कक्षा 9 गणित अध्याय 8 अनुक्रम एवं श्रेणियाँ नोट्स (Hindi): सम्पूर्ण Master Guide | AP, GP, Fibonacci, सूत्र, NCERT Solutions, PYQs, Tricks, Mind Map एवं PDF

कक्षा 9 गणित अध्याय 8 अनुक्रम एवं श्रेणियाँ नोट्स (Hindi): सम्पूर्ण Master Guide | AP, GP, Fibonacci, सूत्र, NCERT Solutions, PYQs, Tricks, Mind Map एवं PDF

Table of Contents

1. आकर्षक परिचय (Introduction)

सृष्टि के कण-कण में पैटर्नों (प्रारूपों) का एक गहरा साम्राज्य है । किसी वृक्ष की टहनियों का क्रमिक विभाजन, सूर्यमुखी के बीजों की सर्पिलाकार व्यवस्था, समुद्र की तरंगों की आवर्ती गति, और बादलों का जटिल विखंडन—ये सभी किसी न कुछ अंतर्निहित नियम के अधीन कार्य करते हैं । मानवीय कला, वास्तुकला, शास्त्रीय संगीत की ताल और आधुनिक वित्तीय विश्लेषण में भी पैटर्नों का उपयोग सुव्यवस्थित रूप से किया जाता है ।

आधुनिक डिजिटल युग में कंप्यूटर कोडिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मोबाइल पासवर्ड सुरक्षा तंत्र, और गूगल मैप्स (Google Maps) में सर्वोत्तम मार्गों की भविष्यवाणी करने वाले एल्गोरिदम भी अंततः पैटर्नों के गणितीय विश्लेषण पर ही टिके हैं।

गणित में, जब संख्याओं या विभिन्न आकृतियों को एक निश्चित क्रम में सुव्यवस्थित किया जाता है, तो उस विशेष व्यवस्था को अनुक्रम (Sequence) कहा जाता है । अनुक्रमों के व्यवस्थित अध्ययन से यह समझना अत्यंत सुगम हो जाता है कि संख्याएँ किस प्रकार वर्धमान होती हैं, ह्रासमान होती हैं अथवा स्वयं की पुनरावृत्ति करती हैं । इन पैटर्नों के विश्लेषण से भविष्य के पदों की सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है ।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई एनसीईआरटी (NCERT) की कक्षा 9 की नवीन पाठ्यपुस्तक गणित मंजरी (Ganita Manjari) का यह आठवाँ अध्याय विद्यार्थियों को इसी तार्किक यात्रा पर ले जाता है ।

इससे पहले परिमाप और क्षेत्रफल को एक बार और पढ़े।

2. अनुक्रम (Sequence) क्या होता है?

2. अनुक्रम (Sequence) क्या होता है?

गणितीय संदर्भ में, एक अनुक्रम को संख्याओं की एक ऐसी व्यवस्थित सूची के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसमें प्रत्येक संख्या का एक विशिष्ट स्थान होता है और वह सूची किसी सुसंगत नियम का अनुपालन करती है । इस सूची के अंतर्गत आने वाली प्रत्येक पृथक संख्या को उसका ‘पद’ (Term) कहा जाता है । अनुक्रम के पदों को क्रमशः प्रथम पद, द्वितीय पद, तृतीय पद इत्यादि के नाम से जाना जाता है

अनुक्रमों को उनके विभिन्न गणितीय गुणों और पदों की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है :

  • परिमित अनुक्रम (Finite Sequence): ऐसा अनुक्रम जिसमें पदों की संख्या निश्चित (परिमित) होती है । उदाहरण के लिए, पाँच पदों वाला अनुक्रम $6, 12, 24, 48, 96$ एक परिमित अनुक्रम है ।
  • अपरिमित अनुक्रम (Infinite Sequence): ऐसा अनुक्रम जिसमें पदों की संख्या अनंत होती है और जो कभी समाप्त नहीं होता । इसे निरूपित करने के लिए अंत में तीन बिंदु ($\dots$) लगाए जाते हैं । उदाहरण के लिए, प्राकृतिक संख्याओं का अनुक्रम $1, 2, 3, 4, 5, \dots$ अपरिमित है ।
  • वर्धमान अनुक्रम (Increasing Sequence): ऐसा अनुक्रम जिसका प्रत्येक अगला पद अपने पिछले पद से बड़ा या उसके बराबर होता है, जैसे: $-7, -3, 1, 5, 9, \dots$.
  • ह्रासमान अनुक्रम (Decreasing Sequence): ऐसा अनुक्रम जिसका प्रत्येक अगला पद अपने पूर्ववर्ती पद से छोटा होता है, जैसे इकाई भिन्न अनुक्रम: $1, \frac{1}{2}, \frac{1}{3}, \frac{1}{4}, \dots$.
  • ऋणात्मक अनुक्रम (Negative Sequence): ऐसा अनुक्रम जिसके पद ऋणात्मक पूर्णांकों अथवा वास्तविक संख्याओं से निर्मित होते हैं, जैसे: $-10, -20, -30, -40, \dots$.
  • भिन्नात्मक अनुक्रम (Fraction Sequence): जिसके पद भिन्नों के रूप में व्यवस्थित होते हैं, जैसे: $\frac{1}{2}, \frac{5}{2}, \frac{9}{2}, \frac{13}{2}, \dots$.

नीचे दी गई तालिका विभिन्न संख्यात्मक अनुक्रमों के वर्गीकरण को प्रस्तुत करती है:

अनुक्रम का नामअनुक्रम के प्रारंभिक पदवर्गीकरणअंतर्निहित नियम
प्राकृतिक संख्याएँ$1, 2, 3, 4, 5, 6, \dots$अपरिमितप्रत्येक पद पिछले पद से $1$ अधिक है
विषम संख्याएँ$1, 3, 5, 7, 9, 11, \dots$अपरिमितप्रथम पद $1$ है, क्रमिक अंतर $2$ है
सम संख्याएँ$2, 4, 6, 8, 10, 12, \dots$अपरिमितप्रथम पद $2$ है, क्रमिक अंतर $2$ है
वर्ग संख्याएँ$1, 4, 9, 16, 25, 36, \dots$अपरिमितप्रत्येक पद क्रमिक प्राकृतिक संख्या का वर्ग है
घन संख्याएँ$1, 8, 27, 64, 125, \dots$अपरिमितप्रत्येक पद क्रमिक प्राकृतिक संख्या का घन है
त्रिभुजीय संख्याएँ$1, 3, 6, 10, 15, 21, \dots$अपरिमितपदों का अंतर क्रमिक रूप से $2, 3, 4, 5, \dots$ है
अभाज्य संख्याएँ$2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, \dots$अपरिमितकेवल $1$ और स्वयं से विभाजित होने वाली संख्याएँ

3. पैटर्न पहचानना (Pattern Recognition)

3. पैटर्न पहचानना (Pattern Recognition)

किसी अज्ञात संख्या अनुक्रम का विश्लेषण करते समय क्रमिक पदों के संबंधों को समझना आवश्यक है । किसी भी पैटर्न को पहचानने के लिए निम्नलिखित पद्धतियों का उपयोग किया जाता है:

  1. अंतर पद्धति (Difference Method): क्रमिक पदों ($t_{n} – t_{n-1}$) का अंतर निकाला जाता है । यदि यह अंतर स्थिर हो, तो अनुक्रम एक रैखिक पैटर्न का पालन करता है ।
  2. अनुपात पद्धति (Ratio Method): क्रमिक पदों का अनुपात ($\frac{t_{n}}{t_{n-1}}$) निकाला जाता है । यदि यह स्थिर हो, तो वृद्धि घातीय (Exponential) होती है ।
  3. एकांतर पद्धति (Alternating Patterns): जहाँ विषम स्थानों वाले पद एक अलग नियम का पालन करते हैं और सम स्थानों वाले पद किसी अन्य नियम का।
  4. पुनरावर्ती ढाँचा (Recursive Structure): जहाँ वर्तमान पद का निर्माण पिछले पदों के संयोजन से होता है ।

पैटर्न पहचानना केवल गणित तक ही सीमित नहीं है; कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में ‘एल्गोरिदम विकास’ और ‘डेटा विश्लेषण’ पूरी तरह से इसी योग्यता पर आधारित हैं । उदाहरण के लिए, कोडर्स डेटा की श्रृंखलाओं में विशिष्ट पैटर्नों की पहचान कर बड़ी समस्याओं को छोटे हिस्सों में विभाजित करते हैं

4. प्रसिद्ध संख्या अनुक्रम

गणित के इतिहास में कुछ संख्या अनुक्रम अपनी अनूठी ज्यामितीय और अंकगणितीय विशेषताओं के कारण अत्यंत प्रसिद्ध हैं

त्रिभुजीय संख्याएँ (Triangular Numbers)

त्रिभुजीय संख्याओं का अनुक्रम $1, 3, 6, 10, 15, 21, \dots$ है । इन संख्याओं को बिंदुओं के एक त्रिभुजाकार विन्यास के रूप में दर्शाया जा सकता है । प्रत्येक त्रिभुजीय संख्या को क्रमिक प्राकृतिक संख्याओं के योग के रूप में लिखा जा सकता है :

  • 1 = 1
  • 3 = 1 + 2
  • 6 = 1 + 2 + 3
  • 10 = 1 + 2 + 3 + 4
  • 15 = 1 + 2 + 3 + 4 + 5

इस प्रकार, $n$-वीं त्रिभुजीय संख्या वास्तव में प्रथम $n$ प्राकृतिक संख्याओं का योग है

वर्ग संख्याएँ (Square Numbers)

वर्ग संख्याओं का अनुक्रम $1, 4, 9, 16, 25, 36, \dots$ है । इन संख्याओं और क्रमिक विषम संख्याओं के बीच एक असाधारण संबंध है :

$$1 = 1 \\ 4 = 1 + 3 \\ 9 = 1 + 3 + 5$$

$$16 = 1 + 3 + 5 + 7$$

अर्थात, प्रत्येक $n$-वीं वर्ग संख्या, प्रथम $n$ क्रमिक विषम संख्याओं के योग के तुल्य होती है । इस सुंदर पैटर्न को ज्यामितीय रूप से वर्गों की क्रमिक परतों (L-shaped gnomons) के संयोजन द्वारा सिद्ध किया जा सकता है

मेरु प्रस्तार या पास्कल पैटर्न (Meru Prastara / Pascal Pattern)

प्राचीन भारतीय गणितज्ञ आचार्य पिंगल ने द्विपद गुणांकों को व्यवस्थित करने के लिए ‘मेरू प्रस्तार’ (जिसका पश्चिमी नाम पास्कल त्रिकोण है) का विकास किया था । इस त्रिकोणीय व्यवस्था में प्रत्येक संख्या अपने ठीक ऊपर स्थित दो संख्याओं का योग होती है । मेरु प्रस्तार की तिरछी पंक्तियों (diagonals) का योग करने पर स्वतः ही विरहाङ्क-फाइबोनैचि अनुक्रम प्राप्त हो जाता है

5. अनुक्रम संकेतन (Sequence Notation)

5. अनुक्रम संकेतन (Sequence Notation)

अनुक्रम के पदों को संक्षिप्त और सटीक रूप से व्यक्त करने के लिए विशिष्ट बीजगणितीय संकेतनों का उपयोग किया जाता है :

  • $t_{1}$: अनुक्रम के प्रथम पद के मान को निरूपित करता है ।
  • $t_{2}$: द्वितीय पद के मान को दर्शाता है ।
  • $t_{n}$: $n$-वें पद को निरूपित करता है, जहाँ उप-संकेताक्षर (subscript) $n$ पद की स्थिति को दर्शाता है ।

स्थिति $n$ हमेशा एक धनात्मक पूर्णांक ($1, 2, 3, \dots$) होती है, लेकिन पद $t_n$ का वास्तविक मान कोई भी वास्तविक संख्या (जैसे ऋणात्मक पूर्णांक, भिन्न, अथवा अपरिमेय संख्या) हो सकता है । अलग-अलग अनुक्रमों के सह-अस्तित्व को दर्शाने के लिए वर्णमाला के विभिन्न अक्षरों जैसे $u_1, u_2, \dots$ या $S_1, S_2, \dots$ का उपयोग किया जाता है

6. स्पष्ट नियम (Explicit Rule)

एक स्पष्ट नियम वह गणितीय सूत्र है जो किसी अनुक्रम के किसी भी पद ($t_n$) के मान की गणना सीधे उसकी स्थिति संख्या $n$ के आधार पर करने की अनुमति देता है

स्पष्ट नियम की उपयोगिता

स्पष्ट नियम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके उपयोग से बिना किसी पूर्ववर्ती पद की गणना किए सीधे कोई भी दूरस्थ पद (जैसे 53वाँ, 108वाँ या 1170वाँ पद) तुरंत प्राप्त किया जा सकता है

उदाहरण विश्लेषण

यदि विषम संख्याओं के अनुक्रम का स्पष्ट नियम $u_n = 2n – 1$ है :

