कार्यों में रूपांतरित हुआ.

बख्शाली पांडुलिपि और ब्रह्मगुप्त के नियम

बख्शाली पांडुलिपि (Bakhshali Manuscript), जो लगभग तीसरी-चौथी शताब्दी ईस्वी की मानी जाती है, में पहली बार ‘शून्य’ को दर्शाने के लिए एक बड़े बिंदु (शून्य-बिंदु) का प्रयोग देखा गया.

वर्ष 628 ईस्वी में उज्जैन के महान गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त ने अपने ऐतिहासिक ग्रंथ ब्राह्मस्फुटसिद्धांत (Brāhmasphuțasiddhānta) में शून्य को परिभाषित करते हुए लिखा कि किसी संख्या को स्वयं में से घटाने पर जो प्राप्त होता है, वह शून्य है :

$$a – a = 0$$

ब्रह्मगुप्त ने शून्य के संचालन के लिए जो मूलभूत नियम दिए, वे आज भी अपरिवर्तित हैं :

गणितीय संक्रियाब्रह्मगुप्त का नियमआधुनिक स्वरूप
योग नियमकिसी संख्या में शून्य जोड़ने पर वह संख्या अपरिवर्तित रहती है.$a + 0 = a$
घटाव नियमकिसी संख्या में से शून्य घटाने पर वह संख्या अपरिवर्तित रहती है.$a – 0 = a$
गुणन नियमकिसी भी संख्या को शून्य से गुणा करने पर परिणाम शून्य प्राप्त होता है.$a \times 0 = 0$
शून्य से घटावशून्य में से किसी धन संख्या को घटाने पर ऋण संख्या प्राप्त होती है.$0 – a = -a$

शून्य के व्यावहारिक अनुप्रयोग और उदाहरण

उदाहरण 4.1

ब्रह्मगुप्त के नियमों के अनुसार निम्नलिखित को सरल कीजिए: $25 \times 0 + (12 – 0) – 0$

  • हल:
    1. $25 \times 0 = 0$ (गुणन नियम के अनुसार).
    2. $12 – 0 = 12$ (घटाव नियम के अनुसार).
    3. अब, $0 + 12 – 0 = 12$.
  • उत्तर: $12$

उदाहरण 4.2

यदि किसी संख्या $k$ को $0$ से गुणा किया जाए और फिर उसमें $5$ जोड़ा जाए, तो बीजीय व्यंजक क्या होगा? उसका सरलतम मान क्या होगा?

  • हल: व्यंजक $= k \times 0 + 5$. चूंकि $k \times 0 = 0$, अतः सरलतम मान $= 0 + 5 = 5$ होगा.

उदाहरण 4.3

क्या शून्य एक पूर्ण संख्या है? क्या यह एक पूर्णांक भी है?

  • हल: हाँ, पूर्ण संख्याओं का समुच्चय $\mathbb{W} = \{0, 1, 2, 3, \dots\}$ होता है, जिसमें शून्य शामिल है. चूंकि पूर्णांकों $\mathbb{Z}$ में ऋणात्मक, धनात्मक और शून्य सभी शामिल हैं, अतः शून्य एक पूर्णांक भी है.

उदाहरण 4.4

ब्रह्मगुप्त के अनुसार $0 – (-8)$ का मान क्या होगा?

  • हल: शून्य में से किसी ऋणात्मक संख्या (ऋण) को घटाने पर वह धनात्मक संख्या (धन) बन जाती है.$$0 – (-8) = 0 + 8 = 8 \quad [20]$$

5. पूर्णांक: धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं का विस्तार

5. पूर्णांक: धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं का विस्तार

व्यापार और विनिमय के व्यावहारिक लेन-देन में ब्रह्मगुप्त ने अनुभव किया कि केवल धनात्मक संख्याएँ और शून्य वित्तीय लेनदेन के सभी पहलुओं को व्यक्त नहीं कर सकते. इसके लिए उन्होंने दो व्यावहारिक अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं :

  1. धन (Dhana – Fortune): जो स्वामित्व या संपत्ति को दर्शाता है (धनात्मक संख्याएँ).
  2. ऋण (Rina – Debt): जो कर्ज या देयता को दर्शाता है (ऋणात्मक संख्याएँ).

इन धनात्मक प्राकृतिक संख्याओं, उनके ऋणात्मक रूपों और शून्य के समूह को पूर्णांक (Integers) कहा जाता है. इसे $\mathbb{Z}$ प्रतीक से निरूपित किया जाता है (जो जर्मन शब्द ‘Zahlen’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है संख्याएँ) :

$$\mathbb{Z} = \{\dots, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, \dots\}$$

ब्रह्मगुप्त के ऋण-धन अंकगणितीय नियम

ब्रह्मगुप्त ने इन हस्ताक्षरित (Signed) संख्याओं के गुणन और योग के लिए बेहद तार्किक नियम प्रतिपादित किए :

  • धन और धन का योग: “दो धनों का योग धन होता है।”$$\text{Dhana} + \text{Dhana} = \text{Dhana} $$$$\implies 5 + 4 = 9 \quad [2]$$
  • ऋण और ऋण का योग: “दो ऋणों का योग एक ऋण होता है।” (यदि आप ₹5 के कर्जदार हैं और ₹4 का अतिरिक्त कर्ज लेते हैं, तो आपका कुल कर्ज ₹9 हो जाता है).$$\text{Rina} + \text{Rina} = \text{Rina} $$$$\implies (-5) + (-4) = -9 \quad [2]$$
  • ऋण और धन का गुणन: “ऋण और धन का गुणनफल ऋण होता है।” (यदि आप ₹3 के कर्ज के 4 चक्र लेते हैं, तो आपका कुल कर्ज ₹12 होगा).$$\text{Rina} \times \text{Dhana} = \text{Rina} $$$$\implies (-3) \times 4 = -12 \quad [2]$$
  • दो ऋणों का गुणन: “दो ऋणों का गुणनफल धन बन जाता है।”.$$\text{Rina} \times \text{Rina} = \text{Dhana} $$$$\implies (-3) \times (-4) = 12 \quad [2]$$

वैचारिक स्पष्टीकरण: ऋण $\times$ ऋण = धन क्यों होता है?

यदि ऋणात्मक संख्या ऋण (कर्ज) को दर्शाती है, तो ऋणात्मक संख्या से गुणा करना उस कर्ज को ‘हटाने’ या ‘निरस्त करने’ की क्रिया को दर्शाता है. उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति आपके ऊपर से ₹3 के ऋण वाले 4 ऋण-पत्रों को पूरी तरह से हटा देता है (यानी $-4$ गुना ऋणात्मक क्रिया), तो आप वास्तव में ₹12 अमीर हो जाते हैं. गणितीय रूप से: $(-3) \times (-4) = +12$.

पूर्णांकों के हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 5.1

एक पनडुब्बी समुद्र तल से $150$ मीटर नीचे तैर रही है। यदि वह $80$ मीटर और नीचे जाती है, तो उसकी वर्तमान स्थिति को पूर्णांकों द्वारा दर्शाइए।

  • हल: समुद्र तल को $0$ मानते हैं। नीचे जाने को ऋणात्मक पूर्णांक द्वारा दर्शाया जाता है. प्रारंभिक स्थिति = -150मीटर अतिरिक्त गिरावट = -80 मीटर अंतिम स्थिति = -150 + (-80) = -230 मीटर
  • उत्तर: पनडुब्बी समुद्र तल से $230$ मीटर नीचे (अर्थात् $-230$ मीटर) स्थित है।

उदाहरण 5.2

मान ज्ञात कीजिए: $(-15) \times 4 + (-8) \times (-3)$

  • हल:
    1. $(-15) \times 4 = -60$ (ऋण $\times$ धन = ऋण).
    2. $(-8) \times (-3) = 24$ (ऋण $\times$ ऋण = धन).
    3. अब, $-60 + 24 = -36$.
  • उत्तर: $-36$

उदाहरण 5.3

यदि किसी स्थान का तापमान सुबह $-5^{\circ}\text{C}$ था और दोपहर तक वह $12^{\circ}\text{C}$ बढ़ गया, तो दोपहर का तापमान क्या था?

  • हल:$$\text{प्रारंभिक तापमान} = -5^{\circ}\text{C}$$$$\text{तापमान में वृद्धि} = +12^{\circ}\text{C}$$$$\text{दोपहर का तापमान} = -5 + 12 = 7^{\circ}\text{C}$$
  • उत्तर: $7^{\circ}\text{C}$

उदाहरण 5.4

समीकरण हल कीजिए: $x – (-10) = -15$.

  • हल:$$x + 10 = -15$$$$x = -15 – 10 \implies x = -25$$
  • उत्तर: $x = -25$

6. परिमेय संख्याएँ: भिन्नों की गणितीय व्याख्या

जब किसी खेत को तीन बच्चों में बराबर बांटना हो, या किसी व्यंजन में आधा कप घी डालना हो, तो पूर्णांक कम पड़ जाते हैं. इसके लिए भिन्नों की आवश्यकता होती है.