  • 53वाँ पद: $u_{53} = 2(53) – 1 $$= 106 – 1 = 105$
  • 108वाँ पद: $u_{108} = 2(108) – 1 $$= 216 – 1 = 215$

पद की अस्तित्व जाँच (Existence Check)

स्पष्ट नियम का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए भी किया जाता है कि कोई विशेष संख्या अनुक्रम का अंग है या नहीं । इसके लिए समीकरण $t_n = k$ को $n$ के लिए हल किया जाता है । यदि $n$ का मान एक प्राकृतिक संख्या प्राप्त होता है, तो वह संख्या अनुक्रम का हिस्सा होती है; अन्यथा नहीं

7. पुनरावर्ती नियम (Recursive Rule)

पुनरावर्ती नियम के अंतर्गत अनुक्रम का कोई भी पद अपने ठीक पिछले (या उससे पूर्व के) पदों के साथ एक निश्चित संबंध द्वारा परिभाषित किया जाता है।

सिद्धांत और सूत्र

पुनरावर्ती नियम को परिभाषित करने के लिए दो घटकों की आवश्यकता होती है:

  1. प्रारंभिक आधारभूत पद (Seed Value): जैसे $t_1 = a$ ।
  2. पुनरावर्ती संबंध (Recurrence Relation): जैसे $t_n = t_{n-1} + d$ ($n \ge 2$) ।

लाभ एवं सीमाएँ

  • लाभ: यह प्राकृतिक वृद्धि प्रक्रियाओं और कंप्यूटर लूप्स (coding loops) को दर्शाने का सबसे स्वाभाविक गणितीय तरीका है।
  • सीमाएँ: यदि अनुक्रम का 100वाँ पद ज्ञात करना हो, तो अनिवार्य रूप से उससे पहले के सभी 99 पदों की गणना करनी होगी, जो कि अत्यधिक समय लेने वाली प्रक्रिया है ।

8. स्पष्ट नियम बनाम पुनरावर्ती नियम: तुलनात्मक विश्लेषण

अनुक्रमों के विश्लेषण में दोनों नियमों का तुलनात्मक अध्ययन आवश्यक है :

तुलना का बिंदुस्पष्ट नियम (Explicit Rule)पुनरावर्ती नियम (Recursive Rule)
मूल परिभाषापद का मान सीधे स्थिति $n$ से निर्धारित होता है पद का मान उसके पिछले पदों के संदर्भ में ज्ञात होता है
प्रारंभिक शर्तकिसी प्रारंभिक पद के मान की आवश्यकता नहीं होती।कम से कम एक या अधिक प्रारंभिक पदों की आवश्यकता होती है
दूरस्थ पद गणनाअत्यधिक तीव्र और कुशल (सीधे मान रखकर) धीमी प्रक्रिया (क्रमिक रूप से सभी पद निकालने होंगे)
त्रुटि का प्रभावकिसी एक पद की गणना में त्रुटि का आगे कोई प्रभाव नहीं पड़ता।एक भी पद गलत होने पर आगे के सभी पद त्रुटिपूर्ण हो जाते हैं।
कंप्यूटर कोडिंगबंद रूप (Closed-form) समीकरणों के लिए उपयोगी।पुनरावर्ती एल्गोरिदम (Recursive functions) के लिए उपयुक्त

9. विरहाङ्क-फाइबोनैचि अनुक्रम (Virahānka-Fibonacci Sequence)

9. विरहाङ्क-फाइबोनैचि अनुक्रम (Virahānka-Fibonacci Sequence)

इतिहास की एक महानतम गणितीय खोज का संबंध भारत के प्राचीन छंद-शास्त्र (Prosody) से है

भारतीय उद्गम और इतिहास

संस्कृत और प्राकृत काव्य परंपरा में छंदों की रचना दो प्रकार के अक्षरों से होती थी: लघु (L – $1$ मात्रा) और गुरु (G – $2$ मात्राएँ) । आचार्य पिंगल (लगभग 200 ईसा पूर्व) के कार्यों के बाद, आचार्य विरहाङ्क (लगभग छठी से आठवीं शताब्दी ईस्वी) ने अपने ग्रंथ वृत्तजातिसमुच्चय (Vṛttajātisamuccaya) में एक अत्यंत महत्वपूर्णCombinatorics समस्या को हल किया :

“कुल $n$ मात्राओं वाले कितने भिन्न छंद निर्मित किए जा सकते हैं?”

उन्होंने स्पष्ट किया कि $n$ मात्राओं वाले छंदों के कुल संयोजनों की संख्या ($V_n$), $n-1$ मात्राओं के संयोजनों (जिनके अंत में लघु ‘L’ जोड़ दिया जाए) और $n-2$ मात्राओं के संयोजनों (जिनके अंत में गुरु ‘G’ जोड़ दिया जाए) के योग के बराबर होती है :

$$V_{1} = 1, \quad V_{2} = 2, $$$$\quad V_{n} = V_{n-1} + V_{n-2} $$ जहाँ $$ n \ge 3)$$

इस नियम से उत्पन्न होने वाली श्रृंखला निम्नलिखित है :

$$1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89, \dots$$

इस अनुक्रम का विस्तार से अध्ययन जैन विद्वान गोपाल (1135 ईस्वी) और आचार्य हेमचन्द्र (1150 ईस्वी) ने किया था । इसके लगभग 50 वर्ष बाद, इतालवी गणितज्ञ लियोनार्डो ऑफ पीसा (फाइबोनैचि) ने वर्ष 1202 में अपनी पुस्तक लिबर अबाची (Liber Abaci) में खरगोशों की जनसांख्यिकी वृद्धि के उदाहरण के माध्यम से इसे पश्चिमी विश्व में प्रस्तुत किया

स्वर्ण अनुपात (Golden Ratio) और प्रकृति में उपस्थिति

जैसे-जैसे विरहाङ्क अनुक्रम के क्रमिक पदों का अनुपात निकाला जाता है ($\frac{V_n}{V_{n-1}}$), वह अनुपात एक चमत्कारी स्थिरांक की ओर अग्रसर होता है जिसे स्वर्ण अनुपात (Golden Ratio – $\phi$) कहा जाता है :

$$\phi = \lim_{n \to \infty} $$$$\frac{V_n}{V_{n-1}} \approx 1.6180339887\dots$$

यह स्वर्ण अनुपात और विरहाङ्क स्पाइरल प्रकृति में हर जगह दिखाई देता है:

  • सूर्यमुखी के फूलों के चक्रदार पैटर्न में बीजों की संख्या ।
  • अनानास की बाहरी सतह की सर्पिलाकार रेखाएँ ।
  • शंख और विभिन्न सीपों के आंतरिक ज्यामितीय संरेखण।
  • शास्त्रीय संगीत की रचनाओं और वास्तुकला में सौंदर्य संतुलन।

10. समांतर श्रेणी (Arithmetic Progression – AP)

10. समांतर श्रेणी (Arithmetic Progression - AP)

समांतर श्रेणी (AP) संख्याओं का एक ऐसा विशेष अनुक्रम है, जिसमें प्रत्येक अगला पद अपने पिछले पद में एक निश्चित संख्या जोड़कर प्राप्त किया जाता है

गणितीय परिभाषा

यदि अनुक्रम का प्रथम पद $a$ और क्रमिक पदों का निश्चित अंतर (सार्वअंतर) $d$ हो, तो अनुक्रम इस प्रकार व्यवस्थित होता है :

$$a, \quad a+d, \quad a+2d, $$$$\quad a+3d, \quad \dots, \quad a+(n-1)d$$

सार्वअंतर सकारात्मक ($d > 0$), नकारात्मक ($d < 0$), या शून्य ($d = 0$) हो सकता है

$n$-वें पद का सामान्य सूत्र व्युत्पादन

  • प्रथम पद ($t_1$): $a = a + (1-1)d$
  • द्वितीय पद ($t_2$): $a + d = a + (2-1)d$
  • तृतीय पद ($t_3$): $a + 2d = a + (3-1)d$ तार्किक रूप से, $n$-वें स्थान पर स्थित पद का मान निम्नलिखित होगा : $$t_n = a + (n-1)d$$

11. AP सूत्र शीट (AP Formula Sheet)

समांतर श्रेणी के प्रश्नों को तीव्रता से हल करने के लिए प्रमुख सूत्र निम्नानुसार हैं :

अभीष्ट मानगणितीय सूत्रचरों का विवरण
प्रथम पद$a$अनुक्रम का पहला मान
सार्वअंतर$d = t_n – t_{n-1}$ क्रमिक पदों का निश्चित अंतर
$n$-वाँ पद$t_n = a + (n-1)d$ $n$-वें पद का स्पष्ट मान
पदों की संख्या$n = \frac{t_n – a}{d} + 1$श्रेणी में कुल पदों की संख्या ज्ञात करने के लिए
पुनरावर्ती रूप$t_1 = a, \quad t_n = t_{n-1} + d \quad (n \ge 2)$ पिछले पद के संदर्भ में एपी का नियम

12. समांतर श्रेणी का दृश्यीकरण (Visualising AP)

समांतर श्रेणी को ग्राफ पेपर पर प्रदर्शित करने से इसके और निर्देशांक ज्यामिति के बीच एक सुंदर अंतर्संबंध प्रकट होता है

आलेखीय निरूपण और सरल रेखा

यदि हम समांतर श्रेणी के क्रमित युग्मों $(n, t_n)$ को कार्तीय समतल (Cartesian plane) पर प्लॉट करें, तो प्राप्त होने वाले बिंदु हमेशा एक सरल रेखा पर स्थित होंगे । यदि हम $t_n = a + (n-1)d$ को सरल करें:

$$t_n = dn + (a – d)$$

यह समीकरण रैखिक फलन $y = mx + c$ के समरूप है, जहाँ:

  • प्रवणता (Slope – $m$) = सार्वअंतर $d$
  • $y$-अंतःखंड ($c$) = $a – d$

अतः, आलेख का रैखिक व्यवहार सीधे दर्शाता है कि पदों की वृद्धि दर स्थिर है

13. AP के लिए पुनरावर्ती नियम

समांतर श्रेणी को स्पष्ट रूप के अतिरिक्त पुनरावर्ती रूप में भी लिखा जा सकता है :

$$t_1 = a, \quad t_n = $$$$t_{n-1} + d \quad (n \ge 2)$$

उदाहरण: अनुक्रम $2, 5, 8, 11, \dots$ के लिए:

  • स्पष्ट नियम: $t_n = 2 + (n-1)3 = 3n – 1$
  • पुनरावर्ती नियम: $t_1 = 2, \quad t_n = $$t_{n-1} + 3 \quad (n \ge 2)$

14. प्रथम $n$ प्राकृतिक संख्याओं का योग

प्रथम $n$ प्राकृतिक संख्याओं के योगफल का निर्धारण गणितीय विश्लेषण की एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है

ऐतिहासिक संदर्भ: आर्यभट्ट और कार्ल फ्रेडरिक गॉस

इस सूत्र का सबसे प्राचीन लिखित प्रमाण महान भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट द्वारा रचित ग्रंथ आर्यभटीय (499 ईस्वी) के द्वितीय अध्याय के 19वें श्लोक में मिलता है । बाद में, पश्चिमी विश्व में 18वीं शताब्दी में बालक कार्ल फ्रेडरिक गॉस ने अपनी प्राथमिक कक्षा में शिक्षक द्वारा $1$ से $100$ तक का योग निकालने के लिए दिए गए कार्य को इसी अवधारणा के माध्यम से कुछ ही क्षणों में हल कर दिया था

बीजगणितीय व्युत्पादन

मान लेते हैं कि प्रथम $n$ प्राकृतिक संख्याओं का योग $S_n$ है :

$$S_n = 1 + 2 + 3 + $$$$\dots + (n-1) + n $$ — (समीकरण 1)

इसी योग को विपरीत क्रम में लिखने पर :

$$S_n = n + (n-1) + (n-2) + \dots + 2 + 1 $$— (समीकरण 2)

दोनों समीकरणों का ऊर्ध्वाधर योग करने पर :

$$2S_n = (n+1) + (n+1) + (n+1) + $$$$\dots + (n+1) $$ [n बार]

$$2S_n = n(n+1)$$

$$S_n = \frac{n(n+1)}{2}$$

ज्यामितीय एवं सचित्र प्रमाण

यदि हम वृत्ताकार डॉट्स (Dots) के त्रिकोणीय विन्यास को देखें, तो $1 + 2 + 3 + \dots + n$ डॉट्स मिलकर एक सीढ़ीदार त्रिभुजाकार आकृति बनाते हैं । यदि ऐसे दो समान त्रिकोणीय समूहों को आपस में जोड़ दिया जाए, तो वे $n$ पंक्तियों और $n+1$ स्तंभों वाले एक आयत का निर्माण करते हैं, जिसमें कुल डॉट्स की संख्या $n(n+1)$ होती है । चूँकि हमने दो समान आकृतियों को जोड़ा था, अतः एकल त्रिभुज का योग $\frac{n(n+1)}{2}$ होगा

15. त्रिभुजीय संख्याएँ (Triangular Numbers)

15. त्रिभुजीय संख्याएँ (Triangular Numbers)

त्रिभुजीय संख्याएँ वे संख्याएँ हैं जो बिंदुओं के समबाहु त्रिकोणीय विन्यासों को प्रदर्शित करती हैं । इनका स्पष्ट नियम प्राकृतिक संख्याओं के योग के सूत्र पर ही आधारित है :

$$t_n = \frac{n(n+1)}{2}$$

प्रमुख गुणधर्म

  1. दो क्रमिक त्रिभुजीय संख्याओं का योग हमेशा एक पूर्ण वर्ग होता है:$$t_{n-1} + t_n = \frac{(n-1)n}{2} $$$$+ \frac{n(n+1)}{2} =$$$$ \frac{n^2 – n + n^2 + n}{2} =$$$$ \frac{2n^2}{2} = n^2$$
  2. अनुप्रयोग: इनका उपयोग संयोजन शास्त्र (Combinatorics) में हस्तमिलाप (handshake) समस्याओं और नेटवर्क नोड्स के बीच संभावित कनेक्शनों की संख्या निर्धारित करने में किया जाता है।

16. गुणोत्तर श्रेणी (Geometric Progression – GP)

गुणोत्तर श्रेणी (GP) संख्याओं का एक ऐसा अनुक्रम है, जिसमें प्रथम पद के बाद आने वाले प्रत्येक पद को पिछले पद में एक निश्चित संख्या गुणा करके प्राप्त किया जाता है

गणितीय परिभाषा

यदि श्रेणी का प्रथम पद $a$ और क्रमिक पदों का निश्चित गुणांक (सार्वअनुपात) $r$ हो, तो श्रेणी का स्वरूप इस प्रकार व्यवस्थित होता है :

$$a, \quad ar, \quad ar^2, $$$$\quad ar^3, \quad \dots, \quad ar^{n-1}$$

सार्वअनुपात का मान $r = \frac{t_n}{t_{n-1}}$ द्वारा निकाला जाता है

$n$-वें पद का सूत्र व्युत्पादन

  • प्रथम पद ($t_1$): $a = a \cdot r^{1-1}$
  • द्वितीय पद ($t_2$): $ar = a \cdot r^{2-1}$
  • तृतीय पद ($t_3$): $ar^2 = a \cdot r^{3-1}$ अतः, $n$-वें पद का सामान्य स्पष्ट नियम निम्नलिखित है : $$t_n = ar^{n-1}$$

17. GP सूत्र शीट (GP Formula Sheet)

गुणोत्तर श्रेणी के प्रश्नों को सुगमता से हल करने के लिए प्रमुख सूत्र निम्नानुसार हैं :

अभीष्ट मानगणितीय सूत्रविवरण
प्रथम पद$a$अनुक्रम का आरंभिक पद
सार्वअनुपात$r = \frac{t_n}{t_{n-1}}$ क्रमिक पदों के विभाजन से प्राप्त मान
$n$-वाँ पद$t_n = ar^{n-1}$ $n$-वें पद का स्पष्ट मान
पुनरावर्ती रूप$t_1 = a, \quad t_n = r \cdot t_{n-1} \quad (n \ge 2)$ पिछले पद के संदर्भ में गुणोत्तर श्रेणी का नियम

18. AP बनाम GP: तुलनात्मक मीमांसा

गणित में समांतर श्रेणी (AP) और गुणोत्तर श्रेणी (GP) के बीच मूलभूत अंतर को स्पष्ट रूप से समझना अत्यंत आवश्यक है :

तुलना का बिंदुसमांतर श्रेणी (AP)गुणोत्तर श्रेणी (GP)
मूल अवधारणापदों में समान संख्या जोड़ी जाती है पदों में समान संख्या गुणा की जाती है
मुख्य संकेतकसार्वअंतर ($d = t_n – t_{n-1}$) सार्वअनुपात ($r = \frac{t_n}{t_{n-1}}$)
सामान्य रूप$a, a+d, a+2d, \dots$ $a, ar, ar^2, \dots$
$n$-वें पद का सूत्र$t_n = a + (n-1)d$ $t_n = ar^{n-1}$
आलेख का आकारसदैव एक सरल रेखा बनती है एक तीव्र गति वाला वक्र (exponential curve) बनता है
वृद्धि की प्रकृतिरैखिक और नियंत्रित वृद्धि अत्यधिक तीव्र घातीय वृद्धि
पुनरावर्ती संबंध$t_n = t_{n-1} + d$ $t_n = r \cdot t_{n-1}$
वास्तविक उदाहरणदूरीवार टैक्सी का किराया, सीधी वार्षिक वेतन वृद्धि जीवाणुओं का विभाजन, कागज़ को बार-बार मोड़ने पर परतों की संख्या

19. फ्रैक्टल्स (Fractals) और ज्यामितीय प्रगतियाँ

19. फ्रैक्टल्स (Fractals) और ज्यामितीय प्रगतियाँ

प्रकृति की ज्यामिति केवल समतल आकृतियों तक ही सीमित नहीं है; इसमें जटिल पुनरावर्ती पैटर्नों का गहरा योगदान है जिन्हें फ्रैक्टल्स (Fractals) कहा जाता है

सिएरपिंस्की त्रिभुज (Sierpiński Triangle)

इसकी रचना एक समबाहु त्रिभुज (स्टेज 0) से शुरू होती है । इसके पक्षों के मध्य बिंदुओं को मिलाकर चार छोटे त्रिभुज बनाए जाते हैं और केंद्रीय त्रिभुज को हटा दिया जाता है (स्टेज 1) । यह पुनरावर्ती प्रक्रिया बची हुई काली आकृतियों पर बार-बार दोहराई जाती है

  • काले त्रिभुजों की संख्या का अनुक्रम: स्टेज $0$ में $1$, स्टेज $1$ में $3$, स्टेज $2$ में $9$, स्टेज $3$ में $27$, स्टेज $n$ में $3^n$ । यह $r = 3$ वाली गुणोत्तर श्रेणी है ।
  • काले क्षेत्र का क्षेत्रफल: यदि स्टेज $0$ का क्षेत्रफल $1$ हो: स्टेज $$ 1 = \frac{3}{4}, \quad$$ स्टेज $$ 2 = \left(\frac{3}{4}\right)^2, \quad \dots, \quad $$ स्टेज $$ n = \left(\frac{3}{4}\right)^n$$ चूँकि $\frac{3}{4} < 1$, जैसे-जैसे $n \to \infty$, कुल क्षेत्रफल लगभग शून्य हो जाता है ।

सिएरपिंस्की वर्गाकार कालीन (Sierpiński Square Carpet)

एक वर्गाकार शीट से शुरू करके उसे $9$ छोटे वर्गों में विभाजित किया जाता है और केंद्रीय वर्ग को हटा दिया जाता है

  • लाल वर्गों की संख्या का अनुक्रम: स्टेज $0$ में $1$, स्टेज $1$ में $8$, स्टेज $2$ में $64$, स्टेज $3$ में $512$ । यह $r = 8$ वाली गुणोत्तर श्रेणी है ।
  • बचा हुआ क्षेत्रफल: प्रत्येक स्टेज में क्षेत्रफल का $\frac{8}{9}$ भाग ही शेष रहता है । स्टेज $n$ में क्षेत्रफल $s_n = \left(\frac{8}{9}\right)^n$ होता है ।

20. GP का दृश्यीकरण (Visualising GP)

जब हम गुणोत्तर श्रेणी के पदों को आलेख पर प्लॉट करते हैं, तो वे कभी भी सरल रेखा पर स्थित नहीं होते

घातीय वक्र और तीव्र वृद्धि

$(n, t_n)$ आलेख पर बिंदु एक तीव्र वक्र का निर्माण करते हैं जो घातीय वृद्धि (Exponential Growth) या घातीय ह्रास (Exponential Decay) को प्रदर्शित करता है

  • यदि $r > 1$ हो, तो वक्र ऊपर की ओर अत्यंत तीव्रता से उठता है।
  • यदि $0 < r < 1$ हो, तो वक्र नीचे की ओर गिरता हुआ लगभग $x$-अक्ष को स्पर्श करने लगता है (जैसे कि उछलती हुई गेंद की ऊँचाई का आलेख) ।

यह रैखिक वृद्धि (समांतर श्रेणी) की तुलना में बहुत भिन्न है, जहाँ वृद्धि की दर सदैव नियंत्रित रहती है

21. वास्तविक जीवन में अनुप्रयोग

अनुक्रम और श्रेणियों के सिद्धांत विभिन्न व्यावहारिक क्षेत्रों में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करते हैं:

  1. वित्तीय योजना और बैंकिंग: चक्रवृद्धि ब्याज, भविष्य निधि मूल्य (PF) और मासिक ऋण किश्तों (EMI) का निर्धारण श्रेणियों के व्यापक अनुप्रयोग से ही संभव हो पाता है।
  2. जनसंख्या वृद्धि और जीव विज्ञान: बैक्टीरिया की वृद्धि, महामारी विज्ञान में संक्रमितों की संख्या की वृद्धि घातीय प्रारूप (GP) का पालन करती है ।
  3. ध्वनिकी और संगीत सिद्धांत: संगीत के सप्तकों में कंपन की आवृत्तियाँ ज्यामितीय श्रेणी का पालन करती हैं 。
  4. सर्च इंजन और डेटा प्रोसेसिंग: गूगल का सर्च एल्गोरिदम और विभिन्न डेटा संपीड़न (Data Compression) तकनीकें द्विआधारी पैटर्नों का उपयोग करती हैं।

22. सम्पूर्ण सूत्र पत्रक (Complete Formula Sheet)

विद्यार्थियों की त्वरित पुनरावृत्ति के लिए सम्पूर्ण अध्याय के सूत्र यहाँ एकीकृत किए गए हैं :

अध्याय उप-विषयप्रमुख सूत्रसंकेतार्थ / उपयोग
अनुक्रम पद$t_n$पद का निरूपण
समांतर श्रेणी $n$-वाँ पद$t_n = a + (n-1)d$समांतर श्रेणी का स्पष्ट सूत्र
समांतर श्रेणी सार्वअंतर$d = t_n – t_{n-1}$क्रमिक पदों का अंतर
प्रथम $n$ प्राकृतिक संख्याओं का योग$S_n = \frac{n(n+1)}{2}$त्रिभुजीय संख्याओं का भी सूत्र
प्रथम $n$ विषम संख्याओं का योग$S_n = n^2$क्रमिक विषम योग का सूत्र
गुणोत्तर श्रेणी $n$-वाँ पद$t_n = ar^{n-1}$गुणोत्तर श्रेणी का स्पष्ट सूत्र
गुणोत्तर श्रेणी सार्वअनुपात$r = \frac{t_n}{t_{n-1}}$क्रमिक पदों का अनुपात
सिएरपिंस्की त्रिभुज (काले त्रिभुज)$t_n = 3^n$काले आकृतियों की संख्या
सिएरपिंस्की त्रिभुज (क्षेत्रफल)$S_n = \left(\frac{3}{4}\right)^n$बचे हुए भाग का क्षेत्रफल

23. अध्याय का माइंड मैप (Chapter Mind Map)

                            [ अनुक्रम एवं श्रेणियाँ ]
                                       |
       +-------------------------------+-------------------------------+
       |                               |                               |
  [ अनुक्रम के प्रकार ]           [ स्पष्ट बनाम पुनरावर्ती ]      [ विशेष अनुक्रम ]
  - परिमित अनुक्रम                - स्पष्ट: tn = f(n)              - विरहाङ्क-फाइबोनैचि
  - अपरिमित अनुक्रम              - पुनरावर्ती: tn = f(tn-1)       - त्रिभुजीय संख्याएँ
                                                                  - वर्ग संख्याएँ

24. अध्याय अवधारणा मानचित्र (Chapter Concept Map)

अनुक्रम (Ordered List) ---> नियम (Rules) 
                             |
         +-------------------+-------------------+
         |                                       |
    स्पष्ट नियम (Explicit)               पुनरावर्ती नियम (Recursive)
         |                                       |
    +----+----+                             +----+----+
    |         |                             |         |
 समांतर श्रेणी  गुणोत्तर श्रेणी            समांतर श्रेणी  गुणोत्तर श्रेणी
   (AP)       (GP)                            (AP)       (GP)
    |         |                             |         |
tn=a+(n-1)d  tn=ar^(n-1)                   tn=tn-1+d  tn=r*tn-1

25. एनसीईआरटी समाधान (NCERT Solutions)

अभ्यास प्रश्नावली 8.1 (Exercise Set 8.1)

प्रश्न 1. निम्नलिखित अनुक्रमों के प्रथम पाँच पद ज्ञात कीजिए जिनका $n$-वाँ पद निम्नलिखित द्वारा दिया गया है:

(i) $t_n = 3n – 4$

हल: समीकरण में $n = 1, 2, 3, 4, 5$ रखने पर :

  • $n=1 \implies t_1 = 3(1) – 4 = -1$
  • $n=2 \implies t_2 = 3(2) – 4 = 2$
  • $n=3 \implies t_3 = 3(3) – 4 = 5$
  • $n=4 \implies t_4 = 3(4) – 4 = 8$
  • $n=5 \implies t_5 = 3(5) – 4 = 11$
  • उत्तर: प्रथम पाँच पद: $-1, 2, 5, 8, 11$ ।

(ii) $t_n = 2 – 5n$ हल: $n = 1, 2, 3, 4, 5$ प्रतिस्थापित करने पर :

  • $n=1 \implies t_1 = 2 – 5(1) = -3$
  • $n=2 \implies t_2 = 2 – 5(2) = -8$
  • $n=3 \implies t_3 = 2 – 5(3) = -13$
  • $n=4 \implies t_4 = 2 – 5(4) = -18$
  • $n=5 \implies t_5 = 2 – 5(5) = -23$
  • उत्तर: प्रथम पाँच पद: $-3, -8, -13, -18, -23$ ।

(iii) $t_n = n^2 – 2n + 3$ (जहाँ $n \ge 1$)

हल: $n = 1, 2, 3, 4, 5$ प्रतिस्थापित करने पर :

  • $n=1 \implies t_1 = 1^2 – 2(1) + 3 = 2$
  • $n=2 \implies t_2 = 2^2 – 2(2) + 3 = 3$
  • $n=3 \implies t_3 = 3^2 – 2(3) + 3 = 6$
  • $n=4 \implies t_4 = 4^2 – 2(4) + 3 = 11$
  • $n=5 \implies t_5 = 5^2 – 2(5) + 3 = 18$
  • उत्तर: प्रथम पाँच पद: $2, 3, 6, 11, 18$ ।

प्रश्न 2. अनुक्रम $t_n = 5n – 3$ ($n \ge 1$) के लिए 10वाँ और 15वाँ पद ज्ञात कीजिए।

हल:

  1. 10वें पद के लिए ($n = 10$):$$t_{10} = 5(10) – 3 = 50 – 3 = 47$$
  2. 15वें पद के लिए ($n = 15$):$$t_{15} = 5(15) – 3 = 75 – 3 = 72$$
  3. उत्तर: 10वाँ पद $47$ और 15वाँ पद $72$ है ।

प्रश्न 3. निर्धारित कीजिए कि क्या $97$ और $172$ अनुक्रम $t_n = 5n – 3$ ($n \ge 1$) के पद हैं।

हल:

  1. $97$ के लिए जाँच:$$5n – 3 = 97 \implies 5n = 100 \implies n = 20$$ चूँकि $20$ एक प्राकृतिक संख्या है, अतः $97$ इस अनुक्रम का 20वाँ पद है ।
  2. $172$ के लिए जाँच:$$5n – 3 = 172 \implies 5n = 175 \implies n = 35$$ चूँकि $35$ एक प्राकृतिक संख्या है, अतः $172$ इस अनुक्रम का 35वाँ पद है । उत्तर: दोनों संख्याएँ ($97$ और $172$) इस अनुक्रम के पद हैं ।

प्रश्न 4. अनुक्रम $t_n = 5n – 3$ ($n \ge 1$) का कौन-सा पद $607$ है?

हल: मान लेते हैं कि $n$-वाँ पद $607$ है:

$$5n – 3 = 607 \implies 5n = 610 \implies n = 122$$

उत्तर: $607$ इस अनुक्रम का 122वाँ पद है

प्रश्न 5. एक अनुक्रम पुनरावर्ती नियम $t_1 = -5, t_{n+1} = t_n + 3$ ($n \ge 1$) द्वारा दिया गया है। इसके प्रथम पाँच पद ज्ञात कीजिए। क्या $52$ इस अनुक्रम का पद है? यदि हाँ, तो कौन-सा?

हल:

  1. प्रथम पाँच पद ज्ञात करना:
    • $t_1 = -5$
    • $t_2 = t_1 + 3 = -5 + 3 = -2$
    • $t_3 = t_2 + 3 = -2 + 3 = 1$
    • $t_4 = t_3 + 3 = 1 + 3 = 4$
    • $t_5 = t_4 + 3 = 4 + 3 = 7$ प्रथम पाँच पद: $-5, -2, 1, 4, 7$ ।
  2. $52$ की अस्तित्व जाँच: यह एक समांतर श्रेणी है जिसका प्रथम पद $a = -5$ और सार्वअंतर $d = 3$ है । स्पष्ट सूत्र: $$t_n = a + (n-1)d = -5 + (n-1)3 $$$$= 3n – 8$$ अब समीकरण को हल करने पर: $$3n – 8 = 52 \implies 3n = 60 \implies n = 20$$
  3. उत्तर: प्रथम पाँच पद $-5, -2, 1, 4, 7$ हैं और $52$ इस अनुक्रम का 20वाँ पद है ।

प्रश्न 6. यदि $T_1 = 1, T_2 = 2, T_3 = 4$ और $T_n = T_{n-1} + T_{n-2} + T_{n-3}$ ($n \ge 4$) हो, तो $T_4, T_5, T_6, T_7$ और $T_8$ के मान ज्ञात कीजिए।

हल:

  • $T_4 = T_3 + T_2 + T_1 = 4 + 2 + 1 = 7$
  • $T_5 = T_4 + T_3 + T_2 = 7 + 4 + 2 = 13$
  • $T_6 = T_5 + T_4 + T_3 = 13 + 7 + 4 = 24$
  • $T_7 = T_6 + T_5 + T_4 = 24 + 13 + 7 = 44$
  • $T_8 = T_7 + T_6 + T_5 = 44 + 24 + 13 = 81$
  • उत्तर: अभीष्ट पद क्रमशः $7, 13, 24, 44, 81$ हैं ।

अभ्यास प्रश्नावली 8.2 (Exercise Set 8.2)

प्रश्न 1. समांतर श्रेणी $3, 8, 13, 18, \dots$ का 10वाँ और 26वाँ पद ज्ञात कीजिए।

हल: यहाँ प्रथम पद $a = 3$, सार्वअंतर $d = 8 – 3 = 5$ है । स्पष्ट सूत्र का उपयोग करने पर :

$$t_n = a + (n-1)d$$

  • 10वाँ पद: $t_{10} = 3 + (10-1)5 = 3 + 45 = 48$
  • 26वाँ पद: $t_{26} = 3 + (26-1)5 = 3 + 125 = 128$
  • उत्तर: 10वाँ पद $48$ और 26वाँ पद $128$ है ।

प्रश्न 2. समांतर श्रेणी $21, 18, 15, \dots$ का कौन-सा पद $-81$ है? क्या $0$ भी इसका कोई पद है? कारण सहित बताइए।

हल: यहाँ $a = 21$, सार्वअंतर $d = 18 – 21 = -3$ है

  1. $-81$ के लिए जाँच:$$-81 = 21 + (n-1)(-3) $$$$\implies -102 = -3(n-1) $$$$\implies n-1 = 34 $$$$\implies n = 35$$ अतः $-81$ इस श्रेणी का 35वाँ पद है ।
  2. $0$ के लिए जाँच:$$0 = 21 + (n-1)(-3) $$$$\implies -21 = -3(n-1) $$$$\implies n-1 = 7 $$$$\implies n = 8$$ अतः $0$ इस श्रेणी का 8वाँ पद है । उत्तर: $-81$ इस श्रेणी का 35वाँ पद है और $0$ इसका 8वाँ पद है ।

प्रश्न 3. समांतर श्रेणी $11, 8, 5, 2, \dots$ का $n$-वाँ पद और इसका पुनरावर्ती नियम लिखिए।

हल: यहाँ $a = 11$, सार्वअंतर $d = 8 – 11 = -3$ है

  1. $n$-वाँ पद (स्पष्ट नियम):$$t_n = a + (n-1)d $$$$= 11 + (n-1)(-3) $$$$= 11 – 3n + 3 = 14 – 3n$$
  2. पुनरावर्ती नियम:$$t_1 = 11, \quad t_n = t_{n-1} – 3 \quad $$ जहाँ $$ n \ge 2)$$
  3. उत्तर: स्पष्ट सूत्र $t_n = 14 – 3n$ और पुनरावर्ती नियम $t_1 = 11, t_n = t_{n-1} – 3$ है ।

प्रश्न 4. एक समांतर श्रेणी में $50$ पद हैं जिसका तीसरा पद $12$ और अंतिम पद $106$ है। इसका 29वाँ पद ज्ञात कीजिए।

हल: दिया गया है कि श्रेणी में कुल $50$ पद हैं, अर्थात अंतिम पद $t_{50} = 106$ है । समीकरणों का निर्माण करने पर :

  1. $t_3 = a + 2d = 12 \quad $ — (समीकरण 1)
  2. $t_{50} = a + 49d = 106 \quad $ — (समीकरण 2) समीकरण (2) में से समीकरण (1) घटाने पर: $$(a + 49d) – (a + 2d) = 106 – 12 $$$$\implies 47d = 94 $$$$\implies d = 2$$ $d$ का मान समीकरण (1) में प्रतिस्थापित करने पर: $$a + 2(2) = 12 $$$$\implies a = 8$$ अब 29वाँ पद ज्ञात करना: $$t_{29} = a + 28d $$$$= 8 + 28(2) $$$$= 8 + 56 = 64$$
  3. उत्तर: श्रेणी का 29वाँ पद $64$ है ।

प्रश्न 5. दो अंकों की कितनी संख्याएँ $3$ से विभाज्य हैं? इन सभी दो अंकों की संख्याओं का योग भी ज्ञात कीजिए।

हल: दो अंकों की संख्याएँ $10$ से $99$ तक होती हैं। इनमें $3$ से विभाज्य संख्याएँ एक समांतर श्रेणी का निर्माण करती हैं :

$$12, \quad 15, \dots, \quad 99$$

यहाँ प्रथम पद $a = 12$, सार्वअंतर $d = 3$, और अंतिम पद $l = 99$ है

  1. पदों की संख्या ($n$) ज्ञात करना:$$99 = 12 + (n-1)3 $$$$\implies 87 = 3(n-1) $$$$\implies n-1 = 29 $$$$\implies n = 30$$
  2. संख्याओं का योग ($S_{30}$) ज्ञात करना:$$S_n = \frac{n}{2}(a + l) $$$$\implies S_{30} = \frac{30}{2}(12 + 99) $$$$= 15 \times 111 = 1665$$ उत्तर: $3$ से विभाज्य दो अंकों की कुल संख्याएँ $30$ हैं और उनका योगफल $1665$ है ।

प्रश्न 6. हरीश ने ₹5,00,000 के वार्षिक वेतन पर कार्य शुरू किया और प्रत्येक वर्ष ₹20,000 की वेतन वृद्धि प्राप्त की। कितने वर्षों के बाद उसका वेतन ₹7,00,000 हो गया?

हल: यहाँ प्रथम पद $a = 5,00,000$, सार्वअंतर $d = 20,000$, और $n$-वाँ पद $t_n = 7,00,000$ है

$$7,00,000 = 5,00,000 + (n-1)20,000$$

$$2,00,000 = (n-1)20,000 $$$$\implies n-1 = 10 $$$$\implies n = 11$$

उत्तर: 11 वर्षों के बाद उसका वेतन ₹7,00,000 हो गया

प्रश्न 7. एक बच्चा कंचों (Marbles) को पंक्तियों में इस प्रकार व्यवस्थित करता है कि पहली पंक्ति में $1$ कंचा, दूसरी में $2$ कंचे, तीसरी में $3$ कंचे और इसी प्रकार कुल $25$ पंक्तियों तक व्यवस्थित करता है। बच्चा कुल कितने कंचों का उपयोग करता है?