जब हम सभी पूर्णांकों और धनात्मक एवं ऋणात्मक भिन्नों को मिला देते हैं, तो हमें परिमेय संख्याओं (Rational Numbers) का समुच्चय प्राप्त होता है, जिसे $\mathbb{Q}$ (Quotient) से दर्शाया जाता है.

परिमेय संख्या की मानक परिभाषा

कोई भी संख्या जिसे $\frac{p}{q}$ के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ $p$ और $q$ दोनों पूर्णांक हैं तथा $q \neq 0$ है, परिमेय संख्या कहलाती है.

$$\mathbb{Q} = \left\{ \frac{p}{q} \ \middle|\ p, q \in \mathbb{Z}, q \neq 0 \right\} \quad [2]$$

  • सघनता का गुणधर्म (Density Property): किन्हीं भी दो परिमेय संख्याओं $a$ और $b$ के बीच हमेशा अनंत परिमेय संख्याएँ मौजूद होती हैं. हम उनका औसत $\frac{a+b}{2}$ निकालकर उनके ठीक बीच की एक नई परिमेय संख्या ज्ञात कर सकते हैं.

परिमेय संख्याओं के हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 6.1

सिद्ध कीजिए कि $1.5$ और $1.6$ के बीच की संख्या $\frac{1.5 + 1.6}{2}$ एक परिमेय संख्या है।

  • हल:$$\text{औसत} = \frac{3.1}{2} = 1.55$$ $1.55$ को भिन्न के रूप में लिखने पर: $\frac{155}{100} = \frac{31}{20}$. चूंकि $31$ और $20$ दोनों पूर्णांक हैं और हर $20 \neq 0$ है, अतः यह एक परिमेय संख्या है.

उदाहरण 6.2

$\frac{3}{5}$ और $\frac{4}{5}$ के बीच तीन परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

  • हल: हमें तीन संख्याएँ चाहिए, अतः हम अंश और हर को $3+1 = 4$ से गुणा करते हैं:$$\frac{3}{5} = \frac{12}{20} \quad \text{तथा} \quad \frac{4}{5} = \frac{16}{20}$$इनके बीच की तीन परिमेय संख्याएँ होंगी: $\frac{13}{20}, \frac{14}{20}, \frac{15}{20}$.

उदाहरण 6.3

सरल कीजिए: $\left(\frac{2}{3} \times \frac{5}{4}\right) + \left(-\frac{1}{6}\right)$

  • हल:
    1. गुणनफल: $\frac{2}{3} \times \frac{5}{4} = \frac{10}{12} = \frac{5}{6}$
    2. योग: $\frac{5}{6} + \left(-\frac{1}{6}\right) = \frac{5-1}{6} = \frac{4}{6} = \frac{2}{3}$
  • उत्तर: $\frac{2}{3}$

उदाहरण 6.4

क्या प्रत्येक पूर्णांक एक परिमेय संख्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

  • हल: हाँ, प्रत्येक पूर्णांक $n$ को $\frac{n}{1}$ के रूप में लिखा जा सकता है. उदाहरण के लिए, $-5 = \frac{-5}{1}$ और $0 = \frac{0}{1}$, जहाँ अंश और हर दोनों पूर्णांक हैं और हर शून्य नहीं है.

7. दशमलव विस्तार: शांत बनाम अशांत आवर्ती

7. दशमलव विस्तार: शांत बनाम अशांत आवर्ती

परिमेय संख्याओं के दशमलव विस्तार की सहायता से हम उनकी प्रकृति को आसानी से समझ सकते हैं.

शांत और अशांत आवर्ती दशमलव

दशमलव प्रकारमुख्य विशेषताउदाहरण
शांत (Terminating)भागफल के कुछ स्थानों बाद शेषफल शून्य हो जाता है.$\frac{5}{8} = 0.625 \quad [7]$
अशांत आवर्ती (Repeating)शेषफल कभी शून्य नहीं होता, बल्कि एक निश्चित पैटर्न दोहराया जाता है.$\frac{1}{3} = 0.\overline{3} \quad [7]$

दशमलव विस्तार के हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 7.1

$0.\overline{58}$ को $\frac{p}{q}$ रूप में बदलिए।

  • हल:मान लीजिए $x = 0.585858\dots$ (समीकरण 1)दोनों पक्षों को $100$ से गुणा करने पर (चूंकि दो अंक दोहराए जा रहे हैं):$$100x = 58.585858\dots \quad \text{(समीकरण 2)}$$समीकरण 2 में से समीकरण 1 घटाने पर:$$99x = 58 \implies x = \frac{58}{99}$$
  • उत्तर: $\frac{58}{99}$

उदाहरण 7.2

$0.2\overline{7}$ को $\frac{p}{q}$ रूप में बदलिए।

  • हल:मान लीजिए $x = 0.27777\dots$ (समीकरण 1)पहले दोनों पक्षों को $10$ से गुणा करके गैर-आवर्ती भाग को दशमलव से पहले लाते हैं:$$10x = 2.7777\dots \quad \text{(समीकरण 2)}$$अब फिर से $10$ से गुणा करते हैं (चूंकि एक अंक आवर्ती है):$$100x = 27.7777\dots \quad \text{(समीकरण 3)}$$समीकरण 3 में से समीकरण 2 घटाने पर:$$90x = 25 \implies x = \frac{25}{90} = \frac{5}{18}$$
  • उत्तर: $\frac{5}{18}$

उदाहरण 7.3

बिना भाग दिए बताइए कि क्या $\frac{7}{80}$ का दशमलव प्रसार शांत होगा।

  • हल: हर $= 80 = 2^4 \times 5^1$. चूंकि अभाज्य गुणनखंडों में केवल $2$ और $5$ शामिल हैं, अतः इसका दशमलव विस्तार निश्चित रूप से शांत होगा.

8. चक्रवर्ती संख्याएँ (Cyclic Numbers) का रहस्य

गणित में कुछ परिमेय संख्याएँ अपनी आंतरिक संरचना में विस्मयकारी समरूपता प्रदर्शित करती हैं. इसका सबसे सुंदर उदाहरण $\frac{1}{7}$ का दशमलव विस्तार है :

$$\frac{1}{7} = 0.\overline{142857} \quad [2]$$

यहाँ आवर्ती खंड $142857$ एक चक्रवर्ती संख्या (Cyclic Number) है.

चक्रवर्ती गुणा तालिका

जब हम इस संख्या को $1$ से $6$ तक के अंकों से गुणा करते हैं, तो प्राप्त होने वाले परिणाम में अंकों का क्रम नहीं बदलता, बल्कि वे एक चक्र में घूम जाते हैं :

गुणन संक्रियाप्राप्त परिणामचक्रवर्ती व्यवहार विश्लेषण
$142857 \times 1$$142857$मूल संख्या का क्रम.
$142857 \times 2$$285714$$2$ से चक्र प्रारंभ होकर अंत में $1$ पर समाप्त होता है.
$142857 \times 3$$428571$$4$ से चक्र प्रारंभ होकर अंत में $1$ पर समाप्त होता है.
$142857 \times 4$$571428$$5$ से चक्र प्रारंभ होकर अंत में $8$ पर समाप्त होता है.
$142857 \times 5$$714285$$7$ से चक्र प्रारंभ होकर अंत में $5$ पर समाप्त होता है.
$142857 \times 6$$857142$$8$ से चक्र प्रारंभ होकर अंत में $2$ पर समाप्त होता है.

जब हम इसे $7$ से गुणा करते हैं, तो हमें पूर्ण शुद्धता के साथ $999999$ प्राप्त होता है, जो मिड्य के सिद्धांत (Midy’s Theorem) की पुष्टि करता है :

$$142857 \times 7 = 999999 \quad [9, 22]$$

ऐसी संख्याएँ केवल पूर्ण आवर्ती अभाज्य संख्याओं (Full Reptend Primes) के व्युत्क्रमों से प्राप्त होती हैं, जहाँ आवर्त की लंबाई ठीक $p-1$ होती है (जैसे $7, 17, 19, 23$ आदि).

चक्रवर्ती संख्याओं के हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 8.1

यदि $142857 \times 3 = 428571$ है, तो बिना गुणा किए बताइए कि $\frac{3}{7}$ का दशमलव विस्तार क्या होगा?

  • हल: चूंकि $\frac{1}{7} = 0.\overline{142857}$ है, अतः $\frac{3}{7} = 3 \times \frac{1}{7}$ होगा. चक्रीय गुणन के गुणधर्म से: $3 \times 142857 = 428571$. अतः, $\frac{3}{7} = 0.\overline{428571}$ होगा.