हल: यहाँ पंक्तियों की कुल संख्या $n = 25$ है। कंचों की कुल संख्या प्रथम $25$ प्राकृतिक संख्याओं के योग के बराबर है :

$$S_{25} = 1 + 2 + 3 + \dots + 25$$$$ = \frac{n(n+1)}{2} = \frac{25(26)}{2} $$$$= 25 \times 13 = 325$$

उत्तर: बच्चा कुल $325$ कंचों का उपयोग करता है

अभ्यास प्रश्नावली 8.3 (Exercise Set 8.3)

प्रश्न 1. एक गुणोत्तर श्रेणी का 12वाँ पद ज्ञात कीजिए जिसका सार्वअनुपात $2$ है और 8वाँ पद $192$ है।

हल: यहाँ सार्वअनुपात $r = 2$ और 8वाँ पद $t_8 = 192$ दिया गया है । गुणोत्तर श्रेणी का स्पष्ट सूत्र: $t_n = ar^{n-1}$

$$t_8 = a(2)^7 = 192 $$$$\implies a(128) = 192 $$$$\implies a = \frac{192}{128} = \frac{3}{2}$$

अब 12वाँ पद ज्ञात करना:

$$t_{12} = ar^{11} $$$$= \left(\frac{3}{2}\right) \times 2^{11} $$$$= 3 \times 2^{10}$$$$ = 3 \times 1024 = 3072$$

उत्तर: गुणोत्तर श्रेणी का 12वाँ पद $3072$ है।

प्रश्न 2. गुणोत्तर श्रेणी $5, 25, 125, \dots$ के लिए 10वाँ और $n$-वाँ पद ज्ञात कीजिए।

हल: यहाँ प्रथम पद $a = 5$ और सार्वअनुपात $r = \frac{25}{5} = 5$ है

  1. $n$-वाँ पद ज्ञात करना:$$t_n = ar^{n-1} = 5 \cdot (5)^{n-1} = 5^n$$
  2. 10वाँ पद ज्ञात करना:$$t_{10} = 5^{10} = 9765625$$ उत्तर: $n$-वाँ पद $5^n$ और 10वाँ पद $9765625$ है ।

प्रश्न 3. एक अनुक्रम पुनरावर्ती नियम $t_1 = 2, t_{n+1} = 3t_n – 2$ ($n \ge 1$) द्वारा दिया गया है। कौन-सा पद $730$ है?

हल: पुनरावर्ती नियम के आधार पर क्रमिक पद ज्ञात करने पर :

  • $t_1 = 2$
  • $t_2 = 3t_1 – 2 = 3(2) – 2 = 4$
  • $t_3 = 3t_2 – 2 = 3(4) – 2 = 10$
  • $t_4 = 3t_3 – 2 = 3(10) – 2 = 28$
  • $t_5 = 3t_4 – 2 = 3(28) – 2 = 82$
  • $t_6 = 3t_5 – 2 = 3(82) – 2 = 244$
  • $t_7 = 3t_6 – 2 = 3(244) – 2 = 730$ उत्तर: $730$ इस अनुक्रम का 7वाँ पद है ।

प्रश्न 4. गुणोत्तर श्रेणी $2, 6, 18, \dots$ का कौन-सा पद $4374$ है? इसका स्पष्ट और पुनरावर्ती दोनों सूत्र लिखिए।

हल: यहाँ प्रथम पद $a = 2$, सार्वअनुपात $r = \frac{6}{2} = 3$ है।

  1. पद की संख्या ($n$) ज्ञात करना:$$4374 = 2 \cdot (3)^{n-1} \implies 3^{n-1} = 2187$$ चूँकि $3^7 = 2187$, अतः: $$n-1 = 7 \implies n = 8$$
  2. स्पष्ट सूत्र:$$t_n = 2(3)^{n-1}$$
  3. पुनरावर्ती सूत्र:$$t_1 = 2, \quad t_n = 3t_{n-1} \quad (n \ge 2)$$ उत्तर: $4374$ इस श्रेणी का 8वाँ पद है ।

प्रश्न 5. एक गेंद को 80 मीटर की ऊँचाई से गिराया जाता है। प्रत्येक बार जब गेंद ज़मीन से टकराती है, तो वह अपनी पिछली ऊँचाई के 60% तक वापस उछलती है।

(i) 5वें उछाल के बाद गेंद कितनी ऊँचाई तक पहुँचती है? हल: गेंद की क्रमिक ऊँचाइयाँ एक गुणोत्तर श्रेणी का निर्माण करती हैं । पहले उछाल के बाद ऊँचाई $a = 80 \times 0.60 = 48$ मीटर होगी, और सार्वअनुपात $r = 0.60$ होगा। 5वें उछाल के बाद की ऊँचाई:

$$t_5 = ar^{4} = 48 \times (0.60)^4 $$$$= 48 \times 0.1296 = 6.2208 $$ मीटर

उत्तर: 5वें उछाल के बाद गेंद $6.2208$ मीटर की ऊँचाई तक पहुँचती है।

(ii) 6ठी बार ज़मीन से टकराने तक गेंद द्वारा तय की गई कुल ऊर्ध्वाधर (vertical) दूरी क्या है? हल: गेंद नीचे गिरती है और फिर ऊपर उठती है । अतः कुल दूरी = (6 बार नीचे गिरने की दूरियों का योग) + (5 बार ऊपर उठने की दूरियों का योग) :

  • नीचे गिरने की दूरियाँ: $80, 48, 28.8, 17.28, 10.368, 6.2208$
  • ऊपर उठने की दूरियाँ: $48, 28.8, 17.28, 10.368, 6.2208$ कुल तय की गई दूरी: कुल दूरी $ = 80 + 2 \times (48 + 28.8 + 17.28 $$+ 10.368 + 6.2208)$ कुल दूरी $ = 80 + 2 \times (110.6688) = $$ 80 + 221.3376 = 301.3376 मीटर $उत्तर: 6ठी बार टकराने तक गेंद द्वारा तय की गई कुल दूरी $301.3376$ मीटर है।

प्रश्न 6. श्रेणी $2, 2\sqrt{2}, 4, \dots$ का कौन-सा पद $128$ है?

हल: यहाँ प्रथम पद $a = 2$ और सार्वअनुपात $r = \frac{2\sqrt{2}}{2} = \sqrt{2}$ है । मान लेते हैं कि $n$-वाँ पद $128$ है :

$$t_n = ar^{n-1} $$$$\implies 128 = 2(\sqrt{2})^{n-1}$$

$$64 = (2^{1/2})^{n-1} $$$$\implies 2^6 = 2^{\frac{n-1}{2}}$$

चूँकि आधार समान हैं, अतः घातांकों की तुलना करने पर :

$$6 = \frac{n-1}{2} $$$$\implies 12 = n-1 $$$$\implies n = 13$$

उत्तर: $128$ इस श्रेणी का 13वाँ पद है

प्रश्न 7. सिएरपिंस्की वर्गाकार कालीन (Sierpiński Square Carpet) की आकृतियों को देखिए:

(i) स्टेज 0 से 3 तक लाल/रंगेन वर्गों की कुल संख्याएँ क्या हैं?

उत्तर: स्टेज $0 = 1$, स्टेज $1 = 8$, स्टेज $2 = 64$, स्टेज $3 = 512$ ।

(ii) स्टेज 4 और 5 में रंगेन वर्गों की संख्या का अनुमान लगाइए।

उत्तर: स्टेज $4 = 8^4 = 4096$, स्टेज $5 = 8^5 = 32768$ ।

(iii) स्टेज $n$ पर रंगेन वर्गों की संख्या का नियम लिखिए (स्पष्ट एवं पुनरावर्ती सूत्र)।

उत्तर: स्पष्ट सूत्र: $t_n = 8^n$ । पुनरावर्ती सूत्र: $t_0 = 1, t_n = 8 \cdot t_{n-1}$ ।

(iv) यदि स्टेज 0 का क्षेत्रफल $1$ वर्ग इकाई हो, तो स्टेज 1, 2, 3, 4, 5 का क्षेत्रफल क्या होगा? इसका सूत्र लिखिए।

उत्तर: प्रत्येक स्टेज में पूर्ववर्ती क्षेत्रफल का $\frac{8}{9}$ भाग शेष रहता है ।

  • स्टेज $1 = \frac{8}{9}$
  • स्टेज $2 = \left(\frac{8}{9}\right)^2 = \frac{64}{81}$
  • स्टेज $3 = \left(\frac{8}{9}\right)^3 = \frac{512}{729}$
  • स्टेज $4 = \left(\frac{8}{9}\right)^4 = \frac{4096}{6561}$
  • स्टेज $5 = \left(\frac{8}{9}\right)^5 = \frac{32768}{59049}$
  • स्पष्ट सूत्र: $s_n = \left(\frac{8}{9}\right)^n$
  • पुनरावर्ती सूत्र: $s_0 = 1, s_n = \left(\frac{8}{9}\right)s_{n-1}$

अध्याय के अंत में दिए गए अभ्यास प्रश्न (End-of-Chapter Exercises)

प्रश्न 1. उस समांतर श्रेणी का 31वाँ पद ज्ञात कीजिए जिसका 11वाँ पद $38$ और 16वाँ पद $73$ है।

हल: समीकरणों का निर्माण करने पर :

  1. $t_{11} = a + 10d = 38 $— (समीकरण 1)
  2. $t_{16} = a + 15d = 73 $— (समीकरण 2) समीकरण (2) में से समीकरण (1) घटाने पर: $$5d = 35 $$$$\implies d = 7$$$d$ का मान समीकरण (1) में प्रतिस्थापित करने पर:$$a + 10(7) = 38 $$$$\implies a = -32$$अब 31वाँ पद ज्ञात करना:$$t_{31} = a + 30d $$$$= -32 + 30(7) $$$$= -32 + 210 = 178$$
  3. उत्तर: समांतर श्रेणी का 31वाँ पद $178$ है।

प्रश्न 2. वह समांतर श्रेणी ज्ञात कीजिए जिसका तीसरा पद $16$ है और 7वाँ पद 5वें पद से $12$ अधिक है।

हल: दिया गया है कि :

  1. $t_3 = a + 2d = 16 \quad $ — (समीकरण 1)
  2. $t_7 = t_5 + 12 $$ \implies (a+6d) = (a+4d) + 12 $$ \implies 2d = 12 $$\implies d = 6$ $d$ का मान समीकरण (1) में रखने पर: $$a + 2(6) = 16 $$ \implies a + 12 = 16 $$\implies a = 4$$अतः श्रेणी के पद क्रमशः: $4, 10, 16, 22, \dots$ होंगे।
  3. उत्तर: अभीष्ट समांतर श्रेणी $4, 10, 16, 22, \dots$ है।

प्रश्न 3. तीन अंकों की कितनी संख्याएँ $7$ से विभाज्य हैं?

हल: तीन अंकों की संख्याएँ $100$ से $999$ तक होती हैं । $7$ से विभाज्य प्रथम संख्या $105$ है और अंतिम संख्या $994$ है । यह एक समांतर श्रेणी है जहाँ $a = 105, d = 7, t_n = 994$

$$t_n = a + (n-1)d$$$$ \implies 994 = 105 + (n-1)7$$

$$889 = 7(n-1)$$$$ \implies n-1 = 127 $$$$\implies n = 128$$

उत्तर: तीन अंकों की कुल $128$ संख्याएँ $7$ से विभाज्य हैं।

प्रश्न 4. $10$ और $250$ के बीच में $4$ के कितने गुणज स्थित हैं?

हल: $10$ और $250$ के बीच प्रथम गुणज $12$ है और अंतिम गुणज $248$ है । यह एक समांतर श्रेणी है जहाँ $a = 12, d = 4, t_n = 248$

$$248 = 12 + (n-1)4 $$$$\implies 236 = 4(n-1) $$$$\implies n-1 = 59 $$$$\implies n = 60$$

उत्तर: $10$ और $250$ के बीच $4$ के कुल $60$ गुणज हैं।

प्रश्न 5. एक ऐसी गुणोत्तर श्रेणी ज्ञात कीजिए जिसके प्रथम दो पदों का योग $-4$ है और 5वाँ पद, तीसरे पद का $4$ गुना है।

हल: दिया गया है कि :

  1. $t_1 + t_2 = -4 $$\implies a + ar = -4 $$\implies a(1+r) = -4 \quad $— (समीकरण 1)
  2. $t_5 = 4 \cdot t_3 $$\implies ar^4 = 4ar^2 $$\implies r^2 = 4 $$\implies r = \pm 2$
  • केस 1: यदि $r = 2$ हो:$$a(1+2) = -4 $$$$\implies 3a = -4 $$$$\implies a = -\frac{4}{3}$$श्रेणी के पद: $-\frac{4}{3}, -\frac{8}{3}, $$ -\frac{16}{3}, \dots$
  • केस 2: यदि $r = -2$ हो:$$a(1-2) = -4 $$$$\implies a(-1) = -4 $$$$\implies a = 4$$श्रेणी के पद: $4, -8, 16, -32, $$\dots$
  • उत्तर: अभीष्ट गुणोत्तर श्रेणी $4, -8, 16, -32, \dots$ अथवा $-\frac{4}{3}, -\frac{8}{3},$$ -\frac{16}{3}, \dots$ है।

प्रश्न 6. संख्या $100$ को क्रमिक प्राकृतिक संख्याओं के योग के रूप में व्यक्त करने के सभी संभावित तरीके ज्ञात कीजिए।

हल: मान लेते हैं कि $100$ को $a$ से शुरू होने वाली $k$ क्रमिक प्राकृतिक संख्याओं के योग के रूप में दर्शाया जाता है :

$$a + (a+1) + \dots + (a+k-1) = 100$$

यह एक समांतर श्रेणी का योगफल है :

$$S_k = \frac{k}{2}[2a + (k-1)1] = 100 $$$$\implies k[2a + k – 1] = 200$$

यहाँ $k$ और $(2a + k – 1)$ के मानों की समता (Parity) भिन्न होनी चाहिए (एक सम और दूसरा विषम), क्योंकि उनका योग $(2a + 2k – 1)$ विषम है। $200$ के विषम गुणनखंड $1, 5, 25$ हैं।

  1. यदि विषम गुणनखंड $5$ हो:
    • माना $k = 5 $$\implies 2a + 5 – 1 = 40$$ \implies 2a + 4 = 40 $$\implies a = 18$ संभावित अनुक्रम: $18 + 19 + 20 + 21 + 22 = 100$
  2. यदि विषम गुणनखंड $25$ हो:
    • माना $k = 8 \implies 2a + 8 – 1 = 25 $$\implies 2a + 7 = 25$$ \implies a = 9$ संभावित अनुक्रम: $9 + 10 + 11 + 12 $$+ 13 + 14 + 15 + 16 = 100$ (यदि $k = 25$ रखें, तो $2a + 24 = 8 $$ \implies a < 0$, जो कि प्राकृतिक संख्या नहीं है)
    • उत्तर: कुल दो तरीके संभव हैं :
  3. $18 + 19 + 20 + 21 + 22$
  4. $9 + 10 + 11 + 12 + $$13 + 14 + 15 + 16$

प्रश्न 7. एक निश्चित जीवाणु संवर्धन (Bacteria Culture) में जीवाणुओं की संख्या प्रत्येक घंटे दोगुनी हो जाती है। यदि प्रारंभ में $30$ जीवाणु उपस्थित थे, तो दूसरे घंटे, चौथे घंटे और $n$-वें घंटे के अंत में कितने जीवाणु उपस्थित होंगे?