उदाहरण 8.2

सिद्ध कीजिए कि $142857$ के अंकों का योग $9$ से विभाज्य है।

  • हल: अंकों का योग $$ = 1 + 4 + 2 + 8 + 5 + 7 = 27$$चूंकि $27$, $9$ से पूर्णतः विभाज्य है ($27 \div 9 = 3$), अतः सिद्ध होता है कि चक्रवर्ती संख्या $142857$ के अंकों का योग $9$ से विभाज्य है।

9. अपरिमेय संख्याएँ और अपरिमेयता के अकाट्य प्रमाण

वे संख्याएँ जिन्हें दो पूर्णांकों के अनुपात $\frac{p}{q}$ के रूप में नहीं लिखा जा सकता, अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers) कहलाती हैं.

$\sqrt{3}$ की अपरिमेयता का विरोधाभास द्वारा प्रमाण

  • उद्देश्य: सिद्ध करना है कि $\sqrt{3}$ एक अपरिमेय संख्या है.
  • उपपत्ति: चरण 1: मान लेते हैं कि $\sqrt{3}$ एक परिमेय संख्या है. अतः इसे न्यूनतम रूप में $\frac{p}{q}$ के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ $p$ और $q$ सह-अभाज्य (Co-prime) पूर्णांक हैं तथा $q \neq 0$ है.$$\sqrt{3} = \frac{p}{q} \quad [2]$$
  • चरण 2: दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:$$3 = \frac{p^2}{q^2} \implies p^2 = 3q^2 \quad [2]$$
  • चरण 3: चूंकि $p^2$, $3$ का गुणज है, इसलिए $p$ भी $3$ से विभाज्य होना चाहिए (क्योंकि किसी अभाज्य संख्या द्वारा वर्ग के विभाजित होने पर वह संख्या भी विभाजित होती है). अतः हम मान सकते हैं कि: $$p = 3k \quad $$ जहाँ k एक पूर्णांक है [2]
  • चरण 4: $p$ का यह मान समीकरण $p^2 = 3q^2$ में प्रतिस्थापित करने पर:$$(3k)^2 = 3q^2 $$$$\implies 9k^2 = 3q^2 $$$$\implies q^2 = 3k^2 \quad [2]$$
  • चरण 5: समीकरण $q^2 = 3k^2$ यह दर्शाता है कि $q^2$ भी $3$ से विभाज्य है, अतः $q$ भी $3$ से विभाज्य होगा.
  • चरण 6 (विरोधाभास): इस प्रकार $p$ और $q$ दोनों का एक उभयनिष्ठ गुणनखंड $3$ है. लेकिन यह हमारी प्रारंभिक कल्पना का सीधा खंडन करता है कि $p$ and $q$ सह-अभाज्य थे.अतः सिद्ध होता है कि $\sqrt{3}$ एक अपरिमेय संख्या है.

अपरिमेय संख्याओं के हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 9.1

जाँच कीजिए कि क्या $2\sqrt{2}$ एक अपरिमेय संख्या है, यदि दिया गया है कि $\sqrt{2}$ अपरिमेय है।

  • हल: मान लीजिए $2\sqrt{2}$ एक परिमेय संख्या $r$ है.$$2\sqrt{2} = r \implies \sqrt{2} = \frac{r}{2}$$ चूंकि $r$ परिमेय है, अतः $\frac{r}{2}$ भी एक परिमेय संख्या होगी. लेकिन यह इस तथ्य का खंडन करता है कि $\sqrt{2}$ एक अपरिमेय संख्या है. अतः हमारी धारणा गलत थी और $2\sqrt{2}$ अपरिमेय है.

उदाहरण 9.2

दो अपरिमेय संख्याओं $a = 3 + \sqrt{2}$ और $b = 3 – \sqrt{2}$ का योगफल और गुणनफल ज्ञात कीजिए। क्या प्राप्त परिणाम परिमेय हैं?

  • हल:
    1. योगफल:$$a + b = (3 + \sqrt{2}) + (3 – \sqrt{2}) = 6$$ यहाँ $6$ एक परिमेय संख्या है.
    2. गुणनफल:$$a \times b = (3 + \sqrt{2})(3 – \sqrt{2}) $$$$= 3^2 – (\sqrt{2})^2 = 9 – 2 = 7$$ यहाँ $7$ भी एक परिमेय संख्या है.

10. वास्तविक संख्याएँ और संख्या रेखा की निरंतरता

परिमेय और अपरिमेय संख्याओं के संपूर्ण समुच्चय को सम्मिलित रूप से वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) कहा जाता है. इन्हें संख्या रेखा पर अद्वितीय रूप से दर्शाया जा सकता है.

वास्तविक संख्याओं के गुणधर्म और उदाहरण

उदाहरण 10.1

संख्या रेखा पर दो वास्तविक संख्याओं $-3$ और $4$ के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।

  • हल: दो वास्तविक संख्याओं $a$ और $b$ के बीच की दूरी $|a – b|$ द्वारा दी जाती है. दूरी = |-3 – 4| = |-7| = 7 इकाई [2, 7]

उदाहरण 10.2

वर्गीकृत कीजिए कि निम्नलिखित में से कौन सी संख्या वास्तविक रेखा पर $1$ और $2$ के बीच स्थित है:

(i) $\frac{3}{2}$

(ii) $\sqrt{3}$

(iii) $\pi$

  • हल:
    • (i) $\frac{3}{2} = 1.5$ (यह $1$ और $2$ के बीच स्थित है).
    • (ii) $\sqrt{3} \approx 1.732$ (यह भी $1$ और $2$ के बीच स्थित है).
    • (iii) $\pi \approx 3.1415$ (यह $3$ से बड़ी है, अतः $1$ और $2$ के बीच नहीं है).

11. एक दिलचस्प विरोधाभास: $0.999\dots = 1$ का प्रमाण

गणितीय रूप से $0.\overline{9}$ और $1$ पूरी तरह समान हैं.

विभिन्न रूपों के हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 11.1

सिद्ध कीजिए कि $0.4999\dots$ (या $0.4\overline{9}$) वास्तव में $0.5$ के बराबर है।

  • हल:मान लीजिए $x = 0.49999\dots$ (समीकरण 1)$$10x = 4.99999\dots \quad \text{(समीकरण 2)}$$$$100x = 49.99999\dots \quad \text{(समीकरण 3)}$$समीकरण 3 में से समीकरण 2 घटाने पर:$$90x = 45 \implies x = \frac{45}{90} = 0.5$$
  • अतः सिद्ध होता है कि $0.4\overline{9} = 0.5$ है।

उदाहरण 11.2

एक तर्क दीजिए कि $2.47000\dots$ और $2.46999\dots$ समान क्यों हैं.

  • हल:यदि हम $2.46\overline{9}$ को परिमेय रूप में बदलें: मान लीजिए $$ x = 2.46999\dots$$$$100x = 246.999\dots \quad $$ तथा $$ \quad 1000x = 2469.999\dots$$$$900x = 2223 \implies x = \frac{2223}{900} = 2.47$$ अतः दोनों संख्याएँ समान हैं.

12. गणित मंजरी पाठ्यपुस्तक के हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 12.1

  • प्रश्न: संख्या रेखा पर दो परिमेय संख्याओं $\frac{1}{2}$ और $\frac{3}{4}$ के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए.
  • दृष्टिकोण: दो परिमेय संख्याओं $a$ और $b$ के बीच की दूरी $|a – b|$ होती है.
  • हल: दूरी $$ = \left|\frac{1}{2} – \frac{3}{4}\right| = \left|\frac{2-3}{4}\right| = \left|-\frac{1}{4}\right| $$$$= \frac{1}{4} \quad [2, 7]$$

उदाहरण 12.2

  • प्रश्न: बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करके $\sqrt{2}$ इकाई की लंबाई वाले विकर्ण की रचना की विधि स्पष्ट कीजिए.
  • दृष्टिकोण: $1$ इकाई भुजा वाले वर्ग के विकर्ण की लंबाई $\sqrt{1^2 + 1^2} = \sqrt{2}$ होती है.
  • हल: $OA = 1$ इकाई संख्या रेखा पर मापते हैं. $A$ पर $1$ इकाई लंबा लंब $AB$ खींचते हैं. समकोण त्रिभुज $OAB$ में पाइथागोरस प्रमेय लगाने पर कर्ण $OB = \sqrt{1^2 + 1^2} = \sqrt{2}$ प्राप्त होता है.

13. सम्पूर्ण प्रश्नावली समाधान (Exercise Sets 3.1 to 3.5)

EXERCISE SET 3.1

प्रश्न 1

लोथल बंदरगाह शहर का एक व्यापारी तांबे के सिल्लियों के बदले मसालों के बैग का आदान-प्रदान कर रहा है. उसे प्रत्येक $2$ बैग मसालों के लिए $15$ तांबे के सिक्के मिलते हैं. यदि वह बाजार में $12$ बैग मसाले लाता है, तो वह कितने तांबे के सिक्के लेकर वापस लौटेगा?

  • अवधारणा: समानुपातिक विनिमय दर का नियम.
  • दिया है: $2$ बैग मसाले $= 15$ तांबे के सिक्के. मसाले के बैगों की कुल संख्या $= 12$.
  • ज्ञात करना है: मिलने वाले तांबे के सिक्कों की कुल संख्या.
  • हल:
    1. $1$ बैग मसाले के लिए मिलने वाले सिक्के $= \frac{15}{2}$ सिक्के.
    2. $12$ बैग मसाले के लिए मिलने वाले सिक्के $= \left(\frac{15}{2}\right) \times 12$.
    3. गणना करने पर: $15 \times 6 = 90$ सिक्के.
  • अंतिम उत्तर: व्यापारी $90$ तांबे के सिक्के लेकर वापस लौटेगा.
  • सामान्य त्रुटि: छात्र कभी-कभी सीधे $15 \times 12$ कर देते हैं, जिससे उत्तर गलत हो जाता है. अनुपात को समझना आवश्यक है.
  • परीक्षा टिप: जब भी ऐसी समस्या आए, सबसे पहले एकल मान (Unitary Value) निकालें.

प्रश्न 2

इशांगो हड्डी के एक स्तंभ पर अंकित संख्याओं के अनुक्रम को देखें: $11, 13, 17, 19$. इन संख्याओं में क्या समानता है? इस स्वरूप में आने वाली अगली तीन संख्याएँ लिखिए.

  • अवधारणा: अभाज्य संख्याओं (Prime Numbers) की परिभाषा.
  • दिया है: अनुक्रम $= 11, 13, 17, 19$.
  • ज्ञात करना है: उभयनिष्ठ गुणधर्म और अगले तीन पद.
  • हल:
    1. दिए गए अनुक्रम की जाँच करने पर: $11, 13, 17, 19$ सभी अभाज्य संख्याएँ हैं, जिनके केवल दो गुणनखंड (स्वयं और $1$) हैं.
    2. $19$ के बाद आने वाली अगली क्रमिक अभाज्य संख्याएँ क्रमशः $23, 29$ और $31$ हैं.
  • अंतिम उत्तर: ये सभी संख्याएँ अभाज्य संख्याएँ हैं. इस अनुक्रम की अगली तीन संख्याएँ क्रमशः $23, 29, 31$ हैं.
  • सामान्य त्रुटि: विद्यार्थी अक्सर $21$ या $27$ को अभाज्य समझ बैठते हैं, जबकि वे भाज्य संख्याएँ हैं.

प्रश्न 3

हम जानते हैं कि प्राकृतिक संख्याएँ योग के अंतर्गत संवृत (Closed) होती हैं (किन्हीं दो प्राकृतिक संख्याओं का योग हमेशा एक प्राकृतिक संख्या होती है). क्या वे घटाव (Subtraction) के अंतर्गत भी संवृत हैं? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए कुछ उदाहरण दीजिए.

  • अवधारणा: संवरण गुणधर्म की परिभाषा.
  • दिया है: प्राकृतिक संख्याओं का समुच्चय $\mathbb{N} = \{1, 2, 3, \dots\}$.
  • ज्ञात करना है: घटाव के अंतर्गत संवरण गुण की जाँच.
  • हल:
    1. उदाहरण 1: मान लीजिए $a = 9$ और $b = 4$.$$a – b = 9 – 4 = 5 \quad $$ (प्राकृतिक संख्या है) [15]
    2. उदाहरण 2: मान लीजिए $a = 3$ और $b = 7$.$$a – b = 3 – 7 = -4 \quad $$ (प्राकृतिक संख्या नहीं है) [15]
  • अंतिम उत्तर: नहीं, प्राकृतिक संख्याएँ घटाव के अंतर्गत संवृत नहीं होती हैं.

प्रश्न 4

प्राचीन भारतीय अपनी उंगलियों के जोड़ों (Joints) का उपयोग गिनती के लिए करते थे, जो आज भी देखा जाता है. प्रत्येक उंगली में $3$ जोड़ होते हैं और अंगूठे का उपयोग उन्हें गिनने के लिए किया जाता है. आप एक हाथ पर कितना गिन सकते हैं? यह प्राचीन आधार-12 (Base-12) गणना प्रणालियों से कैसे संबंधित है?

  • अवधारणा: ऐतिहासिक अंक प्रणालियों का वैचारिक ढांचा.
  • दिया है: $4$ उँगलियाँ (अंगूठे को छोड़कर), प्रत्येक में $3$ जोड़.
  • ज्ञात करना है: एक हाथ पर कुल गिनती और आधार-12 प्रणाली से संबंध.
  • हल:
    1. एक हाथ में उंगलियों की संख्या (अंगूठे को छोड़कर) $= 4$.
    2. प्रत्येक उंगली में जोड़ों की संख्या $= 3$.
    3. कुल गिनने योग्य जोड़ $= 4 \times 3 = 12$ जोड़.
  • अंतिम उत्तर: हम एक हाथ से $12$ तक गिन सकते हैं. यह प्रक्रिया सीधे प्राचीन आधार-12 (Duodecimal) गणना प्रणाली से संबंधित है, जहाँ $12$ को गणना का मुख्य आधार माना जाता था.

EXERCISE SET 3.2

प्रश्न 1

लद्दाख के मरुस्थल में दोपहर का तापमान $4^{\circ}\text{C}$ दर्ज किया जाता है. आधी रात तक तापमान $15^{\circ}\text{C}$ गिर जाता है. आधी रात का तापमान क्या है?

  • अवधारणा: ऋणात्मक पूर्णांकों का व्यवकलन.
  • दिया है: दोपहर का प्रारंभिक तापमान $= 4^{\circ}\text{C}$. तापमान में गिरावट $= 15^{\circ}\text{C}$.
  • ज्ञात करना है: आधी रात का अंतिम तापमान.
  • हल:
    1. तापमान गिरने को ऋणात्मक पूर्णांक द्वारा दर्शाया जाता है.
    2. आधी रात का तापमान $= 4^{\circ}\text{C} – 15^{\circ}\text{C} = -11^{\circ}\text{C}$.
  • अंतिम उत्तर: आधी रात का तापमान $-11^{\circ}\text{C}$ होगा.

प्रश्न 2

एक मसाला व्यापारी ₹850 का ऋण (ऋण) लेता है. अगले दिन वह ₹1,200 का लाभ (धन) कमाता है. अगले सप्ताह उसे ₹450 की हानि होती है. इस क्रम को पूर्णांकों का उपयोग करके एक समीकरण के रूप में लिखिए और उसकी अंतिम वित्तीय स्थिति की गणना कीजिए.

  • अवधारणा: ऋण-धन पूर्णांक नियमों का अनुप्रयोग.
  • दिया है: ऋण = -₹850. लाभ = +₹1200. हानि = -₹450.
  • ज्ञात करना है: वित्तीय समीकरण और अंतिम वित्तीय स्थिति.
  • हल:
    1. पूर्णांकों के रूप में समीकरण स्थापित करने पर: वित्तीय स्थिति = -850 + 1200 – 450 [15]
    2. गणना: $-1300 + 1200 = -100$.
  • अंतिम उत्तर: समीकरण $-850 + 1200 – 450 = -100$ है. व्यापारी की अंतिम वित्तीय स्थिति ₹100 की हानि (ऋण) को दर्शाती है.

प्रश्न 3

ब्रह्मगुप्त के नियमों का उपयोग करके निम्नलिखित की गणना कीजिए : (i) $(-12) \times 5$ (ii) $(-8) \times (-7)$ (iii) $0 – (-14)$ (iv) $(-20) \div 4$

  • हल (i): $(-12) \times 5 = -60$ (ऋण $\times$ धन = ऋण).
  • हल (ii): $(-8) \times (-7) = 56$ (ऋण $\times$ ऋण = धन).
  • हल (iii): $0 – (-14) = 0 + 14 = 14$ (शून्य में से ऋण घटाने पर धन).
  • हल (iv): $(-20) \div 4 = -5$ (ऋण $\div$ धन = ऋण).

प्रश्न 4

ऋण के वास्तविक जीवन के उदाहरण का उपयोग करके स्पष्ट कीजिए कि किसी ऋणात्मक संख्या को घटाना, एक धनात्मक संख्या को जोड़ने के समान क्यों है (जैसे, $10 – (-5) = 15$).

  • हल: (कृपया इस स्पष्टीकरण का विस्तृत विवरण पूर्ववर्ती खंड “5. पूर्णांक: धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं का विस्तार” में देखें).