हल: प्रारंभ में जीवाणु $a = 30$ हैं। जीवाणुओं की संख्या प्रत्येक घंटे दोगुनी होती है, अतः सार्वअनुपात $r = 2$ है

  • शुरुआत में (समय $0$): $30$
  • दूसरे घंटे के अंत में: $30 \cdot 2^2 = 120$
  • चौथे घंटे के अंत में: $30 \cdot 2^4 = 480$
  • $n$-वें घंटे के अंत में: $30 \cdot 2^n$
  • उत्तर: जीवाणुओं की संख्या क्रमशः $120$ (दूसरे घंटे के अंत में), $480$ (चौथे घंटे के अंत में), और $30 \cdot 2^n$ ($n$-वें घंटे के अंत में) होगी ।

प्रश्न 8. एक समांतर श्रेणी के चौथे और आठवें पदों का योग $24$ है तथा छठे और दसवें पदों का योग $44$ है। समांतर श्रेणी के प्रथम तीन पद ज्ञात कीजिए।

हल: समीकरणों का निर्माण करने पर :

  1. $t_4 + t_8 = 24 $$\implies (a+3d) + (a+7d) = 24 $$\implies 2a + 10d = 24 $$\implies a + 5d = 12 \quad $$ — (समीकरण 1)
  2. $t_6 + t_{10} = 44 $$\implies (a+5d) + (a+9d) = 44 $$\implies 2a + 14d = 44 $$\implies a + 7d = 22 \quad $ — (समीकरण 2) समीकरण (2) में से समीकरण (1) घटाने पर: $$2d = 10 $$$$\implies d = 5$$ $d$ का मान समीकरण (1) में प्रतिस्थापित करने पर: $$a + 5(5) = 12 $$$$\implies a + 25 = 12 $$$$\implies a = -13$$ अब प्रथम तीन पद ज्ञात करना:
  • $t_1 = a = -13$
  • $t_2 = a + d = -13 + 5 = -8$
  • $t_3 = a + 2d = -13 + 10 = -3$
  • उत्तर: समांतर श्रेणी के प्रथम तीन पद क्रमशः $-13, -8, -3$ हैं ।

प्रश्न 9. $n$ का वह न्यूनतम मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए प्रथम $n$ प्राकृतिक संख्याओं का योग $1000$ से अधिक हो जाए।

हल: हमें वह न्यूनतम $n$ ज्ञात करना है जिसके लिए :

$$S_n > 1000 $$$$\implies \frac{n(n+1)}{2} > 1000 $$$$\implies n(n+1) > 2000$$

अनुमान विधि का उपयोग करने पर :

  • यदि $n = 44$ हो: $44 \times 45 $$= 1980 < 2000$
  • यदि $n = 45$ हो: $45 \times 46$$ = 2070 > 2000$ अतः न्यूनतम धनात्मक मान $n = 45$ है।
  • उत्तर: न्यूनतम अभीष्ट मान $n = 45$ है ।

प्रश्न 10. गुणोत्तर श्रेणी $2, 8, 32, \dots$ का कौन-सा पद $131072$ है? इसका स्पष्ट और पुनरावर्ती दोनों सूत्र लिखिए।

हल: यहाँ प्रथम पद $a = 2$, सार्वअनुपात $r = \frac{8}{2} = 4$ है

  1. पद की संख्या ($n$) ज्ञात करना:$$t_n = ar^{n-1} $$$$\implies 131072 = 2 \cdot (4)^{n-1} $$$$\implies 4^{n-1} = 65536$$ चूँकि $4^8 = 65536$, अतः: $$n-1 = 8 $$$$\implies n = 9$$
  2. स्पष्ट सूत्र: $t_n = 2 \cdot (4)^{n-1}$
  3. पुनरावर्ती सूत्र: $t_1 = 2, \quad t_n = 4 \cdot $$ t_{n-1} \quad (n \ge 2)$
  4. उत्तर: $131072$ इस श्रेणी का 9वाँ पद है ।

प्रश्न 11. एक गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम तीन पदों का योग $\frac{13}{12}$ है और उनका गुणनफल $-1$ है। सार्वअनुपात और पदों को ज्ञात कीजिए।

हल: मान लेते हैं कि गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम तीन पद क्रमशः $\frac{a}{r}, a, ar$ हैं

  1. गुणनफल का संबंध:$$\left(\frac{a}{r}\right) \cdot a \cdot (ar) = -1 $$$$\implies a^3 = -1$$$$ \implies a = -1$$
  2. योग का संबंध:$$\frac{-1}{r} – 1 – r = \frac{13}{12}$$$$ \implies -\left(\frac{1}{r} + 1 + r\right) = \frac{13}{12}$$$$\frac{r^2 + r + 1}{r} = -\frac{13}{12} $$$$\implies 12r^2 + 12r + 12 = -13r $$$$\implies 12r^2 + 25r + 12 = 0$$वर्ग समीकरण का गुणनखंड करने पर:$$12r^2 + 16r + 9r + 12 = 0$$$$ \implies 4r(3r+4) + 3(3r+4) = 0 $$$$\implies (4r+3)(3r+4) = 0$$ अतः, $r = -\frac{3}{4}$ या $r = -\frac{4}{3}$ ।
  • यदि $r = -\frac{3}{4}$ हो: पद $\frac{4}{3}, -1, \frac{3}{4}$ होंगे ।
  • यदि $r = -\frac{4}{3}$ हो: पद $\frac{3}{4}, -1, \frac{4}{3}$ होंगे ।
  • उत्तर: सार्वअनुपात $r = -\frac{3}{4}$ या $-\frac{4}{3}$ है और पद क्रमशः $\frac{4}{3}, -1, \frac{3}{4}$ हैं ।

प्रश्न 12. यदि किसी गुणोत्तर श्रेणी के चौथे, दसवें और सोलहवें पद क्रमशः $x, y$ और $z$ हैं, तो सिद्ध कीजिए कि $x, y, z$ भी गुणोत्तर श्रेणी में हैं।

प्रमाण: मान लेते हैं कि गुणोत्तर श्रेणी का प्रथम पद $A$ और सार्वअनुपात $R$ है

  • $x = t_4 = AR^3$
  • $y = t_{10} = AR^9$
  • $z = t_{16} = AR^{15}$ क्रमिक पदों के अनुपातों की गणना करने पर: $$\frac{y}{x} = \frac{AR^9}{AR^3}$$$$ = R^6$$$$\frac{z}{y} = \frac{AR^{15}}{AR^9} $$$$= R^6$$ चूँकि $\frac{y}{x} $$$$= \frac{z}{y} = R^6$ है, अतः क्रमिक पदों का अनुपात समान है । इससे यह अकाट्य रूप से प्रमाणित होता है कि $x, y, z$ भी एक गुणोत्तर श्रेणी (GP) में हैं । (इति सिद्धम)

प्रश्न 13. एक गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम तीन पदों का योग $26$ है, और उनके वर्गों का योग $364$ है। श्रेणी के पदों को ज्ञात कीजिए।

हल: मान लेते हैं कि श्रेणी के प्रथम तीन पद $a, ar, ar^2$ हैं

  1. पदों का योग:$$a(1+r+r^2) = 26 $$ — (समीकरण 1)
  2. वर्गों का योग:$$a^2(1+r^2+r^4) = 364 $$— (समीकरण 2) समीकरण (1) का वर्ग करने पर: $$a^2(1+r+r^2)^2 = 676 \quad $$— (समीकरण 3) समीकरण (3) को समीकरण (2) से विभाजित करने पर:$$\frac{a^2(1+r+r^2)^2}{a^2(1+r^2+r^4)} = \frac{676}{364} $$$$\implies \frac{(1+r+r^2)^2}{(1+r+r^2)(1-r+r^2)} = \frac{13}{7} $$$$ \frac{1+r+r^2}{1-r+r^2} = \frac{13}{7} $$$$\implies 7(1+r+r^2) = $$$$13(1-r+r^2)$$$$ 7 + 7r + 7r^2 = $$$$13 – 13r + 13r^2 $$$$\implies 6r^2 – 20r + 6 = 0 $$$$\implies 3r^2 – 10r + 3 = 0$$वर्ग समीकरण को हल करने पर:$$(3r-1)(r-3) = 0 $$$$\implies r = 3 $$ या $$ r = \frac{1}{3}$$
  • यदि $r = 3$ हो, तो समीकरण (1) से $a(1+3+9) = 26 $$\implies 13a = 26 $$\implies a = 2$ । पद $2, 6, 18$ होंगे ।
  • यदि $r = \frac{1}{3}$ हो, तो $a = 18$ प्राप्त होता है। पद $18, 6, 2$ होंगे।
  • उत्तर: अभीष्ट पद क्रमशः $2, 6, 18$ हैं ।

प्रश्न 14. मान लीजिए $P_1 = 1$, $P_2 = 2$ और $n > 2$ के लिए, $P_n = P_1 + P_2 + \dots $$+ P_{n-1} + 1$ है। $P_1, P_2, \dots, P_8$ के मान ज्ञात कीजिए। क्या आप इसके लिए कोई सरल पुनरावर्ती और स्पष्ट सूत्र लिख सकते हैं?

हल:

  1. मानों की क्रमिक गणना करने पर:
    • $P_1 = 1$
    • $P_2 = 2$
    • $P_3 = P_1 + P_2 + 1 $$= 1 + 2 + 1 = 4$
    • $P_4 = P_1 + P_2 + P_3 + 1 $$= 1 + 2 + 4 + 1 = 8$
    • $P_5 = P_1 + P_2 + P_3 + P_4 + 1 $$= 1 + 2 + 4 + 8 + 1 = 16$ तार्किक रूप से अगले पद क्रमशः: $P_6 = 32$, $P_7 = 64$, $P_8 = 128$ प्राप्त होंगे ।
  2. सरल पुनरावर्ती सूत्र:$$P_n = 2P_{n-1} \quad $$ जहाँ $$ n > 2)$$
  3. स्पष्ट सूत्र:$$P_1 = 1 \text{ और } P_n = 2^{n-2} $$ जहाँ $$ n \ge 2)$$
  4. उत्तर: क्रमिक मान $1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, 128$ हैं। सरल पुनरावर्ती सूत्र $P_n = 2P_{n-1}$ ($n > 2$) और स्पष्ट सूत्र $P_1 = 1, P_n $$= 2^{n-2}$ ($n \ge 2$) है।

प्रश्न 15. मान लीजिए $W_1 = 1$, $W_2 = 2$ और $n > 2$ के लिए, $W_n = W_1 + W_2 + \dots + W_{n-2} + 2$ है। $W_1, W_2, \dots, W_8$ के मान ज्ञात कीजिए। क्या आप इस अनुक्रम को पहचानते हैं?

हल:

  • $W_1 = 1$
  • $W_2 = 2$
  • $W_3 = W_1 + 2 = 1 + 2 = 3$
  • $W_4 = W_1 + W_2 + 2 = 1 + 2 + 2 = 5$
  • $W_5 = W_1 + W_2 + W_3 + 2 $$= 1 + 2 + 3 + 2 = 8$
  • $W_6 = W_1 + W_2 + W_3 + W_4 + 2 $$= 1 + 2 + 3 + 5 + 2 = 13$
  • $W_7 = W_1 + W_2 + W_3 $$+ W_4 + W_5 + 2 $$= 1 + 2 + 3 + 5 + 8 + 2 = 21$
  • $W_8 = $$ W_1 + W_2 + W_3 + W_4 + W_5 + W_6 + 2 $$= 1 + 2 + 3 + 5 + 8 + 13 + 2 = 34$ यह अनुक्रम क्रमशः: $1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, \dots$ है ।
  • उत्तर: अभीष्ट मान क्रमशः $1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34$ हैं। यह ऐतिहासिक विरहाङ्क-फाइबोनैचि अनुक्रम है!

26. पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs)

प्रश्न 1. किसी समांतर श्रेणी का 17वाँ पद उसके 10वें पद से $7$ अधिक है। इसका सार्वअंतर ज्ञात कीजिए।

हल: दिया गया है कि:

$$t_{17} = t_{10} + 7$$

$$(a + 16d) = (a + 9d) + 7 $$$$\implies 16d – 9d = 7 $$$$\implies 7d = 7 $$$$\implies d = 1$$

उत्तर: सार्वअंतर $d = 1$ है।

प्रश्न 2. यदि $k-1, k+3, 3k-1$ समांतर श्रेणी में हैं, तो $k$ का मान ज्ञात कीजिए।

हल: चूँकि ये पद समांतर श्रेणी में हैं, अतः क्रमिक पदों का अंतर समान होगा:

$$(k+3) – (k-1) = (3k-1) – (k+3)$$

$$4 = 2k – 4 $$$$\implies 2k = 8 $$$$\implies k = 4$$

उत्तर: $k = 4$ है।

27. महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1. अनुक्रम $1, 5, 9, 13, \dots$ का स्पष्ट नियम क्या है?

(A) $t_n = 4n – 3$

(B) $t_n = 3n + 1$

(C) $t_n = 4n + 1$

(D) $t_n = 5n – 4$

उत्तर: (A) $t_n = 4n – 3$

स्पष्टीकरण: यह समांतर श्रेणी है जहाँ $a = 1, d = 4$ है । $t_n = 1 + (n-1)4 = 4n – 3$

प्रश्न 2. प्रथम $20$ विषम प्राकृतिक संख्याओं का योग कितना होगा?

(A) 200

(B) 300

(C) 400

(D) 500

उत्तर: (C) 400

स्पष्टीकरण: प्रथम $n$ विषम संख्याओं का योग $n^2$ होता है । यहाँ $n = 20$, अतः $20^2 = 400$

प्रश्न 3. गुणोत्तर श्रेणी $3, 6, 12, 24, \dots$ का 8वाँ पद क्या होगा?

(A) 192

(B) 384

(C) 768

(D) 1536

उत्तर: (B) 384

स्पष्टीकरण: यहाँ $a = 3, r = 2$ है । $t_8 = 3 \cdot$$ 2^{7} = 3 \times 128 = 384$ ।

28. कथन-कारण प्रश्न (Assertion Reason Questions)

निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों में एक कथन (Assertion – A) और उसके बाद एक कारण (Reason – R) दिया गया है। उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए:

(A) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।

(B) A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।

(C) A सत्य है, लेकिन R असत्य है।

(D) A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

प्रश्न 1.

कथन (A): अनुक्रम $2, 4, 8, 16, \dots$ का आलेख एक सरल रेखा नहीं है

कारण (R): गुणोत्तर श्रेणियों के पदों को निरूपित करने वाले बिंदु सरल रेखा पर स्थित नहीं होते हैं

उत्तर: (A) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है

29. केस-आधारित प्रश्न (Case Based Questions)

केस: एक बहुमंजिला भवन की सीढ़ियों को सजाने के लिए एक विशेष त्रिकोणीय विन्यास का उपयोग किया जा रहा है । पहली सीढ़ी पर $1$ गमला, दूसरी पर $3$ गमले, तीसरी पर $6$ गमले और चौथी पर $10$ गमले रखे गए हैं

प्रश्न 1. यह पैटन किस अनुक्रम को प्रदर्शित करता है?

उत्तर: यह प्रसिद्ध त्रिभुजीय संख्याओं के अनुक्रम ($1, 3, 6, 10, \dots$) को प्रदर्शित करता है

प्रश्न 2. 10वीं सीढ़ी पर कुल कितने गमले रखे जाएंगे?

हल: $t_{10} = \frac{10(11)}{2} = 55$ गमले

30. उच्च स्तरीय सोच कौशल प्रश्न (HOTS Questions)

प्रश्न 1. यदि किसी समांतर श्रेणी के $p$-वें पद का $p$ गुना, $q$-वें पद के $q$ गुने के बराबर हो ($p \neq q$), तो सिद्ध कीजिए कि इसका $(p+q)$-वाँ पद शून्य होगा।

हल: दिया गया है कि:

$$p \cdot t_p = q \cdot t_q $$$$\implies p[a + (p-1)d] = q[a + (q-1)d] $$$$ pa + p(p-1)d = qa + q(q-1)d $$$$\implies a(p-q) + [p^2 – p – q^2 + q]d = 0 $$$$ a(p-q) + [(p^2 – q^2) – (p-q)]d = 0$$$ \implies a(p-q) + [(p-q)(p+q) $$- (p-q)]d = 0$

चूँकि $p \neq q$, हम $(p-q)$ से दोनों पक्षों को विभाजित कर सकते हैं:

$$a + (p+q-1)d = 0 $$$$\implies t_{p+q} = 0$$

(इति सिद्धम)

31. योग्यता-आधारित प्रश्न (Competency Based Questions)

प्रश्न 1. एक कंप्यूटर प्रोग्रामर को एक ऐसी डेटा श्रृंखला तैयार करनी है जो प्रत्येक चक्र (cycle) में $1.5$ गुना हो जाती है। यदि श्रृंखला $16$ से प्रारंभ होती है, तो चौथे चक्र के अंत में डेटा का आकार क्या होगा?

हल: यह $a = 16$ और $r = 1.5$ वाली गुणोत्तर श्रेणी है।

चौथे चक्र के अंत में (अर्थात 5वाँ पद):

$$t_5 = ar^4 = 16 \times (1.5)^4 $$$$= 16 \times 5.0625 = 81$$

उत्तर: डेटा का आकार $81$ होगा।

32. ओलंपियाड स्तर के प्रश्न।

प्रश्न 1. समीकरण $x^2 – 3x + A = 0$ के मूल $a$ और $b$ हैं, तथा समीकरण $x^2 – 12x + B = 0$ के मूल $c$ और $d$ हैं। यदि $a, b, c, d$ एक वर्धमान गुणोत्तर श्रेणी में हैं, तो $A$ और $B$ के मान ज्ञात कीजिए।

हल: मान लेते हैं कि मूल $a, ar, ar^2, ar^3$ हैं।

  1. पहले समीकरण से: $a + b = 3 $$\implies a(1+r) = 3$
  2. दूसरे समीकरण से: $c + d = 12 $$\implies ar^2(1+r) = 12$दोनों का विभाजन करने पर:$$\frac{ar^2(1+r)}{a(1+r)} $$$$= \frac{12}{3} $$$$\implies r^2 = 4 $$$$\implies r = 2 $$ चूँकि वर्धमान श्रेणी है, $$ r > 1)$$$r=2$ का मान पहले समीकरण में रखने पर:$$a(1+2) = 3 $$$$ \implies 3a = 3$$$$ \implies a = 1$$अतः मूल क्रमशः $1, 2, 4, 8$ हैं।
  • $A = ab = 1 \times 2 = 2$
  • $B = cd = 4 \times 8 = 32$उत्तर: $A = 2$ और $B = 32$ है।

33. विद्यार्थियों द्वारा की जाने वाली 30+ सामान्य गलतियाँ

  1. AP और GP के सूत्रों को मिश्रित करना: समांतर श्रेणी में गुणा के सूत्र का उपयोग करना ।
  2. $n$ के स्थान पर $n-1$ लिखना भूलना: $t_n = ar^n$ लिख देना ।
  3. सार्वअंतर का गलत चिह्न लेना: घटती एपी में सार्वअंतर को धनात्मक मान लेना ।
  4. $a$ को हमेशा प्रथम दी गई संख्या मानना: कभी-कभी प्रश्न में पदों का क्रम उल्टा होने पर भी $a$ को न बदलना।
  5. पदों की संख्या ($n$) का ऋणात्मक मान स्वीकार कर लेना: यह भूलना कि $n$ हमेशा $\mathbb{N}$ होना चाहिए ।
  6. चक्रवृद्धि ब्याज में साधारण एपी का नियम लगाना।
  7. प्रथम पद को शून्य स्थान (Term 0) मान लेना: अनुक्रम $t_1$ से शुरू होता है, $t_0$ से नहीं ।
  8. गुणोत्तर श्रेणी के सार्वअनुपात के लिए $t_{n-1}/t_n$ कर देना: विभाजन का क्रम उल्टा कर देना ।
  9. पुनरावर्ती सूत्र में आधारभूत मान (Seed Value) न लिखना।
  10. सिएरपिंस्की कालीन के क्षेत्रफल में $\frac{8}{9}$ की जगह $\frac{1}{9}$ का गुणा करना ।
  11. भिन्नों के अंतर की गणना में लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) न लेना।
  12. दशमलव श्रेणियों के गुणा में दशमलव बिंदु की त्रुटियाँ करना।
  13. गेंद के उछाल वाले प्रश्नों में केवल ऊपर जाने की दूरी जोड़ना, नीचे गिरने की नहीं ।
  14. विषम योगफल में सम संख्याओं का नियम लगा देना।
  15. त्रिभुजीय संख्या और वर्ग संख्या के पैटर्नों को आपस में मिलाना ।
  16. अभाज्य संख्या श्रेणी में स्पष्ट बीजगणितीय सूत्र खोजने का व्यर्थ प्रयास करना ।
  17. समीकरण हल करते समय अचर पदों का पक्षांतरण करते हुए चिह्नों की गलतियाँ करना।
  18. $t_n$ (पद का मान) और $n$ (पद की स्थिति) में भ्रमित होना ।
  19. अपरिमित श्रेणियों में पदों की संख्या निश्चित मान लेना ।
  20. विरहाङ्क अनुक्रम का आरंभ $1, 2, 3$ से न करके $0, 0, 0$ से कर देना ।
  21. वर्गमूल वाली श्रेणियों के परिमेयकरण में त्रुटि करना ।
  22. वार्षिक वेतन वृद्धि में चक्रवृद्धि श्रेणी का नियम लगाना ।
  23. लघु और गुरु मात्राओं की गणना में भ्रमित होना ।
  24. आलेख बनाते समय $x$-अक्ष पर $t_n$ और $y$-अक्ष पर $n$ को रख देना ।
  25. क्रमिक विषम संख्याओं के योग में बीच में से कोई संख्या छोड़ देना ।
  26. गुणांक स्थिरांक को ही सार्वअनुपात मान लेना बिना विभाजन की जाँच किए।
  27. ज्यामितीय वक्र को आलेख पत्र पर सीधी रेखा बना देना ।
  28. तीन अंकों की विभाज्य संख्याओं की गणना में सीमांत मानों (सीमाओं) की उपेक्षा करना ।
  29. गुणनफल वाले प्रश्नों में तीन पद $a, ar, ar^2$ मानकर गणना को जटिल बनाना (इसके स्थान पर $\frac{a}{r}, a, ar$ मानना सर्वोत्तम है) ।
  30. परीक्षा में बॉक्स के अंदर उत्तर न लिखना जिससे मुख्य उत्तर स्पष्ट दिखाई नहीं देता ।
  31. ज्यामितीय आकृतियों को केवल सजावटी मानकर उनके गणितीय अंतर्संबंधों की उपेक्षा करना ।

34. परीक्षा रणनीति :

  1. चरणबद्ध निरूपण (Stepwise Presentation): परीक्षा में प्रत्येक चरण को स्पष्ट रूप से लिखें । प्रत्येक प्रयुक्त सूत्र को किनारे चौकोर बॉक्स में अवश्य दर्शाएँ 。
  2. मानों की सूची: प्रश्न को हल करना प्रारंभ करने से पूर्व दिए गए मानों जैसे $a$, $d$, $r$, $t_n$ की सूची स्पष्ट रूप से बना लें ।
  3. इतिहास पर ध्यान: विरहाङ्क और आर्यभट्ट के ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित वर्णनात्मक प्रश्नों को अच्छे से तैयार करें ।

35. त्वरित पुनरावृत्ति शीट :

  • AP $n$-वाँ पद: $t_n = a + (n-1)d$
  • AP सार्वअंतर: $d = t_n – t_{n-1}$
  • प्राकृतिक संख्या योग: $S_n = \frac{n(n+1)}{2}$
  • विषम संख्या योग: $S_n = n^2$
  • GP $n$-वाँ पद: $t_n = ar^{n-1}$
  • GP सार्वअनुपात: $r = \frac{t_n}{t_{n-1}}$
  • विरहाङ्क सूत्र: $V_n = V_{n-1} + V_{n-2}$

36. Notes:

  • अनुक्रम: नियमों के अधीन व्यवस्थित संख्याओं की सूची ।
  • स्पष्ट नियम: स्थिति $n$ के आधार पर सीधा मान ज्ञात करने की विधि ।
  • पुनरावर्ती नियम: पिछले पदों के संबंधों से अगला पद ज्ञात करने की विधि ।
  • AP: समान अंतर वाली श्रेणी । ग्राफ हमेशा सरल रेखा बनता है ।
  • GP: समान अनुपात वाली श्रेणी । ग्राफ हमेशा घातीय वक्र बनता है ।

37. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. अनुक्रम क्या है?