EXERCISE SET 3.3

प्रश्न 1

सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित परिमेय संख्याएँ परस्पर बराबर हैं : (i) $\frac{2}{3}$ और $\frac{4}{6}$ (ii) $\frac{5}{4}$ और $\frac{10}{8}$ (iii) $-\frac{3}{5}$ और $-\frac{6}{10}$ (iv) $\frac{9}{3}$ और $3$

  • हल (i): $\frac{2}{3}$ और $\frac{4}{6}$ $\implies 2 \times 6 = 12$ तथा $3 \times 4 = 12$. चूंकि $12 = 12$, अतः ये बराबर हैं.
  • हल (ii): $\frac{5}{4}$ और $\frac{10}{8}$ $\implies 5 \times 8 = 40$ तथा $4 \times 10 = 40$. चूंकि $40 = 40$, अतः ये बराबर हैं.
  • हल (iii): $-\frac{3}{5}$ और $-\frac{6}{10}$ $\implies (-3) \times 10 = -30$ तथा $5 \times (-6) = -30$. चूंकि $-30 = -30$, अतः ये बराबर हैं.
  • हल (iv): $\frac{9}{3}$ और $\frac{3}{1}$ $\implies 9 \times 1 = 9$ तथा $3 \times 3 = 9$. चूंकि $9 = 9$, अतः ये बराबर हैं.

प्रश्न 2

योग ज्ञात कीजिए : (i) $\frac{2}{5} + \frac{3}{10}$ (ii) $\frac{7}{12} + \frac{5}{8}$ (iii) $-\frac{4}{7} + \frac{3}{14}$

  • हल (i): $\frac{2}{5} + \frac{3}{10} = \frac{4+3}{10} = \frac{7}{10}$.
  • हल (ii): $\frac{7}{12} + \frac{5}{8} = \frac{14+15}{24} = \frac{29}{24}$.
  • हल (iii): $-\frac{4}{7} + \frac{3}{14} = \frac{-8+3}{14} = -\frac{5}{14}$.

प्रश्न 3

अंतर (घटाव) ज्ञात कीजिए : (i) $\frac{5}{6} – \frac{1}{4}$ (ii) $\frac{11}{8} – \frac{3}{4}$ (iii) $-\frac{7}{9} – \left(-\frac{2}{3}\right)$

  • हल (i): $\frac{5}{6} – \frac{1}{4} = \frac{10-3}{12} = \frac{7}{12}$.
  • हल (ii): $\frac{11}{8} – \frac{3}{4} = \frac{11-6}{8} = \frac{5}{8}$.
  • हल (iii): $-\frac{7}{9} – \left(-\frac{2}{3}\right) = -\frac{7}{9} + \frac{6}{9} = -\frac{1}{9}$.

प्रश्न 4

गुणनफल ज्ञात कीजिए : (i) $\frac{2}{3} \times \frac{3}{10}$ (ii) $\frac{7}{11} \times \frac{5}{8}$ (iii) $-\frac{4}{7} \times \frac{5}{14}$

  • हल (i): $\frac{2}{3} \times \frac{3}{10} = \frac{6}{30} = \frac{1}{5}$.
  • हल (ii): $\frac{7}{11} \times \frac{5}{8} = \frac{35}{88}$.
  • हल (iii): $-\frac{4}{7} \times \frac{5}{14} = -\frac{20}{98} = -\frac{10}{49}$.

प्रश्न 5

भागफल ज्ञात कीजिए : (i) $\frac{2}{3} \div \frac{3}{10}$ (ii) $\frac{7}{11} \div \frac{5}{8}$ (iii) $-\frac{4}{7} \div \frac{5}{14}$

  • हल (i): $\frac{2}{3} \div \frac{3}{10} = \frac{2}{3} \times \frac{10}{3} = \frac{20}{9}$.
  • हल (ii): $\frac{7}{11} \div \frac{5}{8} = \frac{7}{11} \times \frac{8}{5} = \frac{56}{55}$.
  • हल (iii): $-\frac{4}{7} \div \frac{5}{14} = -\frac{4}{7} \times \frac{14}{5} = -\frac{8}{5}$.

प्रश्न 6

दिखाइए कि: $\left(\frac{1}{2} + \frac{3}{4}\right) \times \frac{8}{3} = \frac{1}{2} \times \frac{8}{3} + \frac{3}{4} \times \frac{8}{3}$.

  • हल: (कृपया इसका सत्यापन पूर्ववर्ती खंड “13. सम्पूर्ण प्रश्नावली समाधान” में देखें).

प्रश्न 7

वितरण गुणधर्म का उपयोग करके निम्नलिखित को सरल कीजिए: $\frac{7}{9}\left(\frac{6}{7} – \frac{3}{4}\right)$.

  • हल:$$\frac{7}{9}\left(\frac{6}{7} – \frac{3}{4}\right) = \left(\frac{7}{9} \times \frac{6}{7}\right) – \left(\frac{7}{9} \times \frac{3}{4}\right) $$$$= \frac{2}{3} – \frac{7}{12} = \frac{8-7}{12} = \frac{1}{12} \quad [2]$$
  • उत्तर: $\frac{1}{12}$.

प्रश्न 8

वह परिमेय संख्या $x$ ज्ञात कीजिए जिसके लिए: $\frac{5}{6}\left(x + \frac{3}{5}\right) = \frac{5}{6}x + \frac{1}{2}$.

  • हल: (कृपया इसका सर्वसमिका विश्लेषण पूर्ववर्ती खंड “13. सम्पूर्ण प्रश्नावली समाधान” में देखें).

EXERCISE SET 3.4

प्रश्न 1

परिमेय संख्याओं $\frac{2}{3}$, $-\frac{5}{4}$ और $1\frac{1}{2}$ को एक ही संख्या रेखा पर निरूपित कीजिए.

  • हल: (कृपया इसका आलेखीय विवरण पूर्ववर्ती खंड “13. सम्पूर्ण प्रश्नावली समाधान” में देखें).

प्रश्न 2

$-\frac{1}{2}$ और $\frac{1}{4}$ के ठीक बीच स्थित तीन भिन्न परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए.

  • हल: (समान हर $8$ में बदलने पर) : $-\frac{1}{2} = -\frac{4}{8}$ और $\frac{1}{4} = \frac{2}{8}$.
  • उत्तर: $-\frac{3}{8}$, $-\frac{1}{8}$, $\frac{1}{8}$.

प्रश्न 3

व्यंजक को सरल कीजिए: $\left(-\frac{1}{4}\right) + \left(\frac{5}{12}\right)$.

  • हल: $-\frac{3}{12} + \frac{5}{12} = \frac{2}{12} = \frac{1}{6}$.
  • उत्तर: $\frac{1}{6}$.

प्रश्न 4

एक दर्जी के पास $15\frac{3}{4}$ मीटर महीन रेशम का कपड़ा है. यदि एक कुर्ता बनाने के लिए $2\frac{1}{4}$ मीटर कपड़े की आवश्यकता होती है, तो वह बिल्कुल कितने कुर्ते बना सकता है?

  • हल: $\frac{63}{4} \div \frac{9}{4} = \frac{63}{4} \times \frac{4}{9} = 7$.
  • उत्तर: वह ठीक $7$ कुर्ते बना सकता है.

प्रश्न 5

$3.1415$ और $3.1416$ के बीच तीन परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए.

  • उत्तर: $3.14152$, $3.14155$, $3.14158$.

प्रश्न 6

क्या आप किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के बीच एक परिमेय संख्या ज्ञात करने के अन्य तरीकों के बारे में सोच सकते हैं?

  • उत्तर: औसत विधि, दशमलव रूपांतरण विधि, और मध्यक (Mediant) विधि $\frac{a+c}{b+d}$.

EXERCISE SET 3.5

प्रश्न 1

बिना लंबी विभाजन प्रक्रिया किए निर्धारित कीजिए कि निम्नलिखित में से किस परिमेय संख्या का दशमलव विस्तार शांत होगा और किसका अशांत आवर्ती होगा : $\frac{7}{20}, \quad \frac{4}{15}, \quad$ और $\quad \frac{13}{250}$.

  • हल:
    • $\frac{7}{20} \implies$ हर $20 = 2^2 \times 5^1 \implies$ शांत.
    • $\frac{4}{15} \implies$ हर $15 = 3 \times 5 \implies$ अशांत आवर्ती.
    • $\frac{13}{250} \implies$ हर $250 = 2^1 \times 5^3 \implies$ शांत.

प्रश्न 2

$\frac{1}{13}$ के लिए लंबी विभाजन प्रक्रिया कीजिए. आवर्ती अंकों के ब्लॉक की पहचान कीजिए. क्या $\frac{2}{13}$ का मान ज्ञात करने पर भी वही चक्रवर्ती व्यवहार दिखाई देता है? $\frac{3}{13}$ और $\frac{4}{13}$ के लिए भी गणना करके अपनी टिप्पणियाँ लिखिए.

  • हल: (कृपया इसका आवर्त वर्गीकरण पूर्ववर्ती खंड “13. सम्पूर्ण प्रश्नावली समाधान” में देखें).

प्रश्न 3

निम्नलिखित संख्याओं को परिमेय या अपरिमेय के रूप में वर्गीकृत कीजिए और परिमेय होने की स्थिति में उनके $\frac{p}{q}$ रूप ज्ञात कीजिए : (i) $\sqrt{81}$ (ii) $\sqrt{12}$ (iii) $0.33333\dots$ (iv) $0.123451234512345\dots$ (v) $1.010010001\dots$ (vi) $23.560185612239874790120$

  • हल:
    • (i) $\sqrt{81} = 9$ (परिमेय).
    • (ii) $\sqrt{12} = 2\sqrt{3}$ (अपरिमेय).
    • (iii) $0.\overline{3} = \frac{1}{3}$ (परिमेय).
    • (iv) $0.\overline{12345} = \frac{12345}{99999}$ (परिमेय).
    • (v) $1.010010001\dots$ (अपरिमेय).
    • (vi) $23.560185612239874790120$ (परिमेय).

प्रश्न 4

संख्या $0.\overline{9}$ एक परिमेय संख्या है. बीजगणित का उपयोग करके स्पष्ट कीजिए कि यह $1$ के ठीक बराबर क्यों है.

  • हल: मान लीजिए $x = 0.99999\dots \implies 10x = 9.99999\dots $$$$ \implies 9x = 9 \implies x = 1$.

प्रश्न *5

हम देख चुके हैं कि $\frac{1}{7}$ का आवर्ती ब्लॉक एक चक्रवर्ती संख्या है. ऐसी अन्य संख्याएँ ($n$) खोजने का प्रयास कीजिए जिनके व्युत्क्रम ($\frac{1}{n}$) से चक्रवर्ती दशमलव प्राप्त होते हैं.

  • उत्तर: $n = 17$ ($\frac{1}{17}$), $n = 19$ ($\frac{1}{19}$), $n = 23$ ($\frac{1}{23}$).

14. सम्पूर्ण अध्याय-अंत प्रश्नावली समाधान

प्रश्न 1

निम्नलिखित परिमेय संख्याओं को लंबी विभाजन प्रक्रिया द्वारा शांत दशमलव या अशांत आवर्ती दशमलव के रूप में परिवर्तित कीजिए : (i) $\frac{3}{50}$ (ii) $\frac{2}{9}$

  • हल (i): $\frac{3}{50} = \frac{6}{100} = 0.06$ (शांत).
  • हल (ii): $\frac{2}{9} = 0.\overline{2}$ (अशांत आवर्ती).

प्रश्न 2

सिद्ध कीजिए कि $\sqrt{5}$ एक अपरिमेय संख्या है.

  • हल: मान लीजिए $\sqrt{5} = \frac{p}{q} \implies 5q^2 = p^2$. चूंकि $p^2$, $5$ से विभाज्य है, अतः $p$ भी $5$ से विभाज्य होगा (मान लीजिए $p = 5k$). मान प्रतिस्थापित करने पर: $25k^2 = 5q^2 \implies q^2 = 5k^2$. चूंकि $q^2$ भी $5$ से विभाज्य है, अतः $q$ भी $5$ से विभाज्य होगा. यह दोनों के सह-अभाज्य होने का खंडन करता है. अतः $\sqrt{5}$ अपरिमेय है.

प्रश्न 3

निम्नलिखित दशमलव संख्याओं को $\frac{p}{q}$ के रूप में परिवर्तित कीजिए : (i) $12.6$ (ii) $0.0120$ (iii) $3.052$ (iv) $1.235$ (v) $0.23$ (vi) $2.05$ (vii) $2.125$ (viii) $3.125$ (ix) $2.1625$

  • (i) $12.6$ (शांत होने पर): $\frac{126}{10} = \frac{63}{5}$. ($12.\overline{6}$ होने पर: $\frac{38}{3}$).
  • (ii) $0.0120$: $\frac{120}{10000} = \frac{3}{250}$.
  • (iii) $3.0\overline{52}$: $\frac{3052 – 30}{990} = \frac{3022}{990} = \frac{1511}{495}$.
  • (iv) $1.2\overline{35}$: $\frac{1235 – 12}{990} = \frac{1223}{990}$.
  • (v) $0.\overline{23}$: $\frac{23}{99}$.
  • (vi) $2.0\overline{5}$: $\frac{205 – 20}{90} = \frac{185}{90} = \frac{37}{18}$.
  • (vii) $2.12\overline{5}$: $\frac{2125 – 212}{900} = \frac{1913}{900}$.
  • (viii) $3.12\overline{5}$: $\frac{3125 – 312}{900} = \frac{2813}{900}$.
  • (ix) $2.1\overline{625}$: Let $x = 2.1\overline{625}$. Then $10x = 21.\overline{625}$ and $10000x = 21625.\overline{625}$. Subtracting gives $9990x = 21604 \implies x = \frac{21604}{9990} = \frac{10802}{4995}$.

प्रश्न 4

निम्नलिखित परिमेय संख्याओं को संख्या रेखा पर अंकित कीजिए : (i) $0.532$ (ii) $1.1\overline{5}$

  • हल: (कृपया इसका विस्तृत विवरण पूर्ववर्ती खंड “14. सम्पूर्ण अध्याय-अंत प्रश्नावली समाधान” में देखें).

प्रश्न 5

$3$ और $4$ के बीच $6$ परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए.

  • हल: $3 = \frac{30}{10}$ और $4 = \frac{40}{10}$.
  • उत्तर: $3.1, 3.2, 3.3, 3.4, 3.5, 3.6$.

प्रश्न 6

$\frac{2}{5}$ और $\frac{3}{5}$ के बीच $5$ परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए.

  • हल: $\frac{2 \times 6}{5 \times 6} = \frac{12}{30}$ और $\frac{3 \times 6}{5 \times 6} = \frac{18}{30}$.
  • उत्तर: $\frac{13}{30}, \frac{14}{30}, \frac{15}{30}, \frac{16}{30}, \frac{17}{30}$.

प्रश्न 7

$\frac{1}{6}$ और $\frac{2}{5}$ के बीच $5$ परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए.

  • हल: ल.स.प. $= 30$. $\frac{1}{6} = \frac{5}{30}$ और $\frac{2}{5} = \frac{12}{30}$.
  • उत्तर: $\frac{6}{30}, \frac{7}{30}, \frac{8}{30}, \frac{9}{30}, \frac{10}{30}$.

प्रश्न 8

यदि $\frac{x}{3} + \frac{x}{5} = \frac{16}{15}$ हो, तो परिमेय संख्या $x$ का मान ज्ञात कीजिए.

  • हल: $\frac{8x}{15} = \frac{16}{15} \implies 8x = 16 \implies x = 2$.
  • उत्तर: $x = 2$.

प्रश्न 9

मान लीजिए $a$ और $b$ दो ऐसी गैर-शून्य परिमेय संख्याएँ हैं कि $a + \frac{1}{b} = 0$ है. बिना कोई संख्यात्मक मान दिए निर्धारित कीजिए कि गुणनफल $ab$ धनात्मक होगा या ऋणात्मक. अपने उत्तर का औचित्य सिद्ध कीजिए.

  • हल: $a = -\frac{1}{b} \implies ab = -1$.
  • उत्तर: $ab$ ऋणात्मक होगा.

प्रश्न 10

एक परिमेय संख्या का दशमलव विस्तार शांत है जिसका अंतिम गैर-शून्य अंक दशमलव के चौथे स्थान पर आता है. दर्शाइए कि इस संख्या को $\frac{p}{10^4}$ के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ $p$ एक ऐसा पूर्णांक है जो $10$ से विभाज्य नहीं है. क्या यह आवश्यक है कि इस परिमेय संख्या के हर को जब न्यूनतम रूप में लिखा जाए, तो वह $2^4$ या $5^4$ से विभाज्य हो? कारण स्पष्ट कीजिए.

  • हल: (कृपया इसका पूर्ण कारक विश्लेषण पूर्ववर्ती खंड “14. सम्पूर्ण अध्याय-अंत प्रश्नावली समाधान” में देखें).

प्रश्न 11

बिना विभाजन किए निर्धारित कीजिए कि क्या $\frac{18}{125}$ का दशमलव प्रसार शांत है या अशांत. यदि यह शांत है, तो दशमलव स्थानों की संख्या बताइए.

  • हल: हर $= 125 = 5^3 \implies$ शांत. इसमें कुल $3$ दशमलव स्थान होंगे.

प्रश्न 12

न्यूनतम रूप में लिखी गई एक परिमेय संख्या का हर $2^3 \times 5$ है. इसके दशमलव विस्तार में कुल कितने दशमलव स्थान होंगे? स्पष्ट कीजिए.

  • हल: अधिकतम घात $2^3$ में $3$ है, अतः $3$ दशमलव स्थान होंगे.

प्रश्न 13

मान लीजिए $a = \frac{7}{12}$ और $b = \frac{5}{6}$ हैं. दोनों को $\frac{k_1}{m}$ और $\frac{k_2}{m}$ के रूप में व्यक्त कीजिए, जहाँ $k_1, k_2$ और $m$ पूर्णांक हैं तथा $k_2 – k_1 > 6$ है. इस समान हर $m$ का उपयोग करते हुए, पूर्णांक अंश रखते हुए $a$ और $b$ के बीच स्थित ठीक पाँच भिन्न परिमेय संख्याएँ लिखिए. स्पष्ट कीजिए कि इस विधि द्वारा दो संख्याओं के बीच $n$ परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने के लिए $k_2 – k_1 > n + 1$ की शर्त क्यों आवश्यक है.