उत्तर: अनुक्रम एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित संख्याओं की सूची है जो किसी विशिष्ट नियम का पालन करती है ।

प्रश्न 2. परिमित और अपरिमित अनुक्रम में क्या अंतर है?

उत्तर: परिमित अनुक्रम में पदों की संख्या सीमित होती है, जबकि अपरिमित अनुक्रम अनंत तक चलता रहता है ।

प्रश्न 3. स्पष्ट नियम (Explicit Rule) किसे कहते हैं?

उत्तर: वह सूत्र जो अनुक्रम के किसी भी पद के मान की गणना सीधे उसकी स्थिति संख्या $n$ से करता है ।

प्रश्न 4. पुनरावर्ती नियम (Recursive Rule) का क्या अर्थ है?

उत्तर: वह नियम जो किसी पद को उसके पूर्ववर्ती पदों के संदर्भ में परिभाषित करता है ।

प्रश्न 5. विरहाङ्क अनुक्रम क्या है?

उत्तर: वह अनुक्रम जिसके प्रारंभिक पद $1, 2$ हैं और प्रत्येक अगला पद पिछले दो पदों का योगफल होता है ।

प्रश्न 6. पिंगल कौन थे?

उत्तर: प्राचीन भारतीय गणितज्ञ और छंद-शास्त्री जिन्होंने द्विपद पैटर्नों और मेरु प्रस्तार की नींव रखी थी ।

प्रश्न 7. लघु और गुरु मात्राओं का संबंध किस अनुक्रम से है?

उत्तर: इसका संबंध सीधे विरहाङ्क-फाइबोनैचि अनुक्रम से है ।

प्रश्न 8. स्वर्ण अनुपात (Golden Ratio) का मान कितना होता है?

उत्तर: स्वर्ण अनुपात का मान लगभग $1.618$ होता है ।

प्रश्न 9. समांतर श्रेणी (AP) किसे कहते हैं?

उत्तर: वह श्रेणी जिसके क्रमिक पदों के बीच का अंतर सदैव स्थिर रहता है ।

प्रश्न 10. सार्वअंतर (Common Difference) सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकता है?

उत्तर: हाँ, यह सकारात्मक, नकारात्मक या शून्य भी हो सकता है ।

प्रश्न 11. समांतर श्रेणी का आलेख कैसा होता है?

उत्तर: समांतर श्रेणी का आलेख सदैव एक सरल रेखा होता है ।

प्रश्न 12. गुणोत्तर श्रेणी (GP) किसे कहते हैं?

उत्तर: वह श्रेणी जिसके क्रमिक पदों का अनुपात सदैव स्थिर रहता है ।

प्रश्न 13. सार्वअनुपात (Common Ratio) कैसे ज्ञात किया जाता है?

उत्तर: किसी भी पद को उसके ठीक पूर्ववर्ती पद से विभाजित करके ($r = \frac{t_n}{t_{n-1}}$) ।

प्रश्न 14. गुणोत्तर श्रेणी का आलेख सरल रेखा क्यों नहीं होता?

उत्तर: क्योंकि गुणोत्तर श्रेणी में वृद्धि की दर स्थिर न होकर घातीय (exponential) होती है ।

प्रश्न 15. प्रथम $n$ प्राकृतिक संख्याओं के योग का सूत्र क्या है?

उत्तर: $S_n = \frac{n(n+1)}{2}$ ।

प्रश्न 16. त्रिभुजीय संख्याएँ क्या हैं?

उत्तर: वे संख्याएँ जिन्हें समबाहु त्रिकोण के आकार में डॉट्स द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है ।

प्रश्न 17. वर्ग संख्याओं और विषम संख्याओं में क्या संबंध है?

उत्तर: प्रथम $n$ क्रमिक विषम संख्याओं का योगफल $n^2$ (वर्ग संख्या) होता है ।

प्रश्न 18. फ्रैक्टल (Fractal) क्या होता है?

उत्तर: ऐसी आकृतियाँ जो विभिन्न पैमानों पर स्वयं को बार-बार दोहराती हैं ।

प्रश्न 19. सिएरपिंस्की त्रिभुज के निर्माण की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर: एक समबाहु त्रिभुज के मध्य बिंदुओं को जोड़कर बीच के हिस्से को बार-बार हटाना ।

प्रश्न 20. सिएरपिंस्की कालीन का क्षेत्रफल प्रत्येक चरण में कितना गुना हो जाता है?

उत्तर: प्रत्येक चरण में क्षेत्रफल $\frac{8}{9}$ गुना हो जाता है ।

प्रश्न 21. कार्ल फ्रेडरिक गॉस की प्रसिद्ध कहानी क्या है?

उत्तर: उन्होंने बचपन में अपनी कक्षा में $1$ से $100$ तक का योग अत्यंत तीव्रता से संख्याओं की पेयरिंग (pairing) करके किया था ।

प्रश्न 22. आर्यभट्ट ने संख्याओं के योग के बारे में क्या लिखा था?

उत्तर: उन्होंने अपने ग्रंथ आर्यभटीय में प्रथम और अंतिम पद के औसत को पदों की संख्या से गुणा करने का नियम बताया था ।

प्रश्न 23. समांतर श्रेणी के $n$-वें पद का स्पष्ट सूत्र क्या है?

उत्तर: $t_n = a + (n-1)d$ ।

प्रश्न 24. गुणोत्तर श्रेणी के $n$-वें पद का स्पष्ट सूत्र क्या है?

उत्तर: $t_n = ar^{n-1}$ ।

प्रश्न 25. यदि किसी अनुक्रम का सार्वअंतर शून्य हो, तो वह कौन-सा अनुक्रम होगा?

उत्तर: वह एक स्थिर अनुक्रम (Constant Sequence) होगा, जैसे: $5, 5, 5, \dots$ ।

प्रश्न 26. विरहाङ्क अनुक्रम का प्रकृति में कोई उदाहरण दीजिए।

उत्तर: अनानास की सतह पर स्पाइरल्स की संख्या और सूर्यमुखी के फूलों की पंखुड़ियों की संख्या ।

प्रश्न 27. कंप्यूटर साइंस में अनुक्रमों का क्या महत्व है?

उत्तर: प्रोग्रामिंग लूप्स, सॉर्टिंग एल्गोरिदम और डेटा संपीड़न तकनीकों में इनका व्यापक महत्व है ।

प्रश्न 28. मेरु प्रस्तार को आज पश्चिमी जगत में किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर: पास्कल त्रिकोण (Pascal’s Triangle) ।

प्रश्न 29. क्या किसी अनुक्रम का कोई पद ऋणात्मक हो सकता है?

उत्तर: हाँ, पद का मान ऋणात्मक हो सकता है, परंतु पद की स्थिति $n$ सदैव धनात्मक पूर्णांक ही होगी ।

प्रश्न 30. यदि $a, b, c$ समांतर श्रेणी में हों, तो उनके बीच क्या संबंध होता है?

उत्तर: $2b = a + c$ (अर्थात $b$ दोनों का अंकगणितीय माध्य है)।

प्रश्न 31. यदि $a, b, c$ गुणोत्तर श्रेणी में हों, तो उनके बीच क्या संबंध होता है?

उत्तर: $b^2 = ac$ (अर्थात $b$ दोनों का गुणोत्तर माध्य है) ।

प्रश्न 32. किसी गेंद के उछाल की क्रमिक ऊँचाइयों का अनुक्रम किस श्रेणी का उदाहरण है?

उत्तर: यह गुणोत्तर श्रेणी (GP) का प्रत्यक्ष उदाहरण है ।

प्रश्न 33. सिएरपिंस्की कालीन में काली आकृतियों की संख्या किस दर से बढ़ती है?

उत्तर: यह गुणोत्तर दर से बढ़ती है, स्टेज $n$ में संख्या $8^n$ होती है ।

प्रश्न 34. पिंगल का ऐतिहासिक कालखंड कौन-सा माना जाता है?

उत्तर: लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से दूसरी शताब्दी ईस्वी के मध्य ।

प्रश्न 35. कंप्यूटर कोडिंग में ‘रिकर्शन’ का गणितीय आधार क्या है?

उत्तर: अनुक्रमों के लिए लिखे जाने वाले पुनरावर्ती सूत्र (Recursive formulas) ।

प्रश्न 36. क्या हम अभाज्य संख्याओं के अनुक्रम के लिए कोई स्पष्ट बीजगणितीय सूत्र लिख सकते हैं?

उत्तर: नहीं, अभाज्य संख्याओं का कोई सरल स्पष्ट बीजगणितीय सूत्र उपलब्ध नहीं है ।

प्रश्न 37. द्वि-अंकी संख्या प्रणालियों का विकास सर्वप्रथम किसने किया था?

उत्तर: आचार्य पिंगल ने छंद-शास्त्र में लघु (0) और गुरु (1) के निरूपण द्वारा किया था ।

प्रश्न 38. विरहाङ्क के ग्रंथ का नाम क्या है?

उत्तर: वृत्तजातिसमुच्चय (Vṛttajātisamuccaya) ।

प्रश्न 39. गोपाल और हेमचन्द्र का ऐतिहासिक योगदान क्या है?

उत्तर: उन्होंने विरहाङ्क अनुक्रम का संयोजन शास्त्रीय विश्लेषण हेमचन्द्र छंदानुशासन में किया था ।

प्रश्न 40. यदि किसी एपी का सार्वअंतर ऋणात्मक हो, तो आलेख की रेखा किस दिशा में जाएगी?

उत्तर: रेखा ऊपर से नीचे की ओर (ऋणात्मक ढाल के साथ) जाएगी।

प्रश्न 41. द्वि-अंकी कोडिंग (Binary Hashing) का क्या संबंध है इस अध्याय से?

उत्तर: यह आचार्य पिंगल द्वारा विकसित संयोजनों और घातीय श्रेणियों पर आधारित है ।

प्रश्न 42. क्या कोई श्रेणी एक ही समय में एपी और जीपी दोनों हो सकती है?

उत्तर: हाँ, एक स्थिर श्रेणी (जैसे $3, 3, 3, \dots$) जिसका सार्वअंतर $0$ और सार्वअनुपात $1$ हो।

प्रश्न 43. यदि किसी गुणोत्तर श्रेणी का सार्वअनुपात ऋणात्मक हो, तो पद किस प्रकार बदलेंगे?

उत्तर: पद एकांतर रूप से धनात्मक और ऋणात्मक होंगे, जैसे: $3, -6, 12, -24, \dots$ ।

प्रश्न 44. क्या त्रिभुजीय संख्या का मान कभी दशमलव में हो सकता है?

उत्तर: नहीं, त्रिभुजीय संख्याएँ सदैव पूर्ण धनात्मक पूर्णांक ही होती हैं ।

प्रश्न 45. सिएरपिंस्की कालीन का नाम किस गणितज्ञ के नाम पर रखा गया है?

उत्तर: पोलिश गणितज्ञ वाक्लेव सिएरपिंस्की (Wacław Sierpiński) के नाम पर ।

प्रश्न 46. फाइबोनैचि ने अपनी पुस्तक किस वर्ष में लिखी थी?

उत्तर: वर्ष 1202 ईस्वी में ।

प्रश्न 47. खरगोशों की जनसांख्यिकी वृद्धि का संबंध किस ऐतिहासिक अनुक्रम से है?

उत्तर: विरहाङ्क-फाइबोनैचि अनुक्रम से ।

प्रश्न 48. क्या हम स्पष्ट नियम का उपयोग करके यह जान सकते हैं कि कोई संख्या किसी श्रेणी में किस स्थान पर है?

उत्तर: हाँ, स्पष्ट सूत्र के बराबर उस संख्या को रखकर $n$ का मान निकाला जा सकता है ।

प्रश्न 49. ‘गणित मंजरी’ पुस्तक की क्या विशेषता है?

उत्तर: यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप खोजी और व्यावहारिक समझ को बढ़ावा देती है ।

प्रश्न 50. अनुक्रम और श्रेणी का अध्ययन कक्षा 10 में किस प्रकार सहायक है?

उत्तर: यह कक्षा 10 के समांतर श्रेणियों के जटिल अध्यायों के लिए एक सुदृढ़ और व्यापक वैचारिक आधार तैयार करता है ।

कक्षा 9th गणित के नवीनतम पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक के लिए, आप NCERT की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।”

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