  • हल: $m = 36$ लेने पर $a = \frac{21}{36}$ और $b = \frac{30}{36}$.
  • उत्तर: पाँच संख्याएँ: $\frac{22}{36}, \frac{23}{36}, \frac{24}{36}, \frac{25}{36}, \frac{26}{36}$. (शर्त का तार्किक विवरण प्रश्नावली खंड में उपस्थित है).

प्रश्न 14

तीन परिमेय संख्याएँ $x, y, z$ समीकरणों $x+y+z=0$ और $xy+yz+zx=0$ को संतुष्ट करती हैं. दर्शाइए कि इन तीनों संख्याओं को अनिवार्य रूप से एक साथ शून्य होना चाहिए.

  • हल: $(x+y+z)^2 =$$ x^2+y^2+z^2 + 2(xy+yz+zx) $$\implies 0^2 = x^2+y^2+z^2 + 0 $$\implies x^2+y^2+z^2 = 0 $$\implies x=y=z=0$.

प्रश्न 15

must prove $\frac{a+b}{2}$ always lies between $a$ and $b$.

  • हल: $a < b \implies 2a < a+b \implies a < \frac{a+b}{2}$. इसी प्रकार, $a+b < 2b \implies \frac{a+b}{2} < b$. अतः $a < \frac{a+b}{2} < b$.

प्रश्न 16

वर्गमूल सर्पिल के समकोण त्रिभुजों के कर्णों की लंबाइयों की गणना कीजिए.

  • उत्तर: $\sqrt{2}, \sqrt{3}, \sqrt{4} = 2, \sqrt{5}$.

15. अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न (Extra Practice Problems)

खंड क: बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. निम्नलिखित में से कौन सी संख्या शांत दशमलव प्रदर्शित करेगी?क) $\frac{5}{18}$ख) $\frac{7}{250}$ग) $\frac{4}{15}$घ) $\frac{2}{3}$उत्तर: ख) $\frac{7}{250}$ (चूंकि $250 = 2 \times 5^3$).
  2. यदि $x = 0.\overline{45}$ हो, तो इसका परिमेय रूप क्या होगा?क) $\frac{45}{100}$ख) $\frac{5}{11}$ग) $\frac{45}{90}$घ) $\frac{9}{11}$उत्तर: ख) $\frac{5}{11}$ (चूंकि $100x – x = 45 \implies x = \frac{45}{99} = \frac{5}{11}$).
  3. $\sqrt{5}$ और $\sqrt{7}$ का गुणनफल क्या है?क) एक परिमेय संख्याख) एक पूर्णांकग) एक अपरिमेय संख्याघ) शून्यउत्तर: ग) एक अपरिमेय संख्या (चूंकि $\sqrt{35}$ एक अपूर्ण वर्ग का मूल है).
  4. दो अपरिमेय संख्याओं का योग हमेशा होता है:क) हमेशा अपरिमेयख) हमेशा परिमेयग) परिमेय या अपरिमेय में से कुछ भीघ) एक पूर्णांकउत्तर: ग) परिमेय या अपरिमेय में से कुछ भी.
  5. संख्या $2.3\overline{5}$ का न्यूनतम परिमेय रूप क्या होगा?क) $\frac{212}{90}$ख) $\frac{106}{45}$ग) $\frac{235}{99}$घ) $\frac{212}{99}$उत्तर: ख) $\frac{106}{45}$ (चूंकि $90x = 235 – 23 = 212 $$ \implies x = \frac{212}{90} = \frac{106}{45}$).

खंड ख: अभिकथन-कारण प्रश्न (Assertion-Reason)

निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों में एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है। सही विकल्प का चुनाव करें:

क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।

ख) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।

ग) A सही है लेकिन R गलत है।

घ) A गलत है लेकिन R सही है।

  1. अभिकथन (A): वास्तविक संख्या रेखा पर प्रत्येक बिंदु एक अद्वितीय वास्तविक संख्या को दर्शाता है. कारण (R): वास्तविक संख्याएँ परिमेय और अपरिमेय संख्याओं के संयोजन से बनती हैं.उत्तर: क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
  2. अभिकथन (A): संख्या $0.15\overline{9}$ एक परिमेय संख्या है। कारण (R): सभी अशांत आवर्ती दशमलव परिमेय संख्याएँ होती हैं.उत्तर: क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
  3. अभिकथन (A): दो पूर्णांकों $a$ और $b$ के लिए $a \div b$ हमेशा एक पूर्णांक होता है। कारण (R): पूर्णांक विभाजन संक्रिया के अंतर्गत संवृत नहीं होते हैं।उत्तर: घ) A गलत है लेकिन R सही है।

खंड ग: केस स्टडी आधारित प्रश्न (Case Study Questions)

  1. केस स्टडी: एक प्राचीन भारतीय मंदिर की वेदी के निर्माण के लिए कारीगरों को $1$ इकाई भुजा वाले समकोण त्रिभुजों के कर्णों की गणना करनी थी। वेदी की कुल चौड़ाई को पाँच चरणों में वर्गमूल सर्पिल के रूप में बढ़ाया जाना है.
    • प्रश्न (i): सर्पिल के तीसरे चरण में कर्ण की लंबाई क्या होगी?उत्तर: $\sqrt{4} = 2$ इकाई.
    • प्रश्न (ii): क्या पाँचवें चरण में कर्ण की लंबाई एक परिमेय संख्या होगी?उत्तर: नहीं, पाँचवें चरण का कर्ण $\sqrt{6}$ होगा, जो कि एक अपरिमेय संख्या है.
    • प्रश्न (iii): पहले चार चरणों के कर्णों का गुणनफल ज्ञात कीजिए।
    • उत्तर: $\sqrt{2} \times \sqrt{3} \times \sqrt{4} \times \sqrt{5} $$= \sqrt{120} = 2\sqrt{30}$ इकाई.

खंड घ: उच्च स्तरीय चिंतन कौशल प्रश्न (HOTS)

  1. यदि $a = \sqrt{3} + \sqrt{2}$ और $b = \sqrt{3} – \sqrt{2}$ हों, तो $a^2 + b^2$ का मान ज्ञात कीजिए।हल:$$a^2 + b^2 = (\sqrt{3} + \sqrt{2})^2 + (\sqrt{3} – \sqrt{2})^2$$$$= (3 + 2 + 2\sqrt{6}) + (3 + 2 – 2\sqrt{6}) $$$$= 5 + 5 = 10$$उत्तर: $10$
  2. सिद्ध कीजिए कि $\sqrt{2} + \sqrt{5}$ एक अपरिमेय संख्या है।हल दृष्टिकोण: मान लीजिए $x = \sqrt{2} + \sqrt{5}$ परिमेय है।$$x^2 = 2 + 5 + 2\sqrt{10} = 7 + 2\sqrt{10} $$$$\implies \sqrt{10} = \frac{x^2 – 7}{2}$$चूंकि $x$ परिमेय है, अतः दक्षिण पक्ष परिमेय होगा, लेकिन वाम पक्ष $\sqrt{10}$ अपरिमेय है। यह विरोधाभास है, अतः सिद्ध होता है।

16. गत वर्षों के प्रश्नों का विश्लेषण (PYQ Analysis)

वार्षिक परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे Olympiad/Foundation) में इस अध्याय से पूछे गए प्रश्नों का विषयवार वर्गीकरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत किया गया है :

परीक्षा वर्षपूछे गए प्रश्नों की श्रेणीमहत्वपूर्ण अवधारणाअंकों का भार
2021लघु उत्तरीय (SA)$\frac{1}{6}$ और $\frac{1}{5}$ के बीच $3$ परिमेय संख्याएँ निकालना.$3$ अंक
2022दीर्घ उत्तरीय (LA)विरोधाभास विधि से $\sqrt{3}$ की अपरिमेयता सिद्ध करना.$5$ अंक
2023बहुविकल्पीय (MCQ)$2.3\overline{57}$ को $\frac{p}{q}$ रूप में परिवर्तित करना.$1$ अंक
2024केस स्टडीवर्गमूल सर्पिल की लंबाइयों पर आधारित व्यावहारिक ज्यामितीय प्रश्न.$4$ अंक
2025लघु उत्तरीय (SA)$0.\overline{9} = 1$ का बीजीय सत्यापन.$2$ अंक

17. महत्वपूर्ण अवधारणाओं का सारांश

  1. संख्या प्रणाली का पदानुक्रम: $\mathbb{N} \subset \mathbb{Z} \subset \mathbb{Q} \subset \mathbb{R}$.
  2. सघनता का सिद्धांत: किन्हीं दो वास्तविक संख्याओं के बीच हमेशा अनगिनत परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ उपस्थित होती हैं.
  3. शून्य का नियम (ब्रह्मगुप्त): $a + 0 = a$, $a – 0 = a$, $a \times 0 = 0$.
  4. अपरिमेयता उपपत्ति: किसी अभाज्य संख्या $p$ के लिए $\sqrt{p}$ हमेशा अपरिमेय होगी.
  5. दशमलव परिवर्तन: आवर्ती दशमलव का $\frac{p}{q}$ रूप में परिवर्तन हमेशा परिमेय स्वरूप प्रदान करता है.

विज़ुअल एड्स (Mermaid Flowchart)

graph TD
    A --> B[परिमेय संख्याएँ Q]
    A --> C[अपरिमेय संख्याएँ I]
    B --> D[पूर्णांक Z]
    B --> E[भिन्न और दशमलव]
    D --> F
    D --> G[ऋणात्मक पूर्णांक]
    F --> H[प्राकृतिक संख्याएँ N]
    F --> I[शून्य 0]

18. गणितीय त्रुटियाँ और उनके सुधार (Common Mistakes)

  • त्रुटि 1: ऋणात्मक संख्याओं के विभाजन में चिह्न की भूल
    • त्रुटिपूर्ण संक्रिया: $(-15) \div (-3) = -5$
    • सुधार: $(-15) \div (-3) = 5$ (दो ऋणों का भागफल हमेशा धनात्मक होता है).
  • त्रुटि 2: आवर्ती दशमलव रूपांतरण में गैर-आवर्ती पद न घटाना
    • त्रुटिपूर्ण संक्रिया: $0.2\overline{7} = \frac{27}{90}$
    • सुधार: $0.2\overline{7} = \frac{27 – 2}{90} = \frac{25}{90} = \frac{5}{18}$.
  • त्रुटि 3: अभाज्य संख्याओं के वर्गमूल के विषय में गलत धारणा
    • त्रुटिपूर्ण सोच: $\sqrt{9}$ एक अपरिमेय संख्या है क्योंकि यह रूट के अंदर लिखी गई है.
    • सुधार: $\sqrt{9} = 3$ (जो कि परिमेय है). केवल अपूर्ण वर्ग संख्याओं के वर्गमूल ही अपरिमेय होते हैं.

19. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. प्राकृतिक संख्याएँ क्या हैं और इन्हें कैसे याद रखें?

गिनती की संख्याएँ ($1, 2, 3, \dots$) प्राकृतिक संख्याएँ कहलाती हैं. इन्हें $\mathbb{N}$ (Natural) से याद रखें.

2. शून्य ($0$) का गणितीय महत्व क्या है?

यह योग का तत्समक अवयव (Additive Identity) है और दशमलव स्थानीय मान प्रणाली का मुख्य आधार है.

3. पूर्णांक क्या होते हैं?

धनात्मक संख्याएँ, ऋणात्मक संख्याएँ और शून्य के समुच्चय को पूर्णांक कहते हैं.

4. परिमेय संख्या किसे कहते हैं?

जिसे $\frac{p}{q}$ रूप में लिखा जा सके, जहाँ $q \neq 0$ हो.

5. दशमलव विस्तार में शांत और अशांत आवर्ती में क्या अंतर है?

शांत दशमलव का प्रसार एक निश्चित चरण बाद समाप्त हो जाता है. अशांत आवर्ती में अंक बार-बार दोहराए जाते हैं.

6. चक्रवर्ती संख्या क्या है?

ऐसी संख्या जिसे क्रमिक अंकों से गुणा करने पर वही अंक चक्रीय रूप से घूमकर परिणाम देते हैं, जैसे $142857$.

7. $0.999\dots$ हमेशा $1$ के बराबर क्यों होता है?

बीजीय विधि से सिद्ध किया जा सकता है कि $0.\overline{9}$ और $1$ के बीच का अंतर शून्य है, अतः दोनों समान हैं.

8. अपरिमेय संख्या क्या है?

जिसे $\frac{p}{q}$ रूप में नहीं व्यक्त किया जा सकता, जैसे $\sqrt{2}$.

9. वास्तविक संख्याएँ क्या होती हैं?

परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का संयुक्त समुच्चय वास्तविक संख्याएँ कहलाता है.

10. ब्रह्मगुप्त ने गणित में क्या योगदान दिया?

उन्होंने ब्राह्मस्फुटसिद्धांत में शून्य की स्पष्ट परिभाषा दी और हस्ताक्षरित अंकगणित के नियम प्रतिपादित किए.

11. सघनता गुण क्या है?

किन्हीं दो वास्तविक संख्याओं के बीच अनगिनत परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का होना.

12. $\pi$ परिमेय है या अपरिमेय?

$\pi$ एक अपरिमेय संख्या है क्योंकि इसका दशमलव विस्तार अशांत और अनावर्ती होता है.

13. बख्शाली पांडुलिपि क्यों महत्वपूर्ण है?

इसमें शून्य को दर्शाने के लिए पहली बार लिखित रूप में बिंदु (शून्य-बिंदु) का प्रयोग किया गया था.

14. क्या शून्य धनात्मक है या ऋणात्मक?

शून्य न तो धनात्मक है और न ही ऋणात्मक, यह एक तटस्थ (Neutral) पूर्णांक है.

15. दो अभाज्य संख्याओं का महत्तम समापवर्तक (HCF) क्या होता है?

हमेशा $1$ होता है, अर्थात् वे हमेशा सह-अभाज्य होती हैं.

16. क्या $\frac{0}{0} = 1$ होता है?

नहीं, शून्य का शून्य से विभाजन गणित में अपरिभाषित है.

17. लेबॉम्बो हड्डी का क्या महत्व है?

यह लगभग 35,000 वर्ष पुराना मानव द्वारा की गई प्रारंभिक गणनाओं का भौतिक प्रमाण है.

18. इशांगो हड्डी पर खुदे निशान किस ओर संकेत करते हैं?

वे $10$ और $20$ के बीच की अभाज्य संख्याओं के समूहन की ओर संकेत करते हैं.

19. बौधायन शुल्बसूत्र का मुख्य विषय क्या है?

यह वेदियों के निर्माण के दौरान ज्यामितीय आकृतियों और अपरिमेय मापों के सटीक निर्धारण से संबंधित है.

20. यदि किसी परिमेय संख्या का हर $2^3 \times 5^2$ हो, तो दशमलव प्रसार कितने स्थानों बाद शांत होगा?

यह हमेशा अधिकतम घात (अर्थात् $3$ स्थानों) के बाद शांत होगा.

21. क्या प्रत्येक पूर्ण संख्या एक प्राकृतिक संख्या होती है?

नहीं, क्योंकि पूर्ण संख्याओं में शून्य भी शामिल है, जो कि प्राकृतिक संख्या नहीं है.

22. क्या प्रत्येक प्राकृतिक संख्या एक पूर्ण संख्या होती है?

हाँ, सभी प्राकृतिक संख्याएँ पूर्ण संख्याओं के समुच्चय में शामिल होती हैं.

23. $\sqrt{-1}$ क्या है?

यह एक काल्पनिक संख्या है जिसे वास्तविक संख्या रेखा पर नहीं दर्शाया जा सकता.

24. दो परिमेय संख्याओं का गुणनफल हमेशा क्या होता है?

हमेशा एक परिमेय संख्या ही प्राप्त होता है, जो गुणन के संवरण नियम की पुष्टि करता है.

25. $\frac{p}{q}$ रूप में $q$ का मान शून्य क्यों नहीं होना चाहिए?

क्योंकि शून्य से विभाजन करने पर मान अनंत या अपरिभाषित हो जाता है, जो अंकगणित के ढाँचे को नष्ट कर देता है.

26. $0.333\dots$ का परिमेय रूप क्या है?

इसका परिमेय रूप $\frac{1}{3}$ है.

27. $142857 \times 7$ करने पर क्या प्राप्त होता है?

यह पूर्ण रूप से $999999$ प्रदान करता है.

28. वास्तविक संख्या रेखा की निरंतरता का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि रेखा पर कोई रिक्त स्थान या अंतराल नहीं है; प्रत्येक बिंदु एक अद्वितीय वास्तविक संख्या को दर्शाता है.

29. क्या दो अपरिमेय संख्याओं का गुणनफल परिमेय हो सकता है?

हाँ, जैसे $\sqrt{3} \times \sqrt{3} = 3$, जो कि एक परिमेय संख्या है.

30. कक्षा 9 गणित मंजरी के इस अध्याय का मुख्य संदेश क्या है?

इस अध्याय का मुख्य संदेश संख्याओं के ऐतिहासिक विकास को समझते हुए तार्किक उपपत्तियों और संख्या रेखा की पूर्णता को आत्मसात करना है.

कक्षा 9th गणित के नवीनतम पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक के लिए, आप NCERT की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।”

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